आज से कई हजार साल पहले लोग अपना इलाज प्राकृतिक तरीकों से करते थे। इलाज के लिए वैद्य होते थे, जो प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से इंसान का इलाज किया करते थे। कुदरत के पास इंसान के हर रोग का इलाज मौजूद है। अगर इंसान कुदरती तरीके से इलाज करे तो वह हमेशा के लिए ठीक हो सकता है। आज के समय में इंसान इनता व्यस्त हो गया है कि बड़ी मुश्किल से खुद के लिए भी समय नहीं निकाल पाता है। ऐसे में वह प्राकृतिक तरीकों के लिए कहाँ से समय निकाल पायेगा, क्योंकि इन तरीकों में थोड़ा वक़्त लगता है।

 

प्रकृति के नजदीक रहने से होता है स्वास्थ्य में सुधार:

लोयोन यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो के अनुसार जब इंसान प्रकृति के नजदीक जाता है तो उसके स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसलिए यह कहा जाता है कि इंसान को जितना ज्यादा हो सके प्रकृति के करीब रहना चाहिए। हरियाली के माध्यम से शरीर के रोगों का इलाज करने की पद्धति को ग्रीन थेरेपी कहते हैं। जितना ज्यादा इंसान हरियाली के करीब रहेगा, उतना ही कम बिमारियों से ग्रस्त होगा। ग्रीन थेरेपी के माध्यम से आपके जीवन में सकारात्मक उर्जा का संचार भी होता है। आज हम आपको ग्रीन थेरेपी के फायदों में बारे में बताने जा रहे हैं।

ग्रीन थेरेपी से होते हैं ये फायदे:

*- मानसिक सकारात्मकता का विकास:

ग्रीन थेरेपी से इंसान के मन को शांति मिलती है, क्योंकि ग्रीन थेरेपी में एक सकारत्मक वातावरण मिलता है। इस थेरेपी से इंसान मानसिक रूप से मजबूत होता है। जिस वजह से इंसान चिंता, परेशानियों और तनाव से मुक्त रहता है।

*- भरपूर शक्ति:

ग्रीन थेरेपी से आपके शरीर में भरपूर उर्जा का संचार होता है। सुबह जागकर नंगे पाँव हरी-हरी घास पर चलने से शरीर को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है। इससे दिल तेजी से धडकने लगता है और तेजी से फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुँचाने का काम करता है। इससे शरीर का हर अंग सही तरह से काम करने लगता है।

*- तनाव से मुक्ति:

हरियाली के जितना ज्यादा नजदीक रहेंगे उतना ही कम तनाव आपको महसूस होगा। इससे आपका शरीर भी स्वस्थ रहता है। ग्रीन थेरेपी से मस्तिष्क की शक्ति बढ़ती है और आपकी याददाश्त तेज होने लगती है।

*- फेफड़े के रोग से मुक्ति:

आज के बढ़ते प्रदूषण वाले माहौल में हर व्यक्ति फेफड़े की बीमारी की समस्या से ग्रस्त है। जो लोग फेफड़े की बीमारी से परेशान हैं, उनके लिए ग्रीन थेरेपी एक बहुत अच्छा उपाय है। इसके लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि हर दिन सुबह उठकर नंगे पाँव घास पर टहलें।

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