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भारत के इस शहर से होगा भिखारियों का सफाया, बनेगी देश की पहली ‘भिखारी मुक्त सिटी’

भारत के हर शहर में आपको सड़क, मंदिर, चौराहे इत्यादि जगहों पर भीख मांगते भिखारी दिख जाएंगे. आजकल कई लोगो ने भीख मांगने को एक धंधा बना के रखा हैं. बड़े शहरों में तो इनके गिरोह बने हुए हैं. इन्हें कम करने की तुलना में भीख मांग पैसा कमाना ज्यादा आसान लगता हैं. ऐसे में भीख मांगने वाले इन लोगो पर लगाम कसना भी जरूरी हैं. जब ये लोग भीख माँगना बंद कर कोई काम करना शुरू करेंगे तभी देश की आर्थिक स्थिति भी और मजबूत होगी. इस दिशा में बड़ा कदम उठाने के लिए मध्य प्रदेश का शहर इंदौर आगे आया हैं.

इंदौर सिटी वैसे तो अपने लजीज खाने पिने की चीजों के लिए मशहूर हैं, लेकिन पिछले तीन सालो से वो देश की सबसे क्लीन सिटी का खिताब भी हासिल कर रहा हैं. ऐसे में अब इंदौर अपने शहर को ‘भिखारी मुक्त’ बनाने की दिशा में प्लान कर रहा हैं. इंदौर का लक्ष्य हैं कि वो मार्च 2021 तक देश की पहली बेगर फ्री सिटी यानी भुखैर मुक्त शहर बन जाए. ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही हैं कि अगले साल तक इंदौर की सड़कों पर भिखारीयों की संख्या शून्य के करीब पहुँच जाएगी. फिर लोगो सड़क पर भिखारी भीख मांगते हुए नहीं दिखेंगे.

इस दिशा में आगे कदम उठाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा प्लानिंग भी शुरू हो गई हैं. ये जिम्मेदारी इंदौर निगम कमिश्रनर को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया हैं. इंदौर कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव बताते हैं कि भिक्षावृत्ति एक अभिशाप है. ऐसे में शहर के नागरिकों को इस बारे में जागरूक करना जरूरी हैं. भीख मांगने को बढ़ावा नहीं देना चाहिए. जाटव जी बताते हैं कि मार्च तक इस प्रकिया की पूरी कार्ययोजना भी तैयार कर ली जाएगी. हमारा लक्ष्य हैं कि मार्च 2021 तक इंदौर शहर को भिखारी मुक्त कर दिया जाए.

इस भिखारी मुक्त इंदौर अभियान के तहत जितने भी लोग अभी भीख मांग रहे हैं उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार रोजगार के नए साधन उपलब्ध करवाए जाएंगे. इस काम के लिए सामाजिक स्केटर में काम करने वाली निजी संस्थाओं की सहयता ली जाएगी. इस तरह भिखारी अपनी जीविका चलने के लिए भीख नहीं मांगेंगे और काम कर पैसे कमा पाएँगे.

इंदौर शहर में करीब चार हजार भिखारी हैं. ये लोग अलग अलग तरीको से भीख मांगते हैं. यहाँ तक कि शनिवार को भीख मांगने के लिए तो शहर के बाहर से भी लोग आते हैं. इन लोगो को कुछ गुट बाल्टी, शनि की प्रतिमा और सरसों का तेल किराए पर देते हैं. ऐसे में प्रशासन इस तरह की चीजें चलने वाले संगठित गिरोह की पड़ताल भी कर रहा हैं.

भिखारियों के लिए काम करने वाले आस संगठन के डायरेक्टर वसीम इकबाल बताते हैं कि लोग मुख्य रूप से इसलिए भी भीख मांगते हैं क्योंकि उन तक सरकार की वेलफेयर स्कीम पहुँच नहीं पाती हैं. वे चाहते हैं कि बच्चों को इस पेशे से दूर ही रखा जाए. इसलिए वे इंदौर में अलग अलग जगहों पर पांच मस्ती की पाठशालाएं चला रहे हैं. यहाँ भीख मांगने वाले बच्चों को पढ़ाया जाता हैं.

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