अध्यात्म

पूजा में पान के पत्तों के इस उपयोग से होगी धन की बारिश

न्यूज़ट्रेंड वेब डेस्क: हिंदु धर्म में पान के पत्ते का बहुत महत्व है। पान को पूजा-पाठ व अन्य किसी भी शुभ काम में इसका उपयोग शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय पहली बार पान के पत्ते को उपयोग में लिया गया था और तब से ही यह पान का प्रयोग हर शुभ कार्य में किया जाने लगा।

पान को संस्कृत भाषा में तांबूल कहा जाता है। तांबूल, ताम्र शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है कि कोई ऐसी वस्तु जो तांबे के रंग जैसी या लाल रंग की हो। यह लाल रंग पान के पत्ते में लगाए जाने वाले कत्थे को दर्शाता है।  हिन्दू धर्म की मान्यता अनुासार पान के पत्तों में कई देवी-देवताओं का वास रहता है। अतः नवरात्रों की पूजा में पान के पत्ते का प्रयोग कर आप देवी माँ को प्रसन्न कर सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको पान के पत्तों का महत्व बताएंगे और पान के पत्ते द्वारा होने वाले ऐसे उपाय बताएंगे जिसे करने के बाद आप अमीर हो जाएंगे और आपके घर में सुख शान्ति का वास होगा।

  • गणेश भगवान को को पान के पत्तेपर केसर रखकर चढ़ाने से जीवन में आए सभी संकटों से मुक्ति मिल जाती हैं।
  • पान का सेवन करने के लिए बुधवार का दिन सबसे उत्त्म माना गया है, इस दिन पान का सेवन करने से आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है।
  • पान के पत्तों को घर के मुख्य द्वार पर लटकाना शुभ माना जाता है, ऐसी मान्यता है कि इसको लटकाने से घर की नकारात्मकता खत्म होने लगती है।
  • सावन के महीने में पान के पत्ते को शिवलिंग पर चढ़ाना शुभ माना जाता है साथ ही पान को चढ़ाने से इच्छा भी पूरी होती है ऐसी मान्यता है।
  • ऐसा माना जाता है कि यदि किसी व्यक्ति को नजर दोष लगा हो तो ुसे पान के पत्ते में सात गुलाब की सात पंखुड़ियां रखकर खिला देने से नजर दोष खत्म हो जाता हैं।

पान के पत्ते पर देवी-देवता करते हैं वास

लेकिन पान का महत्व केवल यहीं खत्म नहीं होता। पान तो धर्म से जुड़ा है। विभिन्न कर्म-कांडों में किसी ना किसी रूप से पान का प्रयोग किया जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार पान के एक पत्ते में ब्रह्मांड के देवी-देवता वास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस पत्ते के विभिन्न कोनों अथवा स्थानों पर देवी-देवता मौजूद हैं।

  • ऐसा माना जाता है कि पान के पत्ते के ठीक ऊपरी हिस्से पर इन्द्र एवं शुक्र देव विराजमान रहते हैं। पान के मध्य हिस्से में सरस्वती मां का वास है, तथा मां महालक्ष्मी जी पत्ते के बिल्कुल नीचे वाले हिस्से पर विराजमान रहता हैं जहां पर पत्ता तिकोना आकार लेता है।
  • इसके अलावा ज्येष्ठा लक्ष्मी जी पान के जुड़े हुए भाग पर विराजमान हैं। यह वह भाग है जो पत्ते को दो हिस्सों को आपस में जोड़ता है।
  • भगवान शिव पान के पत्ते के भीतर वास करते हैं। भगवान शिव एवं कामदेव जी का स्थान इस पत्ते के बाहरी हिस्से पर होता है।
  • मां पार्वती एवं मंगल्या देवी पान के पत्ते के बाईं ओर रहती हैं तथा भूमि देवी पत्ते के दाहिनी ओर विराजमान हैं।
  • भगवान सूर्य नारायण पान के पत्ते पर सभी जगह पर उपस्थित रहते हैं।

पान के सही पत्ते का चयन है आवश्यक

एक ही पत्ते में इतने सारे देवी-देवताओं को वास होने के कारण इसका पूजा में महत्व और अधिक बढ़ जाता है। लेकिन पूजा में उपयोग किए जाने वाले पान के पत्ते का चयन करते वक्त व्यक्ति को बेहद सावधान रहना चाहिए।

हिन्दू मान्यता के अनुसार पान के पत्ते में किसी प्रकार का छेद नहीं होना चाहिए, साथ ही वह सूखा और किसी भी हिस्से से कटा-फटा नहीं होना चाहिए। पूजन में हमेशा पान का पत्ता सही सलामत रूप में, चमकदार एवं कहीं से भी सूखा नहीं होना चाहिए। नहीं तो इससे व्यक्ति की पूजा साकार नहीं होती है।

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