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4 साल का यह मासूम देता है 76 साल के गुरु को करारी टक्कर, करता है यह काम

वाराणसी: सही कहा गया है कि ईश्वर की लीलाओं के बारे में समझना किसी इंसान के वश की बात नहीं है। ईश्वर क्या चाहते हैं, इसके बारे में केवल उन्हें ही पता है। यह तो आप जानते ही हैं कि इस दुनिया की रचना ईश्वर की मर्जी से हुई है और उसका पालन भी ईश्वर ही कर रहे हैं। मनुष्यों को भगवान ने ही बनाया है और उनके जीवन का संचालन भी वही करते हैं। कौन व्यक्ति कौन सा काम करेगा उसका निर्धारण भी वही करते हैं। आज के समय में भले ही लोग भगवान को कम मानने लगें हों लेकिन आज भी समय-समय पर भगवान अपने चमत्कार इंसानों के माध्यम से ही दिखाते हैं। उन चमत्कारों को देखने के बाद यह यकीन हो जाता है कि ऐसी लीला केवल ईश्वर ही दिखा सकते हैं। जी हाँ आज हम आपको एक ऐसे चमत्कार और घटना के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानने के बाद आपकी हैरानी का ठिकाना ही नहीं रहेगा। आप सोच में पड़ जायेंगे कि ऐसा सच में हो सकता है।

आपने कई लोगों को यह पहले भी कहते हुए सुना होगा कि बच्चों में भगवान का वास होता है। ऐसा इसलिए कहा जाता है कि बच्चों के मन में किसी के लिए कोई दुर्भावना और बुराई नहीं होती है। ईश्वर का निवास ऐसी ही जगहों पर होता है, जहाँ कोई बुराई और दुर्भावना नहीं होती है। यही वजह है कि बच्चों के अन्दर भगवान के वास होने की बात की जाती है। लेकिन इस लड़के ने बच्चों के अन्दर भगवान के वास को बिलकुल सच कर दिखाया है।

आज से कुछ साल पहले गूगल बॉय के रूप में मशहूर हो चुके कौटिल्य के बारे में तो आप जानते ही होंगे। लेकिन आज हम कौटिल्य की नहीं बल्कि 4 साल के रुद्रांश की बात कर रहे हैं। आपको जानकर बहुत हैरानी होने वाली है कि 4 साल का यह मासूम ऐसे तबला बजाता है, जैसे कोई मास्टर भी नहीं बजा सकता है। इन दिनों रुद्रांश तबले और ढोलक की ताल की वजह से सुर्ख़ियों में छाया हुआ है। मंगलावर के दिन रुद्रांश को अपने धर्म चाचा चन्दन शर्मा के हारमोनियम पर तबले के साथ संगत करते हुए देखा गया।

आपको बता दें यह ईश्वर के किसी चमत्कार से कम नहीं है। जहाँ 4 साल की उम्र में सामान्य बच्चे अपने काम ठीक से नहीं कर पाते हैं, वहीँ यह अद्भुत बच्चा इस उम्र में तबले बजाता है। यह बच्चा केवल तबले बजाता ही नहीं है बल्कि बड़े-बड़ों की छुट्टी भी कर देता है। हर कोई रुद्रांश की इस कला को देखकर हैरान हो गया है। आपको बता दें रुद्रांश के पिता बलवंत सिंह मुख्या रूप से गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं। इस समय वह अपने परिवार के साथ चितईपुर के अवलेशपुर में रहते हैं।

पिता ने बताया कि जब रुद्रांश एक साल का तभी से अपने दादा के साथ भजन-कीर्तन में जाया करता था। अपने दादा की गोद से निकलकर तबले और ढोलक की तरफ भागता था। जब वह पौने दो साल का हुआ तो जिद करके उसने पहली बार तबला बजाय था। जुसे देखकर सभी हैरान हो गए थे। उसके बाद से ही रुद्रांश पूरी ताल के साथ तबला बजा रहा है। रुद्रांश के बारे में कहा जा रहा है कि उसके ऊपर भगवान की विशेष कृपा है और उनके आशीर्वाद से ही उसकी उँगलियाँ चलने लगती हैं।

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