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मोदी के बिल का कमाल, गूगल ने डाला भारत का पूरा नक्शा

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मोदी के बिल का कमाल, गूगल ने डाला भारत का पूरा नक्शा

मोदी सरकार के नए विधेयक की वजह से गूगल मैप ने भारत का पूरा नक्शा देना शुरू कर दिया हैए पहले गूगल पाकिस्तान और चीन के कब्जे वाले कश्मीर को भारत से अलग दिखाता था और बॉर्डर को डॉट डॉट लाइनों से दिखाता था लेकिन जब से मोदी सरकार ने ‘जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल 2016’ पास किया है और गलत नक्शा दिखाने वालों को सजा देने की बात की हैए दुनिया की सबसे बड़ी ऑनलाइन कंपनी गूगल ने तुरंत भारत का पूरा नक्शा दिखाना शुरू कर दिया।

भारत के विधेयक से गूगल ने भारत के नक़्शे में सुधार किया है तो पाकिस्तान ने आपत्ति जाहिर की है। पाकिस्तान ने भारत के विधेयक पर संयुक्त राष्ट्र में गहरी चिंता जतायी है। पाकिस्तान ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र अपने प्रस्तावों को बरकरार रखे और भारत को ऐसे विवादास्पद कदम उठाने से बाज आने को कहे।

‘जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल 2016’ के प्रभाव में आने के बाद भारत का गलत नक्शा दिखाने वालों को अधिकतम सात साल की जेल के साथ 100 करोड़ का जुर्माना भी हो सकता है।

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विदेश कार्यालय ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत सरकार द्वारा भारतीय संसद में विवादित ‘जियोस्पेशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल’ लाने के प्रयास के बारे में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के समक्ष गंभीर चिंताएं जताई हैं। उसने न्यू यॉर्क में अपने स्थायी प्रतिनिधि के पत्रों के माध्यम से ये चिंताएं जताई हैं।

विदेश कार्यालय ने कहा कि ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए भारत के आधिकारिक नक्शे में जम्मू-कश्मीर के विवादित क्षेत्र को भारत के हिस्से के रूप में दिखाया गया है, जो कि तथ्यात्मक रूप से गलत है और कानूनी तौर पर अधिकार से परे है।’

विदेश कार्यालय ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद, भारत सरकार उन लोगों या संगठनों को दंडित करेगी, जो जम्मू-कश्मीर को सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप विवादित क्षेत्र के रूप में दिखाएंगे। इसने कहा, ‘यह पत्र संयुक्त राष्ट्र से अपील करता है कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को कायम रखे और भारत से कहे कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने वाले ऐसे कृत्यों को बंद करे।’

विदेश कार्यालय ने कहा, ‘हमने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए संयुक्तराष्ट्र की निगरानी में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह करवाए।’

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