अध्यात्म

पारम्परिक पूजा से कई गुना ज़्यादा शक्तिशाली होती है मानस पूजा, जानें पूजा विधि एवं लाभ

मानस पूजा बेहद ही ताकतवर पूजा होती है और इस पूजा को करने से हर परेशानी को दूर किया जा सकता है। इसलिए जीवन में कोई भी दुख आने पर आप मानस पूजा कर लें। ये पूजा करने से आपके दुख दूर हो जाएंगे और जीवन खुशियों से भर जाएगा। हालांकि मानस पूजा क्या होती है। इसके बारे में बेहद ही कम लोगों को जानकारी होती है। दरअसल जो पूजा सच्चे मन से की जाती है। उसे मानस पूजा कहा जाता है। मानस पूजा के तहत आप अपने ईष्टदेव का पूजन करते हैं।

इस तरह से होती है मानस पूजा

  • मानस पूजा को आप कभी भी कर सकते हैं। आप चाहें तो रोज भी ये पूजा कर सकते हैं। ये पूजा बेहद ही सरल है।
  • इस पूजा की विधि के तहत आप सुबह स्नान करके, पूजा घर की सफाई कर लें। उसके बाद पूजा घर में एक चौकी रख दें और इसे अच्छे से सजाएं।
  • अब इस पर अपने ईष्टदेव की मूर्ति रख दें।
  • ईष्टदेव की मूर्ति रखने के बाद उनके सामने एक दीपक जला दें और उन्हें फूल अर्पित कर दें।
  • पूजा करते हुए आप नीचे बताए गए मंत्रो को क्रम में पढ़ें।

ॐ लं पृथिव्यात्मकं गन्धं परिकल्पयामि:

मंत्र का अर्थ- हे प्रभो मैं आपको पृथ्वीरूप गंध अर्पित करता हूँ.

ॐ हं आकाशात्मकं पुष्पं परिकल्पयामि:

हे प्रभो मैं आपको आकाशरूप पुष्प अर्पित करता हूँ.

ॐ यं वाय्वात्मकं धूपं परिकल्पयामि:

हे प्रभो मैं आपको वायुदेव के रूप में धूप अर्पित करता हूँ.

ॐ रं वह्नयान्तकं दीपं दर्शयामि:

हे प्रभो मैं आपको अग्निदेव के रूप में दीपक अर्पित करता हूँ.

ॐ वं अमृतात्मकं नैवेद्यं निवेदयामि:

हे प्रभो मैं आपको अमृत के समान अर्पित करता हूँ.

ॐ सौं सर्वात्मकं सर्वोपचारं समर्पयामि:

हे प्रभो मैं आपको सर्वात्मा के रूप में संसार के सभी उपचारों को आपके चरणों में अर्पित करता हूँ.

  • पूजा पूरी होने के बाद आप आरती जरूर पढ़ें। क्योंकि बिना आरती के कोई भी पूजा पूरी नहीं मानी जाती है। साथ में इस बात का भी ध्यान रखें कि आप ये आरती खड़े होकर करें और आरती करते समय धूप जरूर जलाएं।

इस प्रकार है आरती ॐ जय जगदीश हरे –

ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त ज़नो के संकट, दास ज़नो के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिन से मन का
स्वामी दुख बिन से मन का
सुख सम्पति घर आवे
सुख सम्पति घर आवे
कष्ट मिटे तन का
ॐ जय जगदीश हरे
मात पिता तुम मेरे
शरण गहूं किसकी
स्वामी शरण गहूं किसकी
तुम बिन और ना दूजा
तुम बिन और ना दूजा
आस करूँ जिसकी
ॐ जय जगदीश हरे
तुम पूरण, परमात्मा
तुम अंतरियामी
स्वामी तुम अंतरियामी
पार ब्रह्म परमेश्वर
पार ब्रह्म परमेश्वर
तुम सबके स्वामी
ॐ जय जगदीश हरे
तुम करुणा के सागर
तुम पालन करता
स्वामी तुम पालन करता
मैं मूरख खलकामी
मैं सेवक तुम स्वामी
कृपा करो भर्ता
ॐ जय जगदीश हरे
तुम हो एक अगोचर
सबके प्राण पति
स्वामी सबके प्राण पति
किस विध मिलु दयामय
किस विध मिलु दयामय
तुम को मैं कुमति
ॐ जय जगदीश हरे
दीन-बन्धु दुःख-हर्ता
ठाकुर तुम मेरे
स्वामी रक्षक तुम मेरे
अपने हाथ उठाओ
अपनी शरण लगाओ
द्वार पड़ा तेरे
ॐ जय जगदीश हरे
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा
स्वामी पाप हरो देवा
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ
सन्तन की सेवा
ॐ जय जगदीश हरे
ओम जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त ज़नो के संकट
दास ज़नो के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे
ॐ जय जगदीश हरे
स्वामी जय जगदीश हरे
भक्त ज़नो के संकट
दास जनो के संकट
क्षण में दूर करे
ॐ जय जगदीश हरे

ये पूजा सच्चे मन से करें। आपको इसका फल जरूर मिलेगा।

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