नोटबंदीः गवर्नर उर्जित पटेल को लेकर उड़ रही सभी अफवाहों का जवाब देखिए यहां – जरुर पढ़े और शेयर करें


नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की मध्यरात्रि से 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा की थी। इसे उन्होंने कालेधन, आतंकवाद को वित्तपोषण और नकली नोटों के खिलाफ जंग बताया था। तब से अब तक प्रधानमंत्री और उनके इस फैसले को लेकर विरोधी पार्टीयां उनपर लगातार निशाना साधे हुए है। इसे लेकर तरह – तरह कि अफवाहें भी फैलाई जा रही है। जिसे लेकर स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो रही है।

 

हम आपको इसी तरह कि कुछ अफवाहों पर अपने जवाब से स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं –

हम देख रहे हैं कि लोगों के मन में संदेह पैदा करने के लिए तरह – तरह के संदेशों के ज़रिए अफवाहें फैलाई जा रही है।

– उर्जित पटेल दो महीने पहले ही गवर्नर (रिजर्व बैंक) बने तो कैसे उन्होंने नोट पर हस्ताक्षर कर दिया जबकि 2000 के नोट छापने का काम 6 महीने पहले ही शुरु कर दिया गया था? *

पहले तो नोट छापने की तैयारी 6 महीने शुरू हुई थी। तैयारी का मतलब कॉसेप्ट (अवधारणा), डिजाइन और प्रोटोटाइप और अनुमोदन और सुधार के कई चरण से है। इसका प्रोसेस गारमेन्ट की छपाई से ज्यादा अलग नहीं है। इसकी तैयारी तो कई महीने से चलती है पर छपाई के लिए इसे एक महीने पहले ही भेजा जाता है। यह आपके और हमारे लिए समझने में बहुत ही आसान है। जो लोग इस तरह कि अफवाहें फैला रहे हैं उन्हें निश्चित ही इस विषय में कुछ पता नहीं है। अगर सरल शब्दों में कहे तो उर्जित पटेल का नोट छपाई कि तैयारी के दौरान कोई रोल नहीं था। उन्होंने आखिरी चरण में बस इसपर अपने हस्ताक्षर किए।

– *भाजपा ने अंबानी और अडानी कि मदद की है?*

अंबानी के संबंध में मोदी सरकार पर लगाए जा रहे आरोप केवल अफवाह हैं । कल को हम भी कह सकते हैं कि अरविंद केजरीवाल या राहुल को भी अंबानी और अडानी द्वारा पैसे दिए गए हैं। आपको पता होना चाहिए कि कॉर्पोरेट घराने दोनों पार्टियों के फंड देते हैं क्योंकि वे मूर्ख नहीं है कि किसी एक का फेवर करें और सरकार बदलने के बाद इसका खामियाजा भुगतें।

आपको पता होगा कि मोदी सरकार ने मुकेश अंबानी की रिलायंस ऑयल पर 10000 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है जिसे कोर्ट द्वारा उन्हें दोषी करार दिए जाने के बावजूद कांग्रेस सरकार द्वारा नहीं लगाया गया था, अगर मोदी उनके  पक्ष में होते तो क्या वे ऐसा करते? सोचिए…….

* रिलायंस ने जियो लांच के माध्यम से कालाधन को परिवर्तित किया? *

अगर आपको गलता है कि जियो को मुफ्त शुरू किया गया तो यह भी जान लीजिए कि इसकी लागत को हॉट –स्पाट और जियो फोन को सेल कर वसूला जा रहा है।  वे कनेक्शन के साथ फोन भी बेच रहे हैं और अगर आप चीन में बने हैंडसेट की कीमत से इसकी तुलना करेंगे तो आप समझ जाएंगे कि वे इससे कितना मुनाफा कमा रहे हैं। वे इतने मूर्ख नहीं है जितना हम उनके बारे में सोच रहे हैं।

दरअसल, पीएम मोदी ने उनके ऊपर लग रहे पक्षपात और साजिश के आरोपों को खारिज कर दिया है। हमें प्रधानमंत्री का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उन्होंने संप्रग द्वारा नियुक्त कई उच्च रैंक के अधिकारियों को अपनी सरकार में बरकरार रखा है।

जैसा कि आप देख सकते हैं कि इस तरह के अफवाह और आरोप लोगों के मन में केवल मोदी सरकार के प्रति गलत धारणा को बढ़ाने, सरकार पर दबाव डालने, ऐतिहासिक औऱ साहसी कदम को रोलबैक करने के लिए कुछ राजनीतिक दलों की गंदी चाल है।

हकीकत यह है कि नरेंद्र मोदी ने पिछले दो वर्षों में कई काम किए हैं जिससे उन्हें डर है कि वह फिर सत्ता में वापस नहीं  आ पाएंगे। वास्तविक रुप से यह सब देश की सेवा बजाय राजनीति का गंदा खेल है। इसलिए इन अफवाहों को सच मानने से पहले आप इनको वास्तविकता के तराजू पर तौल कर इनकी सच्चाई जरुर जान लें।

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