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चाइना पाकिस्तान कॉरीडोर के मुद्दे पर भारत के आगे झुका चीन, कहा बदल सकता है नाम!

भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से काफी दिनों के बाद एक अच्छी खबर आई है, बीते कुछ महीनों से दलाई लामा की अरुणाचल यात्रा और कुछ अन्य मुद्दों के चलते भारत और चीन के बीच तल्खियां बढ़ रही थीं, लेकिन अब चीन ने खुद ही एक अच्छी पहल की है जो भारत के हक में भी है, हालांकि चीन जैसे देश पर इतनी आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता.

कॉरीडोर के मुद्दे पर भारत के आगे झुका चीन :

आपको बता दें कि चीन और पाकिस्तान के बीच बन रहे आर्थिक गलियारे के मुद्दे पर पहली बार चीन भारत के आगे झुकता नजर आ रहा है, इतना ही नहीं भारत की आपत्ति के मद्देनजर चीन ने प्रोजेक्ट का नाम बदलने पर भी सहमति जताई है. दरअसल चीन और पाकिस्तान के बीच बनने वाला इकॉनमिक कॉरीडोर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बीच से होकर गुजरेगा जिसपर लगातार भारत आपत्ति जताता आया है. यह कश्मीर का वह हिस्सा है जो विवादित है, भारत इस क्षेत्र से आर्थिक गलियारे के गुजरने का विरोध कर रहा है.

इस मुद्दे पर चीन ने कहा है कि वह भारत और पाकिस्तान के बीच के विवाद में शामिल नहीं होना चाहता, भारत में चीन के राजदूत लुओ झओहुई ने कहा कि चीन भारत के हितों को ध्यान में रखता है और  पाकिस्तान से भारत के विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहता. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजरने वाले कॉरीडोर के मसले पर चीन भारत के समर्थन में है. चीन इस कॉरीडोर का नाम बदलने की भी सोच सकता है.

आपको बता दें कि चाइना पकिस्तान इकॉनमिक कॉरीडोर पीओके से गुजरेगा इसपर भारत शुरू से ही अपना विरोध जताता रहा है, इसके अलावा भारत चीन के वन बेल्ट-वन रोड प्रोजेक्ट का भी विरोध करता रहा है, यह प्रोजेक्ट करीब 46 अरब डॉलर की लागत से तैयार होना है जो कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्ट भी माना जाता है,

ऐसे में अब चीन भारत से रिश्ते सुधारने के प्रयास में लगा है और उसने भारत के सामने 4 प्रोपोजल रखे हैं, चीन भारत की एक्ट ईस्ट पालिसी के साथ अपने वन बेल्ट-वन रोड (OROB) को मिलाना चाहता है, साथ ही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर फिर से बातचीत करना चाहता है, इतना ही नहीं एक प्रोपोजल के तहत भारत और चीन के बीच ट्रीटी ऑफ गुड नेबरलाइनेस एंड फ्रेंडली को-ऑपरेशन पर बातचीत करने और भारत चीन के बीच के सीमा विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने को लेकर भी बातचीत करना शामिल है.

आपको बता दें की CPEC के जरिये चीन अरब सागर और हिन्द महासागर में अपनी पैठ बनाना चाहता है, इस कॉरीडोर के निर्माण से चीन में इम्पोर्ट किये जाने वाले 80% कच्चे तेल को मलक्का की खाड़ी से शंघाई तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे जहां कच्चे तेल को चीन तक पहुंचाने में 16 हजार किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है वहां 5 हजार किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी. इसके अवाला ग्वादर पोर्ट पर नेवी ठिकाना बनाकर चीन को अपनी नेवी मजबूत करने में भी बहुत मदद मिलेगी.

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