सिर्फ मर्दों ने ही नहीं लड़ी थी आजादी की जंग, इन एक हजार’ रानियों ने भी अंग्रेजों को चटाई थी धुल

नई दिल्‍ली जब भी बात देश की आजादी और देश को आजाद में अपना बलिदान देने वाले लोगों कि आती है तो हम सिर्फ मर्दों कि ही बात करते हैं। लेकिन हमारी आजादी शायद ऐसी न होती अगर इसमें देश की महिलाओं ने अपनी साहस और जज्बा न दिखाया होता। बहुत कम लोग जानते हैं कि अंग्रेजों को एक नहीं बल्कि ‘एक हजार’ रानी लक्ष्मीबाई ने धुल चटाया था। Woman army as rani Jhansi laxmi bai.

नेता जी ने बनाई थी रानी रेजीमेंट

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने एक रेजिमेंट बनाई थी। जिसमें शामिल होने वाली महिलाओं को रानी कहा जाता था। इस रेजिमेंट और इसमें शामिल होने वाली महिलाओं का नाम रानी इसलिए रखा गया था क्योंकि ये सभी रानी लक्ष्‍मीबाई की तरह अंग्रेजों से लड़ती थीं। इन महिलाओं ने अंग्रेजों को कई बार धूल चटाया और मैदान छोड़कर भाग खड़े होने को मजबूर किया। यह एक हजार रानी लक्ष्‍मीबाई भले ही आज हमारे बीच न हो, लेकिन उनका बलिदान और साहस हमेशा याद किया जाएगा।

नेताजी ने ऐसे बनाई थी महिलाओं की आर्मी  

सुभाष चंद्र बोस ने जब साल 1943 में जापान पहुंचे, तो वहां से सिंगापुर गए और आजाद हिंद फौज की कमान संभाली। नेताजी ने आजाद हिंद फौज का पुनर्गठन किया और महिलाओं के लिए ‘रानी झांसी रेजिमेंट’ का गठन किया। शुरुआत में 15 जुलाई 1943 को इसमें 20 महिलाएं भर्ती हुई और महीने के अंत तक ये संख्या 50 तक पहुंच गई। इस रेजींमेट की कैप्टन डॉ. लक्ष्मी स्वामीनाथन थी। 22 अक्टूबर 1943 तक रानी झांसी रेजीमेंट में 1000 महिलाएं शामिल हो चुकी थी।

युद्ध में साइनाइड लेकर चलती थीं महिलाएं  

दुनिया की पहली महिला फौज (रेजीमेंट रानी झांसी) का गठन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज ही के दिन 15 जुलाई 1943 को किया था। लेकिन, इस रेजीमेंट में शामिल होने के लिए महिलाओं को काफी कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता था। इस ट्रेनिंग में प्रतिदिन 4 किलोमीटर का मार्च और 2 किलोमीटर दौड़ना शामिल था। इस रेजीमेंट कि ट्रेनिंग के दौरान महिलाओं को भारी पत्‍थरों को ढोंना पड़ता था। इसके अलावा भी ये ट्रेनिंग बिल्कुल पुरुषों कि ट्रेनिंग जैसे ही थी। ऐसा कहा जाता है कि ये विरांगनाएं अपने साथ हमेशा साइनाइड लेकर चलती थीं, ताकि मुसीबत और पकड़े जाने कि स्थिति में वो खुद को मार सके।

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