लखनऊ – सपा के ज्यादातर नेताओं को लगता है कि अगर उन्हें 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के तूफान को रोकना है तो सपा को मायावती के साथ गठबंधन करना ही होगा। इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सपा के कई दिग्गज नेता और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों का यह कहना है कि बीजेपी के हाथों लगातार दो बार करारी हार के बाद गेस्ट हाउस कांड भूलकर सपा को बसपा के साथ हाथ मिला लेना चाहिए। Sp bsp alliance up election.

 

2019 में बीजेपी को हराने के लिए मायावती का सहारा –

इकॉनमिक टाइम्स से बातचीत करते हुए सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नेता ने बताया कि विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद सपा-बसपा का गठबंधन एक मजबूरी है। यहां तक कि सपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के तीन बड़े सदस्यों का भी यही मानना है कि दोनों पार्टियों के लिए अब गठबंधन बहुत जरूरी हो गया है। लेकिन, जैसी राजनीति मायावती करती हैं उससे सपा के नेताओं में डर भी है। रिपोर्ट के अनुसार सपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता का कहना है कि, मायावती के मन को कोई नहीं जानता, वो कब क्या कर दें। खबर के अनुसार ज्यादातर बसपा नेताओं का भी यही मानना है कि सपा-बसपा गठबंधन होना चाहिए।

1995 का गेस्ट हाउस कांड होगा गठबंधन का रोड़ा –

हालांकि, समाजवादी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर तो बसपा से गठबंधन का संकेत नहीं दिया है। लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं में विधानसभा चुनावों में हार के बाद से ही सुगबुगाहट चल रही है। लेकिन, इस गठबंधन में सबसे बड़ी रुकावट 1995 का गेस्ट हाउस कांड होगा। सपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के कार्यकर्ताओं का मानना है कि अखिलेश यादव के साथ मायावती सब कुछ भूलकर गठबंधन करने के बारे में सोच सकती हैं। बीजेपी द्वारा योगी आदित्यनाथ को यूपी का सीएम बनने के बाद से ही सपा-बसपा गठबंधन के कयास लगाए जाने लगे हैं। क्योंकि विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद मायावती की राज्यसभा सदस्यता खत्म होने जा रही है। इसलिए सपा मायावती को राज्यसभा में भेजने के लिए सहयोग कर सकती है। जो दोनों के बीच गठबंधन का पहला कदम हो सकता है।

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