राजनीति

भरे सदन में हुई सचिन तेंदुलकर की बेईज्जती, चाह कर भी कुछ बोल ना पाए

क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, जिन्होने दुनिया के खतरनाक गेंदबाजों के छक्के छुड़ाएं हैं.. हर बॉल को अपनी शानदार शॉट से ठिकाने लगाया है वो राजनीति के मैदान में ऐसे फंसे कि राज्यसभा के ‘डेब्यू’ मैच में जीरो पर ही आउट हो हुए।जी हां, 2012 में सांसद मनोनीत होने के बाद पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर गुरुवार को राज्यसभा में ‘राइट टू प्ले’ के मुद्दे पर अपना पहला भाषण देने वाले थे, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण वो राज्यसभा में अपना ‘डेब्यू’ स्पीच भी नहीं दे पाएं।

दरअसल कांग्रेस गुजरात चुनाव के दौरान पीएम मोदी द्वारा पूर्व पीएम में मनमोहन सिंह पर लगाये गए आरोप के लिए माफी की मांग कर रही है। ऐसे में गुरुवार को भी 2जी स्पेक्ट्रम केस में मनमोहन सिंह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई टिपण्णी से नाराज कांग्रेसियों ने हंगामा किया, जिसकी वजह सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक स्थगित की गई। इसके बाद जब दोबारा सदन की कार्यवाही 2 बजे शुरू हुई तो फिर से कांग्रेसी सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी भारत रत्न और सांसद सचिन तेंदुलकर गुरुवार को राज्यसभा में पहली बार भाषण देने वाले थे, लेकिन जैसे वो कुछ बोलते विपक्ष का हंगामा तेज हो गया।

ऐसे में सदन के सभापति वेंकैया नायडू ने कांग्रेसी सांसदो से सचिन तेंदुलकर को बोलने देने का आग्रह भी किया .. नायडू ने कहा, ‘एक सम्मानीय सदस्य, जिसे भारत रत्न के खिताब से नवाजा जा चुका है, वो खेल जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बोलना चाहता है.. उन्हें बोलने दीजिए.. पूरा ध्यान सचिन जी पर होना चाहिए।’

पर फिर भी विपक्ष का हंगामा खत्म नही हुआ उधर सचिन इस राजनीति के मैदान में मूक दर्शक बनकर रह गए .. चाह कर भी वो कुछ बोल नही पा रहे थे। ऐसे में विपक्ष के हंगामे को देखते हुए कुछ मिनटों के बाद चेयरमैन वेंकैया नायडू ने राज्यसभा को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया साथ ही उन्होने इसके लाइव प्रसारण रोकने के निर्देश भी दिए।

मीडिया रिपोर्ट की माने तो सचिन अपने ‘डेब्यू’ स्पीच में देश में खेल और खिलाड़ियों को लेकर स्थिति और उनकी जरूरतों को लेकर  अपनी बात रखने वाले थे। इसके अलावा ओलंपिक की तैयारियों और किस तरह भारतीय खिलाड़ी दुनियाभर में अच्छा प्रदर्शन कर सकते है इस पर भी सचिन अपने सुझावों को रखने वाले थे। साथ ही इस दौरान स्कूल के सिलेबस में खेल को विषय के तौर रखें जाने को लेकर भी सचिन चर्चा करने वाले थे। गौरतलब है कि सचिन तेंदुलकर ने बीते 24 अक्टूबर को पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी खिलाड़ियों के लिए कुछ जरूरी सुविधाओं की मांग की थी। ऐसे में उम्मीद थी कि गुरूवार को अपने पहले भाषण में सचिन देश में खेल और खिलाड़ियों की बेहतरी के लिए कुछ जरूरी सुझाव और बात रखेंगे। पर अफसोस की राजनीति के खेल के आगे देश के सबसे महान खिलाड़ी की एक ना चली और वो सदन के हंगामें का मूक दर्शक बन कर रह गया।

हालांकि सचिन को बोलने का मौका न मिलने पर कई राजनेताओं ने इसे उनकी बेईज्जती बताते हुए इस घटना की कड़ी निन्दा भी की है। इस मामले में राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा कि ‘सचिन ने पूरी दुनिया में भारत का नाम ऊंचा किया है ऐसे में उन्हें संसद में न बोलने दिया जाना शर्मनाक है क्या अब संसद में  सिर्फ राजनेताओं को ही बोलने का मौका दिया जाएगा।’

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