बॉलीवुड

पिता के ‘चौथे’ पर अनुपम खेर ने मनाया था जश्न, मां से कही थी यह ख़ास बात

बॉलीवुड की दुनिया बड़ी रंगीले और गजब की है. किसी भी कलाकार को यह फर्श से अर्श तक ले जाने का काम कर सकती है. बाकायादा वह अपने काम के प्रति सजग और लगनशील हो. साथ ही वह अपने काम से लोगों का दिल जीतने की काबिलियत रखता हो. अगर ऐसा होता है तो वह दौलत और शोहरत दोनों का ही बेशुमार हकदार बनता है. हिंदी सिनेमा के दिग्गज़ अभिनेता अनुपम खेर भी इसमें शामिल हैं.

साथ ही आपको यह भी जानना जरूरी है कि, एक समय ऐसा था जब उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहने वाले अनुपम खेर ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से अपनी जिंदगी की यात्रा के बारे में बताया है और इस दौरान उन्होंने खुद से जुड़ी कई अनसुनी जानकारी भी साझा की है.

अनुपम खेर ने बताया है कि, वे आज जिस मुकाम पर है उसमे उनकी मां का बहुत बड़ा योगदान और बलिदान है. इंस्टाग्रा पर अनुपम ने अपनी मां के साथ एक फोटो साझा करते हुए कैप्शन में लिखा है कि, ‘मेरे पास बहुत सी यादें हैं, जब मां मुझे स्कूल भेजा करती थीं. स्कूल जाने से पहले मां मुझसे कहती थीं, ‘आज तुम्हारा सबसे अच्छा दिन है.’ और एक बच्चे के रूप में, मैं इस पर भरोसा करता था.

 

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ये मुझे सपने देखने और ये भूलने में मदद करता था कि मैं कितना गरीब था. उस वक्त मेरे पापा की कमाई सिर्फ महीने के 90 रुपए थी. इसलिए मां ने अपनी ज्वैलरी बेच दी थी, ताकि वे हमें अच्छे स्कूल में पढ़ा सकें. लेकिन मैं पढ़ाई में बिल्कुल भी अच्छा नहीं था, इसलिए मां बहुत परेशान हो जाती थीं. अगर पापा उदार हो जाते थे, तो वह कहती थीं, ‘ज्यादा तारीफ मत करो.’ वह चाहती थीं कि हम अच्छे से पढ़ाई करें.’

अनुपम खेर ने कैप्शन में आगे लिखा है कि, ‘मां मुझे एक इंसान बनाने के लिए जिम्मेदार थीं. जब मैं 10 साल का था, तो एक साधु स्कूल आया था. मां ने मुझे 5 रुपए दिए थे, ताकि मैं उस साधु को दे दूं. लेकिन मैंने 2 रुपए साधु को देकर, बाकी बचे पैसे अपने जेब में रख लिए थे. जब मां ने मुझे इसके बारे में पूछा, तो मैंने झूठ बोल दिया था. बाद में जब मां ने पैसे पाए, तो उन्होंने तब तक मुझे घर से बाहर 3 घंटे तक खड़ा रखा, जब तक मैंने अपनी गलती स्वीकार नहीं कर ली. उसके बाद मां ने मुझसे वायदा लिया कि मैं कभी ऐसा दोबारा नहीं करूंगा और फिर मुझे घर के अंदर बुलाया था.’

अनुपम ने आगे बताया कि, ‘जब मैंने मुंबई में 37 रुपये लेकर एक अभिनेता के रूप में काम शुरू किया, तो उनके वैल्यूज मेरे पास थे. कई बार मैं प्लेटफॉर्म पर सो जाता था, लेकिन कभी अपनी मां को इस बारे में नहीं बताता था और जब मां बीमार होती थीं, तो वह भी मुझे कुछ नहीं बताती थीं. हम दोनों एक-दूसरे को प्रोटेक्ट करने की कोशिश करते थे, और जब मैंने फिल्में करना शुरू किया, तब मां मुझे जमीन पर रहने की हिदायत देती थीं. वह मुझसे कहती थीं, ‘चाहे तुम जितना आसमान में उड़ो, हमेशा उदार रहना. पापा के जाने के बाद मैं अपनी मां से बेहद क्लोज हो गया था. उन्होंने अपने पार्टनर को खो दिया था और मैंने अपने बेस्ट फ्रेंड को.’

अनुपम ने आगे लिखा कि ‘पापा के चौथे पर, मैंने कहा था, ‘शोक जताने के बजाय, उनकी जिंदगी को सेलिब्रेट करते हैं.’ हम सब ने कलरफुल कपड़े पहन रखे थे और एक रॉक बैंड को बुलाया था. हमने पापा के साथ अपनी शौकीन यादें सुनाईं. मॉम ने कहा, ‘मुझे नहीं पता था कि मेरी शादी एक ऐसे अद्भुत व्यक्ति से हुई थी.’ बाद में जब हम बेस्ट फ्रेंड्स बने, तो मां मेरे साथ न केवल अवॉर्ड शो में जाती, बल्कि मेरे दोस्तों के साथ भी चैट करती थीं. जब भी वह कुछ कहती थीं, मैं बिना बताए उनका वीडियो बनाने लगता था और उसे सोशल मीडिया पर शेयर कर देता था. वह वीडियो वायरल भी होता था.’

अनुपम ने इंस्टाग्राम पर काफी लम्बा-चौड़ा कैप्शन दिया है. उन्होंने आगे लिखा कि, ‘मैं अक्सर अपनी मां का वीडियो बनाता था और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करता था. उन्हें पता नहीं चलता था कि उन्हें कैमरे में कैप्चर किया जा रहा है. इसलिए वह सूरज के नीचे की हर चीज के बारे में बात करती थीं. चाहे वह उसकी बहू की बुराई हो या उसके बाल झड़ने की समस्या. जल्द ही वह इतनी पॉपुलर बन गईं कि राह चलते लोग उनसे पूछते थे, ‘#dularirocks कैसी हो?’ उनके वीडियो के बारे में मां को तब तक कुछ नहीं पता था, जब तक लोगों ने उनसे सेल्फी के लिए नहीं पूछा था. जब उन्हें इतना ज्यादा अटेंशन मिलने लगा, तो उन्होंने मुझसे कहा, ‘क्या करता रहता है तू?’ अब वह पहले से ज्यादा सतर्क हो गई हैं. इसलिए मैंने उन्हें चुपके से फिल्माना शुरू कर दिया है. लेकिन जब भी वह मुझे देखती हैं, तो सबसे पहली बात यह पूछती हैं कि आज कैमरा कहां छुपाकर रखा है?’

बता दें कि, अनुपम खेर का जन्म हिमाचल प्रदेश के शिमला में हुआ था. वे करीब 36 सालों से फिल्म इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं. उनकी पहली हिंदी फिल्म सारांश थी, जो कि साल 1984 में आई थी. अनुपम खेर ने अपने 36 साल के करियर में 500 से भी अधिक फिल्मों में काम किया है.

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