इस मंदिर में हर रोज भगवान की आरती करती है यह हथिनी,मुस्लिम महावत को भी हो गया है भगवान से प्रेम

भगवान की आरती करती है हथिनी: इस दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं, जिसे देखने के बाद खुद की आँखों पर यकीन ही नहीं होता है, लेकिन वो चीजें सच होती हैं। अक्सर जानवरों के बारे में कहा जाता है कि इनके अन्दर बुद्धि और सोच नहीं होती है। लेकिन कई बार यही जानवर इस कहावत को झूठा साबित करते हुए दिखाई देते हैं। कुत्ते से लेकर अन्य पालतू जानवर कई बार इंसानों से भी ज्यादा समझदारी का काम कर दिखाते हैं। इनका यही काम देखकर लोग हैरान हो जाते हैं। हालाँकि इसके लिए इन्हें ट्रेनिंग की जरुरत पड़ती है।

भगवान की आरती करती है हथिनी:

होली का त्यौहार काफी नजदीक आ गया है। पूरे भारत के अलावा विश्व के भी कई देशों में अब होली का त्यौहार धूम-धाम से मनाया जाने लगा है। लेकिन आज भी मथुरा की होली पुरे विश्व में सबसे अनोखी और निराली होती है। इसकी तैयारियां जोरो-शोरो पर चल रही हैं। मथुरा की होली देखने के लिए लोग विश्व के कोने-कोने से इकठ्ठा होते हैं। इसी क्रम में आपको हम कृष्ण की नगरी मथुरा से जुडी एक ऐसी बात बताने जा रहे हैं, जिसपर आप आसानी से यकीन नहीं कर पाएंगे। भगवान की आरती करती है हथिनी

हथिनी की देखभाल करते हैं मुस्लिम महावत:

आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहाँ पर कोई पुजारी नहीं बल्कि भगवान की आरती करती है हथिनी। केवल यही नहीं वह हथिनी घंटी बजाकर भगवान को जगाती भी है। आपको बता दें मथुरा के गोकुल में स्थित रमण रेवती एकमात्र ऐसा मंदिर है जहाँ पुजारी नहीं बल्कि एक हथिनी भगवान की आरती उतारती है। इस हथिनी का नाम राधा बताया जा रहा है। आपको यह जानकर और भी हैरानी होगी कि हथिनी की देखभाल मुस्लिम महावत सलीम खान और अमज़द खान करते हैं।

लोग हथिनी का पैर छूकर देते हैं दक्षिणा:

राधा की वजह से ही ये दोनों मुस्लिम महावत सुबह-शाम की आरती के दौरान मंदिर में मौजूद रहते हैं। ये दोनों मंदिर की परिक्रमा भी करते हैं। इस दौरान हर कोई राधा को देखने आता है और उसका पैर छूकर उसे दक्षिणा देता है। राधा भी दक्षिणा लेकर अपने महावत के हाथों में दे देती है। राधा अपनी सूड से रूपये पैसे या सामान तब तक पकड़े रहती है जब तक महावत उसे पकड़ नहीं लेता है। आपको बता दें रमण रेवती मंदिर की यह सदियों पुरानी परम्परा है कि यहाँ हाथी ही भगवान की आरती करती है। इसी प्रथा को आगे बढाने के लिए 10 साल पहले राधा और हाथी माधव को बचपन में लाया गया था।

मुस्लिम महावतों को भी हो गया है कृष्ण से प्रेम:

5 साल पहले की बात है जब किसी गंभीर बिमारी की वजह से माधव की मृत्यु हो गयी थी। माधव की मृत्यु के बाद से मंदिर में आरती की जिम्मेदारी राधा ने अपने सर पर ले ली। महावत सलीम खान ने बताया कि राधा उनके लिए बेटी के जैसी है। राधा के साथ-साथ श्रीकृष्ण की आरती करवाते-करवाते हमें भी कृष्ण से प्रेम हो गया है। कृष्ण प्रेम का प्रतिक हैं, इनकी भक्ति में धर्म को बीच में नहीं लाना चाहिए। मंदिर के पुजारी ने बताया कि हथिनी राधा की भक्ति देखकर मेरा मन प्रसन्न हो जाता है।

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