अध्यात्म

महाशिवरात्रि: इस शिव मंदिर की खीर खाने से भर जाती है सूनी गोद, जानें किस शहर में है स्थित?

1 मार्च, मंगलवार 2022 को महाशिवरात्रि का पावन पर्व आ रहा है। ऐसे में शिव मंदिरों में भारी संख्या में शिव भक्त दर्शन करने जाएंगे। पूरे देश में कई शिव मंदिर मौजूद हैं। हर किसी की अपनी एक अलग कहानी और परंपरा है। ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां की खीर का प्रसाद खाकर संतान की प्राप्ति होती है।

चमत्कारी है रतलाम का विरुपाक्ष महादेव मंदिर

संतान प्राप्ति वाला यह चमत्कारी मंदिर मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित है। यहां हर साल महाशिवरात्रि के मौके पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसमें हजारों लोग तो सिर्फ संतान सुख पाने की चाह लेकर ही आते हैं। इस मंदिर को विरुपाक्ष महादेव और भूल भुलैय्या वाला शिव मंदिर कहा जाता है। ये रतलाम शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है।

खीर खाकर भर जाती है सूनी गोद

भक्त इस मंदिर में आकर माथा टेकते हैं। शिवजी से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं और फिर प्रसाद के रूप में खीर ग्रहण कर लेते हैं। जब उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है तो वह दोबारा इस मंदिर में बच्चे के साथ धन्यवाद कहने और शिवजी के सामने माथा टेकने आते हैं। यह मंदिर भक्तों के बीच आस्था का बड़ा केंद्र है।

महाशिवरात्रि पर लगता है मेला

यदि आप इस मंदिर में जान चाहते हैं तो पहले आपको मध्य प्रदेश के रतलाम शहर जाना होगा। फिर  महू-नीमच फोरलेन पर रतलाम से 30 किमी दूर बिलपांक ग्राम आना है। यहां मुख्य सड़क से पूर्व की ओर करीब 2 किमी अंदर विरुपाक्ष महादेव का यह प्राचीन मंदिर स्थित है। महाशिवरात्रि पर यहां हर साल मेला भी लगता है।

कोई खाली हाथ नहीं जाता

कहते हैं कि इस मंदिर से कभी कोई खाली हाथ नहीं जाता है। इस मंदिर में महाशिवरात्रि पर हवन होता है। इसके बाद खीर का प्रसान बांटा जाता है। मान्यता है कि इस खीर के प्रसाद को ग्रहण करने से महिलाओं की सूनी गोद भी भर जाती है।

इस राजा ने बनवाया था मंदिर

गुजरात के चालुक्य नरेश सिद्धराज जयसिंह ने संवत् 1196 में इस मंदिर का शिलालेख रखा था। उन्होंने ही इस मंदिर का इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। यह मंदिर गुर्जर चालुक्य शैली (परमार कला के समकालीन) का मनमोहक उदाहरण है। इस मंदिर में वहाँ के स्तम्भ व शिल्प सौंदर्य की झलक देखने को मिलती है।

मंदिर में आपको शिल्पकला के रूप में चामुण्डा, हरिहर, विष्णु, शिव, गणपति पार्वती जैसे भगवानों की प्रतिमाएं देखने को मिल जाती है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर गंगा-यमुना द्वारपाल और अन्य अलंकरण भी है। वहीं गर्भगृह के बीच शिवलिंग और एक तोरणद्वार भी है। ये भी गुर्जर चालुक्य शैली से बना है।

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