नेता से लेकर अभिनेता यहाँ रहने के लिए लेते हैं इस भगवान की इजाजत, PM मोदी भी करेंगे दर्शन वाराणसी में एक ऐसा मंदिर है जहाँ इस शहर में रहने के लिए यहाँ स्थित भगवान से इजाजत लेनी पड़ती है। अगर कोई ऐसा नहीं करता तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

कहते हैं पैसों से सबकुछ खरीदा जा सकता है और लोगों को लगता है कि अगर व्यक्ति अमीर या कोई सेलिब्रिटी है तो उसे कहीं भी जाने की इजाजत होगी. वे पैसों के बल पर कुछ भी कर सकते हैं लेकिन ऐसा नहीं है भारत में कुछ ऐसी भी जगहें हैं जहां पर जाने के लिए इजाजत की जरूरत होती है. हम जिस जगह की बात कर रहे हैं वो भगवान का मंदिर है जहां पर कोई यूंही नहीं जा सकता है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां का दर्शन करना चाहते हैं और अब उन्हें यहां जाने का मौका मिल गया है. नेता से लेकर अभिनेता यहाँ रहने के लिए लेते हैं इस भगवान की इजाजत, जानिए इस मंदिर की खासियत.

नेता से लेकर अभिनेता यहाँ रहने के लिए लेते हैं इस भगवान की इजाजत

आजकल पीएम मोदी वाराणसी और यूपी के कुछ क्षेत्रों में चुनाव के आखिरी चरण के लिए प्रचार में लगे हुए हैं. अपने रोड शो के दौरान प्रधानमंत्री काशी विश्वनाथ मंदिर भी जाएंगे और यहां पर पूजा-अर्चना करके ही वापस कहीं और जाएंगे. इसके अलावा वे काशी के कोतवाल यानि काल भैरव मंदिर भी जाएंगे. आपको बता दें कि भगवान शिव के रुद्र अवतार बाबा कालभैरव का काशी से बहुत गहरा संबंध माना जाता है. ऐसी कई मान्यताओं की वजह से ही कालभैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है.

ऐसी मान्यता भी है कि काशी में इन्हें स्वयं भगवान शिव ने नियुक्त किया था और प्रचलित मान्यताओं में ये बताया गया है कि बाबा विश्वनाथ काशी के राजा हैं और काल भैरव इस नगरी के कोतवाल. यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री मोदी काल भैरव मंदिर के दर्शन के लिए वहां जा रहे हैं. वहां रहने वालों का कहना है कि काशी विश्वनाथ के बाद अगर कोई काल भैरव का दर्शन नहीं करता तो उसकी पूजा अधूरी मानी जाती है. ऐसा बताया जा रहा है कि इसी कारण से पीएम मोदी भी इस बार काल भैरव के दर्शन करना चाहते हैं. आपको बता दें कि इससे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे. कई मान्यताओं में ये भी है कि बाबा विश्वनाथ के इस शहर में रहने के लिए बाबा काल भैरव की इजाजत लेना बहुत जरूरी होता है.

वैसे तो समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारी अलग-अलग पुलिस थानों का निरीक्षण करते रहते हैं, लेकिन वाराणसी में काल भैरव के पास वाले थाने का कभी किसी अधिकारी ने निरीक्षण के लिए नहीं जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां काल भैरव खुद निरीक्षण करते हैं और कोई बड़ा स्थानीय अधिकारी भी इस चौकी में नहीं जाता है. बनारस के लोगों का तो ऐसा मानना है कि बाबा विश्वनाथ और उनका भगवान व भक्त का नहीं, बल्कि राजा और प्रजा का रिश्ता है.

इस जगह को लेकर ऐसी है मान्यता

इतना पढ़ने के बाद अगर आपके मन में भी इस धार्मिक स्थल पर जाने की इच्छा है तो एक बार जरूर जाना चाहिए. काल भैरव के काशी पहुंचने की कथा भी बहुत दिलचस्प है. धार्मिक शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मा ने एक बार भगवान शिव की निंदा कर दी थी. जिससे काल भैरव को गुस्सा आ गया था और उन्होंने अपना नाखूनों से ब्रह्मा का मुंह काट दिया था इसके बाद काल भैरव के नाखून में ब्रह्मा का खून चिपक गया. उस समय भैरव ने उसे छुटाने की खूब कोशिश की, लेकिन खून नहीं छूट सका. तब भगवान विष्णु ने काल भैरव को काशी भेज दिया और जहां पर उन्हें ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली और उसके बाद वे वहीं पर विराजमान हो गये.