परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के परमाणु बमों की खुली पोल..!

नई दिल्ली – पाकिस्तान अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है। हमले के लिए पड़ोसी मुल्क ने करीब 130 से 140 परमाणु हथियार तैयार किए हैं और वह लगातार अपनी क्षमता बढ़ाने में लगा हुआ है। इसके अलावा वह एफ-16 सहित अपने लड़ाकू जेट विमानों को परमाणु हमला करने के लिए भी तैयार कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, सेना की चौकियों और एयर बेस के उपग्रह चित्रों से पाकिस्तान की तैयारियों का पता चलता है। वह लगातार अपनी नाभिकीय क्षमता बढ़ाने में लगा हुआ है।  Pakistan building nuclear weapons.

बलूचिस्‍तान से लेकर पंजाब तक –

Pakistan building nuclear weapons

हैन्स एम. क्रिस्टेनसन ने कहा, “कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि पाकिस्तान के उभरते परमाणु दर्जे में कम से कम पांच बेस अहम भूमिका निभा सकते हैं।” इनमें अकरो (सिंध), गुजरांवाला (पंजाब), खुज़दार (बलूचिस्तान), पानो अकील (सिंध) तथा सरगोधा स्थित सेना के गैरिसन शामिल हैं। बहावलपुर का छठा बेस निर्माणाधीन हो सकता है। इनके अलावा डेरा गाज़ी खान में सातवां बेस भी है, लेकिन उसका ढांचा काफी अलग है।

भारत से 100 किमी दूर परमाणु हथियार –

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सैटेलाइट तस्वीरें ऐसी परमाणु-सक्षम मिसाइलों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों की मौजूदगी के संकेत देती हैं, जिनके ज़रिये न सिर्फ 100 किलोमीटर से भी कम दूरी वाले लक्ष्यों को निशाना बनाया जा सकता है, बल्कि मध्यम दूरी तक भी, जिनके तहत भारत के अधिकांश इलाके आ सकते हैं।

इसका मतलब हुआ कि भारत के कई इलाके इन मिसाइलों की रेंज में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्‍तान को चीन से इन परमाणु हथियारों के लिए टेक्‍नोलॉजी मिलती है।

पाकिस्तान होगा तीसरा बड़ा परमाणु हथियार संपन्न देश –

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1999 में अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी ने कहा था कि पाकिस्तान के पास 2020 तक 60-80 परमाणु बम हो सकते हैं। अमेरिकी विज्ञानियों ने रिपोर्ट में यह भी बताया है कि अमेरिकी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तान ने अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों को बदलकर परमाणु हथियार इस्तेमाल करने लायक बना लिया है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि यदि पाकिस्तान इसी तरह से अपनी क्षमता बढ़ाता रहा, तो 10 साल बाद वह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु हथियार संपन्न देश बन जाएगा। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी निकाला गया है कि पाकिस्तान का इरादा संभवतः परमाणु हथियारों को लंबे समय तक लगातार बढ़ाते रहने का नहीं है, लेकिन वह जल्द ही उस स्तर तक पहुंच जाएगा, जिससे दूसरे देशों में डर पैदा हो जाएगा।