सावन के सोमवार को करें बेलपत्र से भगवान शिव की पूजा लेकिन भूलकर भी ना चढ़ाएँ ये चीज़ें

सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की धूम रहती है। हर जगह शिवभक्तों का ताँता देखा जा सकता है। कोई काँवरिया लेकर शिव को जाल चढ़ाने के लिए जाता है तो कोई ऐसे ही शिव को प्रसन्न करने की कोशिश करता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि भगवान शिव को केवल एक लोटे जाल और बेलपत्र से भी ख़ुश किया जा सकता है। भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि अगर ये ख़ुश हो जाते हैं तो किसी भी भक्त को सुखी जीवन का वरदान देते हैं, जबकि क्रोधित हो जाने पर लोगों का जीवन बर्बाद कर देते हैं।

हालाँकि ऐसा बहुत कम होता है जब सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव क्रोधित होते हों। सावन के महीने में भगवान शिव बहुत प्रसन्न रहते हैं और अपने भक्तों को मनचाहा वरदान देकर भी प्रसन्न करते हैं। जानकारी के लिए बता दें 28 जुलाई से सावन की शुरुआत हो चुकी है और आज यानी 30 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है। महादेव को सावन का महीना तो प्रिय ही है, ऊपर से सोमवार उनका दिन होता है। ऐसे में यह बहुत ही शुभ संयोग बनता है। सावन के सोमवार में लड़कियाँ और पुरुष दोनों ही शिवजी के लिए व्रत रखते हैं।

यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि भगवान शिव को बेलपत्र से कितना लगाव है। भगवान शिव को अगर बेलपत्र चढ़ाया जाता है तो वह भक्त की हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। इसके साथ ही भगवान शिव को शमी के पत्ते भी पसंद हैं। इसी वजह से कहा जाता है कि सावन के पूरे महीने में शिवलिंग पर शमी के पत्ते ज़रूर चढ़ाने चाहिए। आइए जानते हैं सावन के महीने में भगवान शिव को क्या-क्या पसंद है और उन्हें क्या-क्या चढ़ाने से भक्त को सुखी जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

शिव पूजा के दौरान करें यह:

*- सावन के महीने में भगवान शिव को जाल चढ़ाने से पहले सूर्यदेव को जाल चढ़ाएँ। इसके बाद ही शिव मंदिर में जाकर ताम्बे के पत्र में गंगाजल लेकर उसके सफ़ेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएँ।

*- भगवान शिव को धातुरे से भी भी काफ़ी लगाव है। ऐसे में भगवान शिव को यह ज़रूर चढ़ाएँ। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है।

*- सावन के महीने में दूध चढ़ाने की भी परम्परा है। इसके साथ ही शिवलिंग पर गन्ने का रस भी चढ़ाया जाता है। इससे जीवन में हर तरह ए सुख की प्राप्ति होती है।

भूलकर भी शिवलिंग पर ना चढ़ाएँ ये चीज़ें:

*- हल्दी:

हल्दी का सम्बंध भगवान विष्णु और सौभाग्य से होता है, इसलिए भूलकर भी हल्दी भगवान शिव को नहीं चढ़ाना चाहिए।

*- तुलसी:

आप शायद ही यह बात जानते होंगे कि भगवान शिव को तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ाना चाहिए। एक बार भगवान शिव ने ही तुलसी के पति असर जलंधर का वध किया था। इस वजह से भगवान शिव को तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है।

*- तिल:

तिल के बारे में कहा जाता है कि यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है। इसी वजह से इसे भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता है।

*- टूटे हुए चावल:

भगवान शिव को अक्षत के रूप में सबूत चावल अर्पित करने चाहिए ना की टूटे हुए चावल। माना जाता है कि टूटे हुए चावल अपूर्ण और अशुद्ध होते हैं। इसी वजह से यह भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए।

*- कुमकुम:

यह भी शौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि भगवान शिव एक वैरागी हैं। इसी वजह से भगवान शिव को कुमकुम नहीं चढ़ाया जाता है।

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