सच्चाई या मिथक : क्या मनुष्य सिर्फ अपना 10 फीसदी दिमाग ही इस्तेमाल कर पाता है? प्राचीन काल से ही दिमाग को लेकर यही बहस छिड़ी हुई है कि क्या वाकई मनुष्य सिर्फ 10 फीसदी ही दिमाग का इस्तेमाल कर पाता है?

दुनिया में कोई भी काम करने के लिए दिमाग की ज़रूरत होती है, जोकि ईश्वर द्वारा मानव को विरासत में मिली है। जी हां, मनुष्य अपने दिमाग के बदौलत आज चांद और सूरज तक पहुंच चुका है। बिना दिमाग के मनुष्य अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता है, लेकिन ऐसे में अगर यह कहा जाए कि आप सिर्फ अपना 10 फीसदी ही दिमाग का इस्तेमाल कर पाते हैं, तो शायद आपको झटका लगेगा।

प्राचीन काल से ही दिमाग को लेकर यही बहस छिड़ी हुई है कि क्या वाकई मनुष्य सिर्फ 10 फीसदी ही दिमाग का इस्तेमाल कर पाता है? इस विषय पर सदियों से चर्चा चली आ रही है और अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है। खैर, पहले हम जानते हैं कि मनुष्य के 10 फीसदी दिमाग इस्तेमाल करने के पीछे का आखिर सिद्धांत क्या है?

19वीं सदी से प्रचलित है ये सिद्धांत

19वीं सदी से ही यह माना जा रहा है कि मनुष्य केवल अपना 10 फीसदी दिमाग का इस्तेमाल कर पाता है और बाकि 90 फीसदी दिमाग काम नहीं करता है। यानि 90 फीसदी दिमाग किसी काम के नहीं है। पिछले कई सालों से यह सवाल हर किसी के मन में है कि क्या वाकई हम अपना दस फीसदी ही दिमाग इस्तेमाल करते हैं? इतना ही नहीं, जब से यह सिद्धांत आया है, तब से कई लोग इसी सही मानने लगे हैं।

19वीं सदी में अमेरिकी मनोवैज्ञानिक विलियम जेम्स ने अपने बेटे का आईक्यू परीक्षण किया, जिसके बाद उन्होंने कहा कि मनुष्य का केवल 10 फीसदी दिमाग ही काम करता है। सन् 1907 में विलियम जेम्स का एक लेख विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हुआ, जिसमें उन्होंने कहा कि हम अपने मस्तिष्क में उपस्थित मानसिक और भौतिक संसाधनों का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही उपयोग करते हैं, यानी मनुष्य अपने मस्तिष्क का केवल 10 प्रतिशत ही प्रयोग करता है। विलियम जेम्स के इस कथन के बाद पूरी दुनिया में बहस छिड़ गई।

सिर्फ 10 फीसदी दिमाग का इस्तेमाल कर पाते हैं हम: सच्चाई या मिथक?

1907 के बाद विलिमय जेम्स का यह सिद्धांत तेज़ी से फैलने लगा और आज भी कुछ लोग इसे सच भी मानते हैं। इतना ही नहीं,  कई संस्थाओं ने यह दावा भी किया कि मशहूर वैज्ञानिक आइंस्टीन भी अपना केवल 10 फीसदी दिमाग इस्तेमाल करते थे, लेकिन बाद में आइंस्टीन की प्रयोगशाला में काम कर चुके संज्ञानात्मक तंत्रिका वैज्ञानिक डेला साला ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि प्रयोगशाला में ऐसा कुछ भी मौजूद नहीं है, जिससे इस सिद्धांत को सही ठहराया जाए।

इसके बाद कई तरह के रिसर्च होने लगे, लेकिन फिलहाल भी यह एक बहस का मुद्दा बना हुआ है और कोई भी रिसर्च इस बात को अभी तक पूरी तरह से साबित नहीं कर पाई है कि वाकई सिर्फ 10 फीसदी दिमाग मनुष्य इस्तेमाल कर पाता है। हालांकि, रिसर्च में कभी यह पूरी तरह से दावा नहीं किया गया है कि मनुष्य सिर्फ अपना 10 प्रतिशत दिमाग का ही इस्तेमाल कर पाता है।