भारत में इन जगहों पर नहीं मनाया जाता है दशहरा, लोग मनाते हैं मातम

न्यूजट्रेंड वेब डेस्कः  भारत मे त्यौहारों को बहुत महत्व दिया गया है। इनको मनाने के पीछे ऐसी कहानियां जो समाज में अच्छा संदेश देती हैं। इन्हीं त्यौहारों में से एक है विजयादशमी या दशहरा का त्यौहार। इस दिन रावण का पूतला जलया जाता है और 9 दिन तक माता रानी की सेवा पूजा की जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि 9 दिन पूजा करने के बाद दशमी के दिन ही भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बूराई पर अच्छाई की जीत प्राप्त की थी। पूरे देश में ये त्यौहार हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि इसी भारत में कई ऐसी जगह भी हैं जहां दशहरे वाले दिन खुश नहीं बल्कि रावण की मौत का मातम मनाया जाता है।

जोधपुर की इस जगह पर होता है रावण का श्राद्ध

जोधपुर में दवे गोधा समाज के लोग खुद को रावण का वंशज मानते हैं। उनके लिए दशहरा का दिन खराब दिन होता है क्योंकि उके पूर्वज का वध किया गया था। वो रावण दहन नहीं देखते हैं और तो और श्राद्ध पक्ष में रावण का श्राद्ध भी किया जाता है।

उदयपुर में रावण को मानते हैं भगवान

सिंधी समाज  बिलोचिस्तान पंचायत के कई लोग अपने बच्चे का मुंडन संस्कार रावण की छाया  में करते हैं और ये परंपरा लगभग 67 वर्षों से चली आ रही है।

 यूपी का बिसराख गांव है रावण का जन्म स्थान

जहां पूरे देश में खुशी खुशी रावण जलाया जाता है वहीं यूपी में भी ये त्यौहार बहुत खुश के साथ मनाते हैं, लेकिन यूपी के बिसराख गांव में दशहरे के दिन को मातम के रुप में मनाते हैं। दरअसल बिसराख गांव को रावण की जन्मस्थली मानते हैं। इस दिन एक भव्य यज्ञ का आयोजन करके रावण की आत्मा की शांति की प्रर्थना की जाती है। यहां पर ऐसी मान्यता है कि रावण के पिता विश्रवा मुनि का जन्म हुआ था और सइसी जगह उन्हें शिवलिंग की प्राप्ती हुई थी। यहां पर आपको रावण की मूर्ति भी मंदिरों में मिल सकती है।

राजस्थान के मंदौर गांव में है रावण का मंदिर

बिसराख के अलावा राजस्थान के मंदौर गांव में भी रावण जलने की खुशी नहीं मनाई जाती है।दरअसल रावण की पत्नी मंदोदरी राजा मंदावर की बेटी थीं। राजा मंदावर राजस्थान के गांव के रहने वाले थे उस लिहाज से मंदौर रावण का ससुराल माना जाता है और यहां के लोग रावण के मरने का दूख मनाते हैं। यहां पर रावण की मूर्ति वाला मंदिर भी स्थापित है।

दशहरा से पहले क्यों मनाते हैं नवरात्री

दशहरा मनाने के पीछे की कहानी तो आप बचपन से पढ़ते और सुनते आ रहे होंगे की इस दिन श्रीराम ने रावण का खात्नमा किया था, लेकिन इससे पहले मां दूर्गा की पूजा क्यों होती है ये जानना जरुरी है। रावण बहुत पराक्रमी राजा था और उसे अपनी विद्या और ज्ञान का बहुत घमंड था।

भागवान श्री राम ने रावण को मारने से पहले मां दूर्गा की पूजा की थी। उस वक्त मां दूर्गा ने राम की परीक्षा लेते पूजा में रखे कमल के फूल में स एक फूल गायब कर दिया। राम जी को कमल नयनों वाला कहा जाता है क्योंकि उनकी आंखे कमल समान खूबसूरत थीं। उन्होंने अपनी आंखे पूजा में समर्पित करने का फैसला किया तो माता रानी प्रसन्न हो गईं और उन्हें जीत का वरदान दिया। स्वयं मां दूर्गा ने भी महिसाषुर का वध इसी दिन किया था।