नोटबंदी के एक साल: दो तिहाई छोटे दुकानदार स्वीकार करने लगे थे नोटबंदी के बाद कैशलेस भुगतान

बेंगलुरु: आज ही के दिन एक साल पहले देश के प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था। आपको बता दें नोटबंदी के बाद तुरंत लोगों को थोड़ी बहुत परेशानी तो हुई लेकिन इसका असर कुछ जगहों पर अच्छा देखने को मिला है। नोटबंदी के बाद से छोटे कारोबारियों का कैशलेस भुगतान के प्रति नजरिया बदला है। पहले ज्यादातर व्यापारी कैशलेस लेन-देन में संकोच करते थे लेकिन नोटबंदी के बाद से सभी ने ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार करना शुरू कर सेंटर फॉर डिजिटल फाइनेंशियल इंक्लूजन (सीडीएफआइ) के एक अध्ययन के अनुसार ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के 63 फीसद फुटकर व्यापारी डिजिटल ट्रांजैक्शन शुरू करने को तैयार हैं।

कौन-कौन सी चीजें डाल रही हैं बाधा:

सीडीएफआइ के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर कृष्णन धर्मराजन और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बेंगलुरु की डिजिटल इनोवेशन लैब के प्रिंसिपल आर्किटेक्ट शशांक गर्ग ने इस अध्ययन की अगुआई की है। धर्मराजन ने बताया कि, “हमने दो साल पहले यह जानने के लिए अध्ययन शुरू किया था कि किराना स्टोर कितने कैशलेस हैं। यह भी जानने की कोशिश की गई कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने वाले और रुकावट डालने वाले कौन-कौन से कारक हैं? साथ ही किराना स्टोर के आसपास ईकोसिस्टम कैशलेस है या नहीं।

अध्ययन के बीच में ही हो गयी नोटबंदी:

इस अध्ययन का मकसद यह जानना था कि किसी गरीब को तकनीक आधारित लेनदेन के केंद्र में कैसा लाया जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि, “जब अध्ययन चल रहा था, उसी समय आठ नवंबर को केंद्र सरकार ने नोटबंदी लागू कर दी। इसके बाद हमें अपने अध्ययन को नोटबंदी के साथ ही समायोजित करना पड़ा। लेकिन इससे हमारे अध्ययन को एक स्पष्ट पहलू मिल गया। हमने इस पर गौर किया कि खुदरा दुकानदारों के लेनदेन में अनायास क्या परिवर्तन आया। अध्ययन में बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा।“

63 प्रतिशत विक्रेताओं ने जताई कैशलेस के लिए रजामंदी:

नोटबंदी के पहले सिर्फ 31 फीसद लोग कैशलेस लेनदेन को तैयार थे जबकि बाद में 63 फीसद दुकानदार डिजिटल लेनदेन करने लगे। इस साल मार्च तक वास्तविक कैशलेस लेनदेन सिर्फ 11 फीसद था जबकि बातचीत में 63 फीसद विक्रेताओं ने डिजिटल लेनदेन के लिए रजामंदी जताई थी। 11 फीसद कैशलेस लेनदेन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में दर्ज किये गये। नोटबंदी के बाद कैशलेस लेनदेन में तेजी आई तो वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश में दस लाख प्वाइंट ऑफ सेल यानी स्वाइप मशीनें उपलब्ध कराने की घोषणा की। अध्ययन में इस तथ्य पर गौर किया गया है कि देश में 91 फीसद लोगों के पास मोबाइल फोन हैं। जबकि 41 फीसद लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कैशलेस लेनदेन अपनाने के लिए यह काफी अच्छा आधार है।

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