राजनीति

महिला टीवी एंकर को देखते ही मुँह फूला ली राकेश टिकैत ने, कहा- ‘जाओ तुमसे बात नहीं करना’

राकेश टिकैत बीते एक साल से लगातार सुर्खियों में हैं। जी हां एक तरफ किसानों का धरना-प्रदर्शन कृषि क़ानून वापस लेने के बाद भी थमने का नाम नहीं ले रहा। वहीं दूसरी तरफ़ राकेश टिकैत लगातार अपने बयानों या कृत्यों की वज़ह से चर्चा में बनें रहते हैं। गौरतलब हो कि वह दिल्ली-उत्तर प्रदेश के गाजीपुर बार्डर पर किसानों के धरना प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं और कहने को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं और अब उन्होंने एक महिला पत्रकार पर अपनी खीझ निकाली है।

Rakesh Tikait

बता दें कि बुधवार को एक महिला पत्रकार पर राकेश टिकैत भड़क गए और यह महिला पत्रकार एक नामी- गिरामी टीवी न्यूज चैनल से जुड़ी हुई है। गौरतलब हो कि हुआ कुछ ऐसा की उक्त न्यूज चैनल पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेता पक्षपात पूर्ण रिपोर्टिंग करने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं किसानों का कहना है कि ये टीवी चैनल किसान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खबरें दिखाते हैं।

kisan andolan

इतना ही नहीं कहा ये भी जा रहा है कि धरना प्रदर्शन खत्म करने से जुड़ा सवाल पूछने से पहले ही राकेश टिकैत इस महिला पत्रकार पर भड़क गए और इस कदर नाराजगी दिखाई कि यह कहने में भी बाज नहीं आए कि मैं तुमसे बात ही नहीं करूंगा। इस के बाद पक्षपात पूर्ण रिपोर्टिंग को लेकर राकेश टिकैत ने महिला पत्रकार को जमकर लताड़ लगाई।

50-55 हज़ार दर्ज मुकदमे हो वापस…

Rakesh Tikait

वहीं दूसरी तरफ़ बुधवार सुबह यूपी गेट पर मीडिया से बातचीत के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 50-55 हज़ार मुकदमें जो आंदोलन के दौरान दर्ज़ हुए हैं वे वापस लिए जाएं। MSP गारंटी क़ानून बनें, जिन किसानों ने जान गंवाई है उन्हें मुआवजा मिले, जो ट्रैक्टर बंद हैं उन्हें ट्रैक्टर दिए जाएं। अब ये हमारे मुख्य मुद्दे हैं और सरकार को इस पर बातचीत करनी चाहिए।

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इसके अलावा बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन सोमवार को वादे के मुताबिक, तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को दोनों सदनों में बाकायदा विधेयक लाकर निरस्त कर दिया है। वहीं इन सबके बावजूद किसान नेता न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने समेत 6 मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। गौरतलब हो कि इसी बाबत किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि, “एमएसपी और किसानों पर मुकदमा वापस लिए बिना कोई भी किसान दिल्ली के बार्डर से घर नहीं जाएगा।

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“उन्होंने कहा कि आगामी 4 दिसंबर को हमारी बैठक है। जब तक एमएसपी पर कानून नहीं बन जाता और किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस नहीं लिए जाते, तब तक कोई भी किसान यहां से नहीं हिलेगा। मांगें पूरी होने के बाद ही हम यहां से जाएंगे। बता दें कि तीनों केंद्रीय कृषि कानून निरस्त होने के बाद भी दिल्ली-एनसीआर के सिंघु, टीकरी, शाहजहांपुर और गाजीपुर बार्डर पर किसान प्रदर्शनकारी लगातार डटे हुए है।

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