मिडिया ने जिसे बनाया हिरो वो निकाला आतंकवादी, जानें तारिशी की मौत का राज़.!

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कल तक हम और आप तारिषी के दोस्त फ़राज़ की तारीफ में कसीदे पढ़ रहे थे। हमें लग रहा था कि सच्चे और ईमानदार दोस्त का सबसे बढ़िया उदाहरण है फ़राज़। हम सभी फ़राज़ को सलाम करना चाहते थे।

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आज इस वाकये में एक और नया किस्सा जुड़ गया है। बांग्लादेश की एक पत्रिका है – Dailyniropekkha इसने आज एक और रिपोर्ट दी जिसने मीडिया में तहलका मचा दिया है। बांग्ला में प्रकाशित इस पत्रिका के मुताबिक फ़राज़ कोई हीरो नहीं है बल्कि वो निब्रस इस्लाम नामक आतंकवादी का दोस्त है। पत्रिका ने हवा में ये बातें नहीं कहीं। इसके साथ तस्वीरें भी साझा की हैं जिनमें फ़राज़ उस आतंकवादी के साथ खड़ा है।

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हम फ़राज़ को ये सोचकर महान मानते रहे कि वो बच सकता था पर अपनी दोस्ती निभाने के लिए उसने जान दे दी। पर साहबज़ादे तो आतंकवादी निकले। एक वीडियो भी जारी किया गया है जिसमें वो बंदूक लिए दिखाई दे रहे हैं।

 

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फ़राज़ मारा गया तो उसकी लाश भी आतंकवादियों की लाशों के बीच रखी गई थी फिर भी हमने उसकी दोस्ती पर शक नहीं किया। अब जब वो आतंकवादी साबित हो रहा है तो कुछ लोग इसमें भी इस्लाम घुसा देंगे जबकि अच्छाई और बुराई का कौम से कोई लेना-देना नहीं है। मुसलमान अच्छे हैं ये बताने के लिए फ़राज़ ही एकमात्र उदाहरण नहीं था जिसके गलत साबित होने से क़ौम पर बात आ जाए।

ख़ैर, अब आपको ये ग़लतफ़हमी क्यों हुई ये बताते हैं। दरअसल पत्रिका के मुताबिक फ़राज़ के नाना की एक पत्रिका है। घर में ही पत्रकारिता हो रही थी तो नाती को हीरो बनाना आसान हो गया। वहीं से ये बात उठी कि फ़राज़ हीरो था। फ़राज़ के नाना की पत्रिका – ‘प्रोथोम आलो’ ने लिखा कि वो आयत सुनाकर बच सकता था। उसे आतंकियों ने वैसे भी बाहर जाने को कहा पर वह अपनी दोस्त को छोड़कर नहीं गया। इसके बाद नेकी के नाम पर ये ख़बर मीडिया में फैल गई।

हमने उसे हीरो बना दिया। अब हम उसे खराब मानकर धर्म को बदनाम कर देंगे। धर्म अगर बीच से हट जाए तो कई मसले सुलझाए जा सकते हैं पर हम धर्म को हटाकर बात करना ही नहीं जानते। फिलहाल पत्रिका की मानें को फ़राज़ को सलाम करने का सिलसिला खत्म होना चाहिए।