यूएस एक्सपर्ट ने किया भारत के प्लान का खुलासा: अगर सच हुई ये बात तो चीन का मीट सकता नामोनिशान

वाशिंगटन: भारत को एक नहीं बल्कि दो पड़ोसी देशों से खतरा है। भारत के ऊपर यह खतरा दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। एक तरफ पाकिस्तान अपने आतंकवादियों से भारत की शांति को छिन्न-भिन्न करने पर तुला हुआ है, वहीँ दूसरी तरफ जब देखों तब चीन भारत को आँखें दिखाता रहता है। ऐसे में भारत को अपनी तरफ से काफी सतर्कता बरतने की जरुरत पड़ती है। अभी के ताजा हालात को देखते हुए कहा जा सकता है कि चीन और भारत के रिश्ते काफी बिगड़ गए हैं।

बनाया जा सकता है पुरे चीन को निशाना:

दोनों देशों के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में दो अमेरिकी परमाणु विशेषज्ञों ने अभी तजा बयान दिया है। उनके अनुसार भारत पाकिस्तान से नहीं बल्कि चीन से टक्कर लेने के लिए अपने परमाणु हथियारों और परमाणु रणनीति का लगातार आधुनिकीकरण कर रहा है। पहले भारत को केवल पाकिस्तान से ज्यादा खतरा था, इसलिए उसका सारा ध्यान पाकिस्तान की तरफ था। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

अब नई दिल्ली का पूरा जोर कम्युनिस्ट देश चीन पर है। ऑनलाइन मैगजीन आफ्टर मिडनाइट ने अपने जुलाई-अगस्त एडिशन में एक लेख छापा है। इसके अनुसार भारत एक ऐसी मिसाइल बनाने में लगा हुआ है, जिससे दक्षिण भारत के बेस से पुरे चीन को निशाना बनाया जा सकता है। यह लेख ‘इंडियन न्यूक्लियर फ़ोर्स 2017’ के शीर्षक के साथ छापा गया है। इसके लेखक हेंस एम क्रिस्टिनसन और रॉबर्ट एस नॉरिस हैं।

अब भारत का पूजा जोर है चीन की तरफ:

उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि अनुमान के मुताबिक भारत के पास 150-200 न्यूक्लियर वॉरहेड बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में प्लूटोनियम है। लेकिन संभवतः भारत ने अभी तक केवल 120-130 नुक्लियर वॉरहेड ही बनाये हैं। दोनों विशेषज्ञों का कहना है कि पहले भारत का सारा ध्यान पाकिस्तान की तरफ था, उसी को लेकर वह अपनी परमाणु रणनीति बनाते थे, लेकिन अब सब बदल गया है। अब भारत का पूरा जोर चीन पर है।

अगले दशक तक हो जायेंगी तैनात:

भारत का परमाणु आधुनिकीकरण इस बात पर जोर देता है कि भारत, चीन के साथ भविष्य के सामरिक संबंधों को लेकर ज्यादा ध्यान दे रहा है। विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि भारत के पास 7 परमाणु सक्षम प्रणाली है। जिसमें जमीन से संचालित होने वाली 4, विमान से संचालित होने वाली 2 और एक समुद्र से मार करने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल है। भारत अभी कम से कम 4 और प्रणालियों पर तेजी से काम कर रहा है। यह अगले दशक तक तैनात हो जायेंगी।