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इस वजह से अंडरवर्ल्ड ने गुलशन कुमार को उतारा था मौत के घाट, एक एक बाद एक मारी थी 16 गोलियां

टी सीरीज कंपनी के फाउंडर और उसकी स्थापना करने वाले गुलशन कुमार(Gulshan Kumar) की आज बर्थ एनिवर्सरी है. गुलशन कुमार को भजन सम्राट के नाम से भी जाना जाता है. टी सीरीज का नाम भारत की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी के रूप में खड़ा करने के पीछे गुलशन कुमार की दिन रात की कड़ी मेहनत थी. लेकिन क्या आपको पता है इस कम्पनी को चलने से पहले गुलशन कुमार अपने पिता के साथ जूस बेचा करते थे.

टी सीरीज के निर्माता गुलशन कुमार के पिता चंद्रभान दुआ दिल्ली के दरियागंज में जूस बेचकर अपना घर का काम चलाते थे. गुलशन अपने पिता के साथ बचपन से ही दुकान पर रहने लगे और व्यापार सिख गए. जब गुलशन कुमार 23 साल के थे तो उन्होंने अपने परिवार की मदद से एक दुकान संभाली और रिकॉर्ड और ऑडियो कैसेट बेचना शुरू कर दिया. इसके बाद गुलशन ने अपनी कंपनी खोली और भक्ती भरे गानों को बनाने लगे. उन्होंने शुरूआती समय में भजन और भक्ति गीत स्थानीय सिंगर्स की आवाज़ में रिकॉर्ड करवाएं.

इन रिकार्ड्स किये गए कैसेट को उन्होंने बहुत ही सस्ते दामों में बेचा. गुलशन ने अपने टी सीरीज ब्रांड के जरिए कई लोगों का इंडस्ट्री में डेब्यू कराया. म्यूजिक इंडस्ट्री में अपना बड़ा नाम बनाने के बाद गुलशन ने फिर फिल्मों की तरफ अपना रुख लिया. गुलशन कुमार अपनी मेहनत, अपने विज़न और अपने जज्बे से म्यूजिक इंडसट्री को एक नए मुकाम पर ले गए. ऑडियो कैसेट की बिक्री से म्यूजिक इंडस्ट्री के बिज़नेस में कदम रखने वाले गुलशन ने इन्ही कैसेट को सस्ते दामों पर बनाकर आम लोगों के बीच मुहैया करवाया.

अपनी सस्ती म्यूजिक कैसेट से गुलशन कुमार ने हिंदी फिल्म संगीत जगत में एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया. गुलशन ने इसके बाद 1989 में फिल्म लाल दुपट्टा कमाल का से बतौर प्रोड्यूसर डेब्यू किया था. इसके बाद गुलशन ने अपने ऑडियो कैसेट के बिज़नेस को ‘सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज’ का नाम दिया जो आगे चलकर टी-सीरीज जैसे बड़े नाम में तब्दील हुआ.

गुलशन कुमार ने 1970 के दशक में सस्ते दरों पर अच्छी क्वालिटी वाले म्यूजिक कैसेट बेचना शुरू कर दिया. यह अन्य बड़े म्यूजिक लेबल से सस्ता और काफी अच्छा था. इसलिए लोग भी इन्ही की कैसेट पर आकर्षित होने लगे थे. गुलशन कुमार के कारण ही इस फिल्म जगत को सोनू निगम, कुमार शानू और अनुराधा पौडवाल जैसे गायक मिले हैं. गुलशन कुमार की माँ वैष्णो देवी मंदिर में बहुत आस्था थी. वैष्णो देवी मंदिर में भंडारे की शुरुआत भी उन्होंने ही की थी. यह भंडारा आज भी चलता है.

12 अगस्त 1997 वो दिन था जब गुलशन मंदिर से अपने घर जा रहे थे तब कुछ बदमाशों ने गुलशन कुमार पर गोलियां बरसा दीं. गुलशन की मौत सभी के लिए काफी शॉकिंग थी. किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी बड़ी हस्ती को कोई ऐसे मार सकता है. मुंबई पुलिस ने उनकी हत्या की योजना के लिए उस समय की मशहूर म्यूजिक जोड़ी नदीम-श्रवण के नदीम को शक के घेरे में लिया था. नदीम भागकर इंग्लैंड चले गए थे और वहां की नागरिकता भी ले ली थी. गुलशन कुमार के कुल तीन बच्चे हैं, जिनमें से एक लड़का और दो लड़कियां हैं. गुलशन कुमार की हत्या के बाद उनका पूरा बिज़नेस उनके बेटे भूषण कुमार ने संभाला हुआ है.

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