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कुरआन में लिखा है दो ‘दरियाओं का पानी नहीं मिलता’, जानिए कितनी सच है ये बात!

नई दिल्ली – फेसबुक पर इन दिनों ‘दो दरियाओं के पानी के नहीं मिलने’ का वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि कुरआन की सूर-ए-रहमान में इस बात का जिक्र है कि दो समुंदरों का पानी साथ होने के बावजूद एक नहीं होता, यानी वह हमेशा अलग-अलग दिखता है। Glacial water melting in gulf of Alaska.

ये है वो वायरल वीडियो और पोस्ट :

Glacial water melting in gulf of Alaska

इस पोस्ट को शेयर करते हुए कैप्शन दिया गया है – ‘दो दरिया जिनका जिक्र “कुरआन की सूरा ए रहमान” में है, जो आपस में कभी नही मिलते…खुदा का करिश्मा है यह…आप सब लोग इस वीडियो को जरूर देखिये…और आप सब लोगों को पसंद आये तो शेयर जरूर करें…’

अब आपको इस वीडियो और पोस्ट की सच्चाई बताते हैं। दरअसल, जो वीडियो और पोस्ट आप देख रहे है वो अलास्का की खाड़ी का है, जहां पर कई नदियों का पानी आकर मिलता है। भले ही इस प्राकृतिक घटना को ‘खुदा का करिश्मा’ कहा जाए, लेकिन वैज्ञानिक पहलू से जो सच सामने आता है वो इस पोस्ट और ‘खुदा का करिश्मा’ से काफी अलग है।

अलकनंदा और भागीरथी के संगम पर भी होता है ऐसा ही नजारा –

आपने ऊपर जो वीडियो देखा वो भारत की अलकनंदा और भागीरथी नदियों के संगम का है। दरअसल, भारत की इन दोनों नदियों का पानी भी एक साथ आकर नहीं मिलता। इसलिए अगर कोई इसे ‘भगवान या अल्लाह का चमत्कार’ बताये तो ये भी गलत है। दरअसल, अलास्का की खाड़ी और देवप्रयाग ही केवल ऐसी जगहें नहीं हैं जहां दो स्रोतों से आया पानी एकसाथ आकर भी नहीं मिलता।

दुनिया में ऐसी कई और जगहें भी हैं देखें अगले पेज पर वीडियो –

 

दुनिया में ऐसी कई और जगहें भी हैं

आपने ऊपर जो वीडियो देखा वो वीडियो कुछ ऐसी जगहों के बारे में है जहां ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। यहा सवाल ‘करिश्मे’ का है जो दुनिया के और भी जलस्रोतों में देखने को मिलता है। इसका मतलब कि जिस चमत्कार का जिक्र कुरआन में किया गया है वैसा अन्य जगहों पर भी देखने को मिलता है। सूरा-ए-रहमान में दो सागरों के मिलने की बात तो है, लेकिन वे कौन से हैं इसका जिक्र नहीं है। इस तरह के दावों के पीछे कितनी सच्चाई है इसको हम विज्ञान के माध्यम से समझ सकते हैं।

वैज्ञानिक तथ्यों से सामने आती है सच्चाई –

जैसा कि हमने पहले ही बताया था कि अलास्का की खाड़ी में अलास्का की कॉपर नदी जैसी कई नदियों का पानी आकर मिलता है। दरअसल, ये नदियां अक्सर अपने साथ ढेर सारी मिट्टी और बेहद ठंडे तलछट (Sediment) ले आती हैं। साल 2007 में इस जगह पर प्रोफेसर केन ब्रुलैंड एक शोध कर कहा था कि दो प्रकार के ‘पानी के मिश्रित नहीं होने’ का दावा असत्य है। उन्होंने कहा था, ‘दोनों तरफ का पानी मिल जाते हैं, लेकिन इतनी मजबूत ढालों के कारण यहां ऐसा नहीं हो पाता।’

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