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क्यों नहीं किया जाता महिलाओं की लंबी उम्र के लिए व्रत? क्या सच में व्रत करने से ..

तीज का त्योहार उत्तर प्रदेश और बिहार में बहुत धूम-धाम से मनाया जाता है. यह महिलाओं का पर्व है. पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. इस त्योहार में गणेश जी को पूजा जाता है. यह त्योहार महिलाओं के बीच इतना प्रचलित है कि पूरे साल उन्हें इसका बेसब्री से इंतज़ार रहता है. तीज आने पर महिलाएं बड़े ही मनोयोग से इस व्रत को करती हैं, और करें भी क्यों ना पति की लंबी उम्र का जो सवाल है. व्रत के बदले पति भी पत्नियों को तोहफा देकर अपना फ़र्ज़ अदा करते हैं.

महिलाएं ही क्यों पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं :

पर आपने कभी सोचा है कि आखिर महिलाएं ही क्यों पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं? क्यों किसी भी धर्म या समाज में उनकी बेहतरी के लिए कोई व्रत या त्योहार नहीं है? बीमार होने के बावजूद स्त्रियां बगैर पानी पिए यह व्रत रखती हैं. पति तो तैयार होकर दफ्तर निकल जाते हैं. इधर महिलाओं को सारे कष्ट उठाने पड़ते हैं. लेकिन तीज के कथा में कहीं नहीं लिखा कि शादीशुदा महिलाओं को यह व्रत रखना चाहिए.

कहा जाता है कि कुंवारी पार्वती जी ने शिवजी को पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. तपस्या के दौरान पार्वती जी की सहेलियों ने ही उन्हें अगवा कर लिया था. इसलिए इस व्रत को हरतालिका नाम से भी जाना जाता है. हरत का अर्थ ‘अगवा’ और तालिका का अर्थ ‘सहेली’ होता है.

इसलिए कथा के अनुसार इस व्रत को केवल कुंवारी लड़कियों को ही करना चाहिए ना की शादीशुदा महिलाओं को. आज तक किसी भी धर्म में हमेशा से ही पाप को हथियार बनाकर डराया जाता रहा है. तीज के त्योहार के साथ भी डर की आस्था जुड़ी हुई है. व्रत नहीं किया तो पति की मृत्यु हो जायेगी या बुढ़ापे में सहारा छीन जाएगा आदी.

अर्थात महिलाओं के जीने मरने से कोई फर्क नहीं पड़ता. पुरुषों को जीना चाहिए. इसी वजह से आज भी बेटियों को पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता है. वहीँ दूसरी तरफ आदमियों की लंबी उम्र के लिए माँ जितिया करती है तो पत्नी तीज.

तीज कथा में भी महिलाओं को अनेकों प्रकार से डराया जाता है. जैसे कि व्रत ना करने पर महिलाएं सात जन्म तक बंध्या रहती है, हर जन्म में विधवा होती है और मृत्यु के बाद नरक में जाती है आदि. इसके अलावा व्रत के दौरान किसी कारणवश पानी पी लें तो अगले जन्म में जोंक बन जायेंगी, दूध पी लें तो सांप, मिठाई खा लें तो चींटी, दही खाने पर बिल्ली और फल खाने पर बंदरिया. इतना ही नहीं व्रत में आप सो भी नहीं सकते क्योंकि सोने पर अजगर बन जाते हैं.

लेकिन सवाल यह है कि अगर जन्म और मृत्यु इंसानों के हाथ है तो ईश्वर की क्या ज़रुरत थी? व्रत करने भर से किसी की आयु लंबी हो जाती तो कोई पुरुष मरता ही नहीं. पुरुषों की संख्या इस देश में सर्वाधिक होती.

किसी परिवार में एक महिला की मृत्यु जल्दी हो गयी. वह तीज का व्रत नहीं करती थी. पर उसका पति आज भी जिंदा है. उसी परिवार की दूसरी महिला पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती थी. पर उसके पति की असमय मृत्यु हो गयी.

पर सच बात तो यह है कि जन्म और मृत्यु दोनों पहले से ही तय कर दिए गए हैं. व्रत करने से किसी की आयु बढ़ती या घटती नही है. यह सिर्फ बॉडी को डेटोक्सीफाई करने का एक तरीका होता है.

 

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