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हत्या से पहले इंदिरा ने अमिताभ बच्चन को लेकर राजीव को दी थी चेतावनी, कहा था-रहना उससे दूर वरना…

एक समय था जब अमिताभ बच्चन का परिवार गांधी परिवार के काफी करीब हुआ करता था। इन दोनों परिवारों के सदस्यों में गहरी दोस्ती हुआ करती थी। इंदिरा गांधी और अमिताभ बच्चन की मां तेजी बच्चन दोस्त हुआ करती थी। तेजी अक्सर अपने परिवार के साथ दिल्ली इंदिरा गांधी के घर आया करती थी। यहां से ही अमिताभ और राजीव गांधी के बीच दोस्ती की शुरूआत हुई थी।

इनकी ये दोस्ती इतनी मजबूत थी कि अमिताभ बच्चन राजीव गांधी की होने वाली दुल्हन सोनिया माइनो को एयरपोर्ट पर पिक करने भी गए थे और इनकी शादी में जमकर डांस भी किया था। राहुल और प्रियंका अमिताभ को अपना ‘मामू’ कहते थे। इनका परिवार अक्सर एक साथ घूमने भी जाया करता था। लेकिन जैसे वक्त गुजरता गया। इनकी दोस्ती में दरार आ गई। बच्चन और गांधी परिवार के सदस्यों ने एक दूसरे से मिलना तक बंद कर दिया।

इस वजह से आई दूरी

इंदिरा गांधी की छोटी बहू मेनका गांधी के संपादन में छपने वाली पत्रिका ‘सूर्या’ में इन दोनों परिवार के बीच आई दूरी के कारणों का जिक्र किया गया था। पत्रिका के अनुसार साल 1980 में इंदिरा ने तेजी बच्चन से अपनी दोस्ती के बावजूद राज्यसभा सीट के लिए नरगिस को चुना था। ये बात तेजी बच्चन को पसंद नहीं आई थी और यहां से ही इन दोनों परिवार के रास्ते अलग हो गए। लेकिन इंदिरा गांधी ने उस समय ये कहते हुए अपने रिश्ते सही कर लिए कि दिग्गज अभिनेत्री इस पद को किसी और की तुलना में अधिक डिजर्व करती हैं।

एमएल फोतेदार के 2015 के मेमोयर के अनुसार अपनी मौत से कुछ दिनों पहले ही इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी को अमिताभ को लेकर चेतावनी भी दी थी। इंदिरा ने अपने बेटे राजीव (तब AICC के महासचिव थे), अरुण नेहरू, राजीव के एक दूर के कजिन और फोटेदार की मीटिंग बुलाई थी। इस दौरान इंदिरा ने लोकसभा चुनावों पर चर्चा की थी।

फोटेदार के अनुसार उन्होंने अपने बेटे से कहा था कि तेजी के बेटे अमिताभ बच्चन को कभी भी राजनीति में नहीं लाना। इंदिरा गांधी की ये बात सुनकर राजीव काफी हैरान रह गए थे और कुछ बोल भी नहीं पाए थे। इसके अलावा जो दूसरी बात इंदिरा गांधी ने अपने बेटे से कही थी वो सिंधिया परिवार से जुड़ी हुई थी। इंदिरा ने राजीव गांधी से कहा था कि ग्वालियर के पूर्व महाराजा माधवराव सिंधिया से एक हाथ की दूरी बनाकर रखनी चाहिए।

फोटेदार ने बताया कि साल 1984 के लोकसभा चुनाव में अमिताभ बच्चन को पार्टी का टिकट दिया गया। इंदिरा अमिताभ को राजनीति में लाने के खिलाफ थी। लेकिन राजीव अमिताभ को टिकट देने पर अड़े रहे। इलाहाबाद से अमिताभ बच्चन को चुनाव में खड़ा किया गया और अमिताभ ने ये चुनाव जीत भी लिया। लेकिन बोफोर्स विवाद के बाद अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद से सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और राजनीति को अलविदा कह दिया। अमिताभ के पार्टी से अलग होने का राजीव को नुकसान हुआ। साल 1987 में कांग्रेस इलाहाबाद सीट पर उपचुनाव हार गई। इस तरह से इन दोनों परिवारों ने एक दूसरे बात करना बंद कर दिया।

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