विशेष

‘देश की जनता हफ्ते में 1 दिन व्रत रखे’ लाल बहादुर शास्त्री ने ऐसा क्यों कहा था? वजह है दिलचस्प

2 अक्टूबर का दिन भारत के लिए हमेशा से खास रहा है। इस दिन पूरा देश गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती मनाता है। शास्त्रीजी देश के दूसरे प्रधानमंत्री थे। इस वर्ष उनकी 118वीं जयंती है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। उनका पूरा नाम  मुंशी लाल बहादुर शास्त्री है।

उनमें कुशल नेतृत्व की काबिलियत थी। वे एक गांधीवादी नेता भी थे। उन्हें सादगी से रहना पसंद था। वह अपनी लाइफस्टाइल बहुत ही सिंपल रखते थे। उनका व्यक्तित्व शांत चित्त का था। आज लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर हम आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं।

1. लाल बहादुर शास्त्री को पढ़ने लिखने का बड़ा शौक था। हालांकि उनके लिए शिक्षा हासिल करना इतना आसान भी नहीं था। उन दिनों बहुत कम गांवों में ही स्कूल होते थे। ऐसे में शास्त्रीजी को पढ़ने के लिए नदी तैरकर स्कूल जाना पढ़ता था। वह ऐसा रोज किया करते थे। उन्होंने बड़ी विषम परिस्थितियों में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी।

2. शास्त्रीजी गांधीजी से काफी प्रभावित थे। वे उन्हें फॉलो करते थे। ऐसे में गांधी जी के असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए शास्त्रीजी ने 16 साल की उम्र में ही अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी।

3. शास्त्री जी की पत्नी का नाम ललिता शास्त्री है। उन्होंने साल 1928 में ललित से शादी रचाई थी। इस शादी से उन्हें 6 बच्चे हुए, जिनमें दो बेटियां और चार बेटे शामिल हैं।

4. लाल बहादुर शास्त्री ने अपने जीवनकाल में कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। वे 1921 के असहयोग आंदोलन से लेकर 1942 तक अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन तक हर जगह एक्टिव रहे।

5. जब शास्त्री जी प्रधानमंत्री बने तो बाद में 1965 में भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ था। इसमें शास्त्री जी ने अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने ने विषम परिस्थितियों में भी देश को अच्छे से संभाला था।

6. शास्त्री जी का ‘जय जवान जय किसान’ का नारा आज भी बड़ा लोकप्रिय है। यह नारा उन्होंने सेना के जवानों और किसानों महत्व बताने के लिए दिया था।

7. लाल बहादुर शास्त्री के बारे में एक और दिलचस्प बात ये है कि प्रधानमंत्री बनने से पहले वे और भी कई पद संभाल चुके हैं। जैसे वे रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के समय बिना विभाग के मंत्री रह चुके हैं।

8. लाल बहादुर शास्त्री 1964 में प्रधानमंत्री बने थे। फिर 1965 में भारत और पाकिस्तान के मध्य युद्ध छिड़ गया। इस दौरान देश में अन्न का अकाल पड़ गया था। देश भुखमरी की समस्या से गुजर रहा था। इस संकट की घड़ी में शास्त्री जी ने अपनी तनख्वाह लेना बंद कर दिया था। साथ ही देश के लोगों से विनती की थी कि वे सभी सप्ताह में एक दिन उपवास रखें।

9. लाल बहादुर शास्त्री का निधन 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में हुआ था। उन्होंने मौत के एक दिन पहले यानि 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर करार दिया था। लेकिन इसके सिर्फ 12 घंटे बाद (11 जनवरी) को उनकी अचानक मृत्यु हो गई थी।

10. लाल बहादुर शास्त्री के पिता का नाम मुंशीजी जबकि मां का नाम रामदुलारी था। शास्त्रीजी परिवार में सबसे छोटे थे ऐसे में हर कोई परिवार में उन्हें नन्हें कहकर बुलाते थे।

Back to top button
?>