नोटबंदी से जिस्मफरोशी के धंधे में आया ये फर्क, इस केंद्रीय मंत्री ने किया दावा

नोटबंदी का एक वर्ष पूरा होने पर जहाँ विपक्ष काला दिवस मना रहा है वहीं सरकार की तरफ से नोट बंदी के फैसले को सही साबित करने के लिए नोट बंदी के अलग अलग फायदे गिनाये जा रहे हैं।  नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार ने दो बड़े दावे किये थे, पहला यह कि इससे काले धन पर रोक लगेगी और दूसरा इससे टेरर फाइंडिंग रुक जायेगी जिससे आतंकी घटनाओं पर लगाम कसी जा सकेगी। सरकार की तरफ से नोट बंदी लागू करने के पीछे यही दो बड़े कारण बताये गए थे। लेकिन तीसरा कारण एक साल बाद नया कारण सामने आया है। बीजेपी के एक मंत्री ने दावा किया है कि नोटबंधी से वैश्यावृत्ति पर भी कमी आई है। ऐसा क्यों कहा इसका आंकड़ा क्या है ये किसी को समझ नहीं  आया और न मंत्री समझा पाए।

महिलाओं  की खरीद फरोख्त में आई कमी

मोदी सरकार लगातार नोटबंदी को फायदे गिना रही है। टेरर फंडिग से लेकर कालाधन कम होने तक, डिजिटल ट्रांजिक्शन में बढ़ोत्तरी भी बताई जा रही है। लेकिन केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रविशंकर प्रसाद ने फायदा गिनाते हुए कहा कि वेश्यावृत्ति में भारी कमी आई है। दरअसल नोटबंदी के फायदे गिनाने के लिए केंद्र के मंत्री देशभर में घूम रहे हैं. इसी कड़ी में सूचना प्रौद्योगिकी और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भोपाल में ये दावा किया. रविशंकर प्रसाद ने गृह मंत्रालय से मिले आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जबसे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी लागू की, कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं, नक्सली हमलों के साथ साथ वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं की तस्करी भी कम हुई है.

पैनकार्ड धारकों की जांच जारी

इतना ही नहीं रविशंकर प्रसाद ने दावा किया है कि नोटबंदी के बाद जो 99 प्रतिशत राशि वापस आई है, वो सारी सफेद नहीं है। उन्होंने बताया कि 23 लाख बैंक खातों में जमा 3.68 करोड़ नकदी की जांच चल रही है। वहीँ 17.73 लाख पैन कार्ड धारकों की जांच की जा रही है, 4.7 लाख लेनदेन भी संदिग्ध बताए गए हैं। इतना ही नहीं केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 16000 करोड़ रुपये वापस नहीं आए हैं, जबकि 29,213 करोड़ रुपये की अघोषित आया छापों के दौरान पकड़ी गई। सिर्फ 1.5 लाखों लोगों ने कुल मुद्रा का एक तिहाई यानी 5 लाख करोड़ रुपये जमा करा दिए. 2.24 लाख शेल कंपनियों का पंजीयन रद्द किया गया है।

कैसे हुई थी नोटबंदी, क्या हुआ था ऐलान

8 नवंबर 2016,यानी आज से ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टीवी पर आए। देश के नाम अपनी स्पीच में उन्होंने कहा कि रात 12 बजे से 1000 और 500 के नोट चलन से बाहर हो जाएंगे। उनके एक एलान से महज चार घंटे में 86% करंसी यानी 15.44 लाख करोड़ रुपए के नोट चलन से बाहर हो गए। ये रकम 60 छोटे देशों की ग्रॉस डॉमेस्टिक प्रोडक्ट GDP के बराबर है। नोटबंदी का ऐसा फैसला 1978 के बाद हुआ था। तब जनता पार्टी की सरकार ने 1000, 5000 और 10000 हजार के नोटों को बंद कर दिया था।

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