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भारत मां पर कुर्बान, नजमों की एक शाम

न्यूज़ट्रेंड वेब डेस्क: भारत हो या कोई अन्य देश, हर देश के नागरिकों में देशप्रेम कूट-कूट कर भरा होता है। तभी तो कुछ लोग बिना अपने जान की परवाह किए देश की सीमा पर पहरा देते हैं ताकि देश में रहने वाले लोग सुकून से अपनी जिंदगी बिता सकें। ठंडी, गर्मी, बरसात हो या कोई बड़े से बड़ा त्यौहार हम सब अपने घर में सुकून से हर एक मौसम और हर एक त्यौहार को अच्छे से मनाते हैं लेकिन देश के लिए अपने परिवार को छोड़ बिना अपनी जान की परवाह किए एक सैनिक इस सब चीजों से दूर सिर्फ एक बात पर ही ध्यान देता है कि कोई भी दुशमन उसेक देश पर हमला ना कर दें। अपनी जान को दांव पर लगाए हर सैनिक 24 घंटे सीमा पर तैनात रहता है। यह सब देशप्रेम ही तो है, जो लोग महज इसे एक पैसा कमाने का जरिया समझते हैं उनको ये समझ लेना चाहिए कि कोई भी इंसान अपनी जान के बदले पैसा नहीं कमाता है, पैसा कमाने के और भी कई रास्ते होते है। लेकिन सिर्फ देश से प्यार और उसके लिए उसकी निष्ठा ही उसे उसके परिवार से दूर सबकी रक्षा करने के लिए साहस देती है।

यूं तो स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर पूरे देश में ही लोगों के मन में देशप्रेम उत्पनन हो जाता है, स्कूलों, ऑफिसों से लेकर सरकारी कार्यालयों में भी कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कई सरकारी धरोहरों पर इन दिनों पर झंडा फहराने का कार्यक्रम रखा जाता है साथ ही उसमें परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन दो दिनों में हम अपने घरों के बाहर झंडे को फहराते हैंष वाहनों पर राष्ट्रीयध्वज लगाकर निकलते हैं। टीवी और रेडियो पर भी उस दिन देशभक्ति गानों और फिल्मों की बहार सी आई होती है। सोशल मीडिया से लेकर मोबाइल फोन के स्टेटस तक सब कुछ देशभक्ति, देशगीतों और मैसेजेस से भरा रहता है।  हम इस दिन अपने कपड़े, सामान, वाहनों और घरों पर राष्ट्रीय ध्वज लगाकर इस उत्सव को मनाते हैं। तो चलिए आपको दिखाते हैं कुछ ऐसे देशभक्ति गीत, कविताएं और शायरियां जिसे सुनकर आप एक बार फिर से देशभक्तिे के रंग में रंग जाएंगे।

देशभक्ति शायरियां

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे

शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे

बची हो जो एक बूंद भी लहू की

तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए

बस अमन से भरा यह वतन चाहिए

जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए

और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये


ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा

ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए

कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये

खून से खेलेंगे होली,

अगर वतन मुश्किल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना

अब हमारे दिल में है,

कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की मान का है,

हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,

नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे

शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे

बची हो जो एक बूंद भी लहू की

तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगे

मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए

बस अमन से भरा यह वतन चाहिए

जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए

और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा

ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा

पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए

कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आये

खून से खेलेंगे होली,

अगर वतन मुश्किल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना

अब हमारे दिल में है,

कुछ नशा तिरंगे की आन का है,

कुछ नशा मातृभूमि की मान का है,

हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,

नशा ये हिन्दुस्तान की शान का है

कर जस्बे को बुलंद जवान 

तेरे पीछे खड़ी आवाम 

हर पत्ते को मार गिरायेंगे

जो हमसे देश बटवायेंगे

मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूँ,

यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,

मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,

करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है

शम्मा-ए-वतन की लौ पर जब कुर्बान पतंगा हो,
होठों पर गंगा हो और हाथों में तिरंगा हो.

लिख रहा हूँ मैं अंजाम, जिसका कल आगाज आएगा,
मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा.

जिसे सींचा लहू से है वो यूँ खो नहीं सकती,
सियासत चाह कर विष बीज हरगिज बो नहीं सकती,
वतन के नाम पर जीना वतन के नाम मर जाना,
शहादत से बड़ी कोई इबादत हो नहीं सकती.

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं,
देखना हैं जोर कितन बाजू-ए-कातिल में हैं,
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां,
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में हैं.

लड़ें वो बीर जवानों की तरह,
ठंडा खून फ़ौलाद हुआ,
मरते-मरते भी की मार गिराए,
तभी तो देश आज़ाद हुआ.

है नमन उनको कि जो यशकाय को अमरत्व देकर,
इस जगत में शौर्य की जीवित कहानी हो गये हैं,
है नमन उनको जिनके सामने बौना हिमालय,
जो धरा पर गिर पड़े पर आसमानी हो गये हैं.

उन आँखों की दो बूंदों से सातों सागर हारे हैं,
जब मेहँदी वाले हाथों ने मंगल-सूत्र उतारे हैं.

कुछ पन्ने इतिहास के
मेरे मुल्क के सीने में शमशीर हो गएँ,
जो लड़े, जो मरे वो शहीद हो गएँ,
जो डरे, जो झुके वो वजीर हो गएँ.

चिंगारी आजादी की सुलगी मेरे जश्न में हैं,
इन्कलाब की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में हैं,
मौत जहाँ जन्नत हो ये बात मेरे वतन में हैं,
कुर्बानी का जज्बा जिन्दा मेरे कफन में हैं.

खूब बहती हैं अमन की गंगा बहने दो,
मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो,
लाल हरे रंग में ना बाटो हमको,
मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो.

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पे मरने वालो का यही बाकि निशां होंगा.

आन देश की शान देश की, देश की हम संतान हैं,
तीन रंगों से रंगा तिरंगा अपनी ये पहचान हैं.

चढ़ गये जो हँसकर सूली, खाई जिन्होंने सीने पर गोली,
हम उनको प्रणाम करे हैं, जो मिट गये देश पर,
हम सब उनको सलाम करते हैं.

अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नही !
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नही!!

मैं जला हुआ राख नही, अमर दीप हूँ,
जो मिट गया वतन पर, मैं वो शहीद हूँ.

भारत की फ़जाओं को सदा याद रहूँगा,
आज़ाद था, आज़ाद हूँ, आज़ाद रहूँगा.

यदि प्रेरणा शहीदों से नहीं लेंगे तो ये आजादी ढलती हुई साँझ हो जायेगी
और पूजे न गए, वीर तो सच कहता हूँ कि नौजवानी बाँझ हो जायेगी.

आओ झुककर सलाम करे उनको,
जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है,
खुशनसीब होते हैं वो लोग,
जिनका लहू इस देश के काम आता है.

फना होने की इज़ाजत ली नहीं जाती,
ये वतन की मोहब्बत है जनाब… 
पूछ के नहीं की जाती.

तीन रंग का नही वस्त्र, ये ध्वज देश की शान हैं,
हर भारतीय के दिलो का स्वाभिमान हैं,
यही है गंगा, यही हैं हिमालय, यही हिन्द की जान हैं,
और तीन रंगों में रंगा हुआ ये अपना हिन्दुस्तान हैं.

शहीदों के त्याग को हम बदनाम नही होने देंगे,
भारत की इस आजादी की कभी शाम नही होने देंगे.

 

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