सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है मैदा, आंतों की सूजन के साथ बढ़ सकता है आपका मोटापा

भोजन हम सभी मनुष्यों के जीने के लिए एक अहम जरूरत है. सुबह उठ कर जब हम फ्रेश होते हैं तो पेट में भूख के चूहे दौड़ने लगते हैं. ऐसे में यदि किसी को मन-पसंदीदा नाश्ता खाने को मिल जाए तो बात ही कुछ और है. दुनिया के 70% लोग सुबह उठ कर कुलचा, भटूरा, पूरी, मोमोज, ब्रेड, बर्गर, पिज़्ज़ा आदि पदार्थों का सेवन करते हैं. हालाँकि इन चीज़ों से पेट तो भर जाता है, लेकिन यह सभी पदार्थ मैदे से तैयार किए जाते हैं. ऐसे में नियमित रूप से मैदे से बनी चीएजों को खाने से सेहत को अनेकों नुकसान भुगतने पड़ स्टे हैं. गौरतलब है कि आटा और मैदा दोनों ही गेहू से तैयार किए जाते हैं. परंतु आटे की रोटियां जितनी हेल्थी हैं, उतना ही मैदा सेहत के लिए हानिकारक है.

क्यों है आटे और मैदे में इतना अंतर?

जो लोग आटे और मैदे के बारे में अच्छे से नहीं जानते, उनकी जानकारी के लिए हम उन्हें बता दें कि गेहूं एक मात्र ऐसी फसल है, जो आटे और मैदे दोनों को तैयार करती है. लेकिन इन दोनों चीज़ों को ब्ब्नाने का तरीका बिलकुल अलग होता है. जब आता बनाया जाता है, तो गेहू की ऊपरी सुनहरी परत को नहीं निकाला जाता. यही सुनहरी पर्त फाइबर की प्रमुख स्रोत है. इसके इलावा आटे को दरदरा पीसा जाती है, जिसके कारण उसमे मौजूद पौषक तत्व नष्ट नहीं होते. लेकिन मैदा बनाने के समय सुनहरी पर्त को हटा दिया जाता है और उसे दरदरे की जगह महीन पीसा जाता है. ऐसा करने से मैदे में मौजूद सभी पौषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और फाइबर भी खत्म हो जाता है.

मैदे में ब्लीच से लाई जाती है सफेदी

यदि आप आटे और मैदे को एक साथ देखें तो आपको दोनों के रंगों में अंतर दिखाई देगा. मैदा जितना सफेद होता है, उतना ही साफ़ भी होता है. लेकिन पीसी हुए गेंहू का कोई रंग नहीं होता. मैदे को सफेद और चमकदार बनाने के लिए गेहूं को पीसने के बाद उसमे हानिकारक केमिकल्स मिला कर ब्लीच प्रोसेस किया जाता है. इस ब्लीचिंग के बाद ही मैदा पूरी तरह से तैयार होता है. ब्लेसिंग के वक़्त मैदे में क्लोरीन, क्लोरीन डाई ऑक्साइड जैसे ब्लीचिंग एजेंट का इस्तेमाल किया जाता है जोकि हमारी सेहत पर बुरा प्रभाव डालते हैं.

आंतो से चिपकता है मैदा

मैदे में फाइबर बिलकुल नहीं होता इसलिए यह बेहद महीन और चिकना होता है. ऐसे में पेट इस मैदे को आसानी से नहीं पचा पाता. जबकि आटा दरदरा होता है और उसमे हाई मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जोकि जल्दी पच जाता है. मैदा सही से ना पचने के कारण पेट व आंतो में जमा हो जाता है और कईं रोगों का कारण बन जाता है. बहुत से लोगों को कब्ज़ और बवासीर जैसी समस्या मैदे के अधिक सेवन के कारण ही होती है.

मैदा बढाता है मोटापा

मैदे में जीरो फाइबर होता है जबकि इसमें स्टार्च की मात्रा सबसे अधिक पाई जाति८ है. यह स्टार्च जब पेट में जाती है तो मोटापे को बढ़ाने का काम करती है. जो लोग नियमित रूप से या अधिक मैदे युक्त आहार का सेवन करते हैं, उनका वज़न बढ़ जाता है. इसके साथ ही उनका कोलेस्ट्रोल लेवल और ब्लड में ट्राइग्लीसराइड का स्तर भी बढ़ने लगता है. इसलिए जितना हो सके मैदे के सेवन से बचें. इसके मुकाबले आप आटे से बने आहारों का सेवन करें.