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गोलियां लगने के बाद भी लड़ते रहे आतंकवादियों से, प्रोटोकॉल तोड़कर जवान को गृहमंत्री ने लगाया गले

कई बार राजनेता लोग प्रोटोकॉल के साथ खिलवाड़ करते हुए दीखते हैं। प्रोटोकॉल इसीलिए बनाए जाते हैं कि उनके और आम जनता के बीच दूरी बनी रहे, जिससे उनकी सुरक्षा की जा सके। जनता का बहुत सारा पैसा उनको चुनने में लगता है। ऐसे में उनकी जान जनता के लिए बहुत कीमती होती है। लेकिन कई बार प्रोटोकॉल तोड़ने की सही वजह भी होती है, जिसके बारे में जानने के बाद जनता राजनेताओं की तारीफ़ ही करती है।

अभी हाल ही में बीजेपी के एक वरिष्ठ राजनेता ने जब प्रोटोकॉल को तोडा तो जनता को इसकी बहुत ख़ुशी हुई। जी हाँ, गुरुवार को सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समरोह के दौरान वीरता का मेडल दिया जा रहा था। उसी समय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उस सिपाही को प्रोटोकॉल तोड़कर गले लगा लिया, जिसने कश्मीर के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया था। उस दौरान वह आतंकियों से लोहा लेते हुए 85 प्रतिशत शारीरिक अक्षमता के शिकार हो गए थे।

गोलियां लगने के बाद भी लड़ते रहे आतंकवादियों से:

जम्मू कश्मीर के उधमपुर में 2014 में बड़ा आतंकी हमला हुआ था। उस दौरान उस समय बीएसएफ जवान गोधराज मीणा ने अदम्य साहस का परिचय दिया था। हमले के दौरान उन्हें कई गोलियां लगी थी, जिससे घायल होने के बाद भी वह दुश्मनों से लड़ते रहे। आपको बता दें वीरता देने से पहले मीणा की वीरता के बारे में लोगों को बताया गया। 5 अगस्त 2014 को उधमपुर के नरसू नाला के पास बीएसएफ जवानों को ले जाने वाली बस पर आतंकी हमला हुआ था।

मीणा ने कई गोलियां खाकर 30 जवानों की बचायी जान:

हमले के दौरान बस की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे 44 वर्षीय मीणा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने बस में घुसने की कोशिश कर रहे दो आतंकियों को अपनी गोली का निशाना बनाते हुए रोका। बस में कुल 30 जवान सवार थे, मीणा ने सबकी जान बचायी। आतंकियों से लोहा लेते वक़्त मीणा को कई गोलियां लगी। आपको जानकर काफी दुःख होगा कि अब मीणा बोल नहीं पाते हैं। उनकी वीरता की कहानी सुनकर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।

मीणा की कहानी से बहुत प्रभावित हुए राजनाथ सिंह:

मीणा की कहानी सुनकर राजनाथ सिंह ने भी उन्हें गले लगा लिया। प्रोटोकॉल के अंतर्गत किसी भी राजनेता से मेडल मिलने के बाद सैनिक को हाथ मिलाकर उन्हें सलामी देनी होती है, उसके बाद अपनी सीट पर वापस आ जाना होता है। लेकिन मीणा की कहानी से राजनाथ सिंह इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने मीणा को गले लगा लिया। मेडल लेने के लिए मीणा वर्दी पहनकर आये हुए थे। फ़िलहाल मीणा प्रशासनिक ड्यूटी पर हैं।

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