जिंदा होते तो स्वदेशी के सबसे बड़े ब्रांड होते राजीव दीक्षित,जानिये इनके राष्ट्रवाद के बारे में

स्वदेशी के प्रखर प्रवक्ता कहे जाने वाले राजीव दीक्षित के बारे में कहा जाता है कि अगर वो आज जिंदा होते तो स्वदेशी के बाबा रामदेव से भी बड़े ब्रांड बन गए होते। राजीव दीक्षित ने अपने राष्ट्रवाद की कल्पना स्वदेशी और अखंड भारत के आस पास ही रची थी। राजीव दीक्षित भारत के एजुकेशन सिस्टम से लेकर टैक्स और पूरी व्यवस्था को बदल डालने की सोच रखते थे। राजीव दीक्षित स्वयं दावा करते थे कि वे पिछले 20 सालों में कभी बीमार नहीं पड़े और जुकाम जैसी छोटी बीमारियों को वे अंगूठे में मेथी का दाना बांध कर ठीक कर लिया करते थे। राजीव कहते थे कि वे रेगुलर देश के कुछ बड़ी हस्तियों से बातचीत करते हैं। इन बड़ी हस्तियों में अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, अटल विहारी बाजपेयी और ममता बनर्जी के नाम लिया करते थे।

स्वदेशी और अखंड भारत की कल्पना करने वाले राजीव दीक्षित की मौत रहस्यमयी और विवादास्पद ढंग से हो गई। जबकि उनके कई दावों पर अब भी चर्चा होती रहती है। तो आइये जानते हैं कि वे कौन कौन से दावे थे। इससे पहले राजीव दीक्षित की शुरूआती जीवन और उनके कुछ विचारों के बारे में भी जान लेते हैं।

राजीव दीक्षित का शुरूआती जीवन-

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 30 नवंबर सन् 1967 को जन्मे राजीव दीक्षित जिनके पिता जी का नाम राधेश्याम दीक्षित जबकि माता जी का नाम मिथिलेश कुमारी है। उनकी शुरूआती शिक्षा दिक्षा सामान्य तौर पर ही हुई। लेकिन इलाहाबाद से बीटेक और आईआईटी(IIT) से एमटेक करने के बाद राजीव दीक्षित को उनका अपना लक्ष्य राष्ट्रसेवा के तौर पर मिला। और इस राष्ट्रसेवा के लक्ष्य और उद्देश्य उनके अपने सिद्धांतों पर आधारित था। और राजीव दीक्षित यही किया करते थे।

राजीव दीक्षित के विचार- 

  1. राष्ट्रवाद- राजीव भारत के मौजूदा सिस्टम को पश्चिमि सिस्टम का पिछलग्गू मानते थे। उनका मानना था कि अर्थव्यवस्था में टैक्स सिस्टम को विकेंद्रीकरण कर दिया जाना चाहिए क्योंकि ये देश में भ्रष्टाचार के सबसे बड़े कारण हैं, जिसमें टैक्स का 80 प्रतिशत रेवेन्यू देश के नेता और ब्यूरेक्रेट्स खा जाते हैं । इसके अलावा राजीव दीक्षित का मानना था कि देश का ऐजुकेशन सिस्टम मैकाले की देन है। उनके अनुसार शिक्षा दिक्षा के लिए गुरूकुल सिस्टम बेस्ट है। न्याय व्यवस्था के बारे में भी राजीव दीक्षित मानते हैं कि भारतीय न्याय व्यवस्था में ऐसे बहुत सारे कानून हैं जो भारत के लोगों का अपमान करते हैं। इसे बदला जाना आवश्यक है। उनके हिसाब से भारत के लिए एलपीजी यानी लिबरलाइजेशन, प्राइवेटाइजेशन, ग्लोबलाइजेशन भारत के सबसे बड़े दुश्मन हैं, जो भारत को चोट पहुंचा रहे हैं।

  1. विदेशी कंपनियों को देश से बाहर करना- स्वदेशी के सबसे बड़े हिमायती कहे जाने वाले राजीव दीक्षित का मानना था कि विदेशी कंपनियों को देश में व्यापार करने का अधिकार नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे देश का पैसा बाहर जाता है, और अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। वे कहते थे कि भारत में विदेशी कंपनियां घटिया माल बेचती हैं इससे देश का पश्चिमीकरण हो रहा है। उनका मानना था कि देश में आयुर्वेद आधारित मेडिकल सिस्टम बनाए जाने की जरूरत है। क्योंकि एलोपैथिक इलाज शरीर को नुकसान पहुँचाती हैं। और ऐलोपैथी इलाज महंगा होने के कारण इसका सारा पैसा विदेश चला जाता है।
  2. स्वदेशी- राजीव दीक्षित की राष्ट्रवाद की अवधारणा बहुत हद तक आरएसएस से मिलती जुलती है। पूरे देश भर में तेरह लाख से अधिक व्याख्यान दिए और बताया जाता है कि इनके छह लाख के करीब प्रशंसक हैं। राजीव अपने व्याख्यानों में भारत के शानदार इतिहास बताते हुए स्वेदशी अपनाने की बात पर जोर देते थे।

राजीव दीक्षित के कुछ दावे

  • भोपाल गैस त्रासदी के लिए यूनियन कार्बाइड को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने कई दिनों तक इस कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया । और कहते थे कि ये कोई हादसा नहीं बल्कि अमेरिका के द्वारा किया गया एक परिक्षण था जिसमें गरीब लोगों को निशाना बनाया गया।

  • राजीव कहते थे कि यूनिलीवर को हिंदुस्तान लीवर इसलिए किया गया ताकि भारतीय लोग भ्रम की स्थिति में रहें और इसे स्वदेशी समझकर कोई भी सामान बड़ी आसानी से खरीदेंगे।
  • स्वदेशी के हिमायती राजीव कहते थे कि ममता बनर्जी बीफ खाती हैं और इसलिए उन्होंने अटल विहारी बाजपेयी को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने बंगाल में बीफ बैन करवाया तो वे केंद्र में अटल की सरकार को गिरवा देंगी।
  • राजीव दीक्षित अपने एक बयान में कहते हैं कि जवाहरलाल नेहरू, मोहम्मद अली जिन्ना और एडविना एक ही साथ पढ़ते थे। और एडविना के साथ दोनों का लगाव था।

  • राजीव दीक्षित कहते हैं कि एडविना एक चालाक महिला थी जो नेहरू के कुछ आपत्तिजनक फोटो थीं जिसके आधार पर नेहरू को ब्लैकमेल करके भारत का बंटवारा करवाया गया।
  • अमेरिका पाकिस्तान को पैसा देता है, ताकि पाकिस्तान में आतंकवाद पल सके और कश्मीर मसले को आतंकवाद के दम पर ही उलझा कर रखे।
  • राजीव दीक्षित का मानना है कि नेस्ले कंपनी अपने मैगी में सुअर के मांस का रस मिलाती है। जबकि कोका कोला में एसिड होने की बात भी उन्होंने कही थी।

  • उन्होंने एक बार दावा किया था कि वे अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत कर रहे थे । इसी दौरान अमिताभ बच्चन ने यह स्वीकार किया था कि पेप्सी पीने की वजह से उनकी आंत खराब हो गई थी। राजीव दीक्षित के मुताबिक अमिताभ बच्चन ने कहा कि इसी वजह से उन्होंने अब पेप्सी पीना और उसका प्रचार करना दोनों ही बंद कर दिया है।
  • राजीव दीक्षित गौरक्षा के बहुत ही बड़े हिमायती थे। वे कहते थे कि गाय के गोबर से बने साबुन से नहाने के बाद 10 मिनट में शरीर से खुशबु आने लगती है। और उनका मानना था कि विदेशी कंपनियों के साबुन न खरीदने से देश का पैसा बाहर नहीं जाएगा।

ये राजीव दीक्षित द्वारा किए गए दावों में से कुछ दावे हैं, जिनमें से कई गलत भी साबित हो चुके हैं।

राजीव दीक्षित का विवादास्पद मौत-

नवंबर 2010 में छत्तीसगढ़ दौरे पर गए राजीव दीक्षित की मौत एक रहस्य बनकर रह गया। पूरे छत्तीसगढ़ में अलग अलग व्याख्यानों के बाद वे 30 नवंबर को भिलाई पहुँचे और दुर्ग के लिए रवाना होते वक्त कार में उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। दिल का दौरा पड़ने के कारण उन्हें भिलाई में अस्पताल में भर्ती कराया गया, अपोलो शिफ्ट किया गया। लेकिन वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद राजीव के समर्थकों ने बाबा रामदेव पर  आरोप लगाए, लेकिन रामदेव इससे साफ इनकार करते हैं। राजीव के डॉक्टर और उनके साथ मौजूद लोगों का भी मानना है कि राजीव दीक्षित लगातार ऐलोपैथी इलाज से मना कर रहे थे। वहीं रामदेव के दावे के मुताबिक भी 30 नवंबर 2010 को उनकी बात राजीव से हुई थी। और उन्होंने कहा था कि परेशानी ज्यादा है तो ऐलोपैथी इलाज ले लेना चाहिए, लेकिन राजीव दीक्षित बात नहीं माने। राजीव के समर्थक दावा करते हैं कि उनकी बॉडी नीली पड़ गई थी, जैसे जहर दिया गया हो। कई समर्थकों ने पोस्टमार्टम की मांग भी की लेकिन समर्थकों की बात नहीं मानी गई। राजीव दीक्षित का अंतिम संस्कार रामदेव के पतंजलि आश्रम में किया गया। इस मामले के बाद राजीव दीक्षित के परिवार वाले कभी इस मुद्दे पर बात नहीं करते।