देश सेवा के जज्बे ने इस आइपीएस को मजबूर किया अमेरिका की 50 लाख की नौकरी छोड़ने पर

देश सेवा एक ऐसा नशा है जो हर नशे पर भारी पड़ जाता है। इसी नशे की वजह से हजारो युवक लाखों की नौकरी छोड़कर देश की रक्षा में जुटे हुए हैं। अपने जान की परवाह किये बगैर दुश्मनों की गोलियों का सामना कर रहे हैं। देश सेवा जा ज़ज्बा केवल सीमा पर तैनात जवानों के अन्दर ही नहीं बल्कि और लोगों में भी है। देश सेवा का ज़ज्बा किसी से क्या करवा सकता है, इसका ताजा उदाहरण सामने आया है।

हाल ही में बिहार के रहने वाले 2012 बैच के आइपीएस संतोष मिश्रा की दूसरी पोस्टिंग अम्बेडकर नगर में एसपी के रूप में हुई है। आइपीएस बनाने से पहले संतोष यूएस में सॉफ्टवेर इंजिनियर के तौर पर काम कर रहे थे। लेकिन उन्होंने 2011 में नौकरी छोड़कर अपने देश और समाज के लिए कुछ करने की ठानी। उन्होंने 50 लाख पैकेज की नौकरी को लात मारकर सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। पहले ही प्रयास में उन्होंने देश के सबसे बड़े एग्जाम को पास कर लिया।

उनकी पहली पोस्टिंग अमरोहा में हुई थी। संतोष अपने बारे में बताते हुए कहते हैं कि वो बिहार के पटना जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर हैं और माँ एक हाउस वाइफ है। उनकी तीन बहने भी हैं। 10 वीं और 12वीं उन्होंने बिहार के एक स्कूल से पढ़ा और 2004 में पुणे कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उनका सिलेक्शन यूरोप की एक कंपनी में हो गया। 4 साल यूरोप में काम करने के बाद संतोष काम करने अमेरिका चले गए।

लगभग 7 सालों तक ऐसे ही वह 50 लाख के पैकेज पर भारत, यूरोप और अमेरिका में काम करते रहे। संतोष बताते हैं कि मेरा मान काम में नहीं लगा। बचपन से ही अपने पिता को आर्मी में देश सेवा करते हुए देखता था। मेरा भी मन देश सेवा को होता था। इसके बाद मैंने देश सेवा का निर्णय लिया और 2011 में नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की खुद से तैयारी करने लगा। मैंने 1 साल की तैयारी के बाद एग्जाम दिया और मैं पास हो गया।

अमरोहा में एसपी रहने के दौरान एक 5वीं कक्षा के बच्चे ने मुझसे शिकायत की कि उसका दोस्त 15 दिनों से स्कूल नहीं आ रहा है। मुझे उसकी बात अच्छी भी लगी और चिंता भी हुई। मैंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्यवाई की तो पता चला बच्चा अपने घर की मिठाई की दुकान पर काम करता है। इसके बाद मैं उसके दुकान पर गया और बच्चे को दुबारा पढ़ाने के लिए कहा। बाद में उसके पिता ने बच्चे को दुबारा स्कूल पढ़ने के लिए भेजा।


अक्टूबर 2017 में जब से मेरी पोस्टिंग अम्बेडकर नगर जिले में हुई है तब से जब भी समय मिलता है मैं प्राइमरी स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाता हूँ। कुछ ही दिन पहले जब मैं प्राइमरी स्कूल में गया तो वहाँ के एक बच्चे ने जलेबी खाने की इच्छा जाहिर की। उसके बाद हमने स्कूल में जलेबी मंगवाई। तब तक मैंने कक्षा में गणित के प्रश्न हल करवाए। सामान्य ज्ञान के प्रश्न भी पूछे फिर साथ में जलेबी खाई। कुछ बच्चों को बैग भी दिया। अब मैं अक्सर ही बच्चों को पढ़ाने जाता हूँ।

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