आर्थिक संकट से लड़कर किसान की बेटी बनी जज, पढ़ाई के लिए बेची थी जमीन

यूं ही नहीं मिलती राही को मंजिल एक जूनून सा दिल में जगाना होता है। अगर कोई सपना देखा है तो उसे पूरा करने के लिए मेहनत और लगन करनी होती है और फिर राहें आसान होती है और मंजिल मिल जाती है। इन बातों को सच कर दिखाया है एक किसान की बेटी ने जिसने जज बनकर सिर्फ अपने पिता की ही नाहीं बल्कि पूरे गांव का सपना पूरा किया है। जिन किसानों के खुद के सपने नहीं पूरे हो पाते उनमे से एक की बेटी ने अपने पिता का सपना पूरा किया और खुद को एक गौरवशाली पद पर स्थापित किया। पिता लोकनाथ पटेल के सपने को पूरा करने वाली समृति के संघर्ष की कहानी सुनते हैं।

रीवा जिले के खुजहा गांव में एक किसान है लोकनाथ पटेल जिनके चार बच्चे हैं। उनकी दूसरे नंबर की बेटी है स्मृति जिसने रीवा में रहकर अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई की।  उनकी पढ़ाई चल रही थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इस वजह से लोकनाथ अपने बच्चों को लेकर गांव में चले आए। इजीएस स्कूल से पढ़ाई गांव में शुरु की तो लोग ताने मारने लगे। पढ़ाई को बेहतर बनाने के लिए फिर से शहर में आ गए और अंग्रेजी की जगह हिंदी मीडियम में नाम लिखवाया।

पढ़ाई कितनी जरुरी है इस बात की समझ किसान लोकनाथ को थी इसलिए उन्होंने जमीन बेच दी और बच्चों को अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाने लगे। स्मृति ने बताया कि भाईयों की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से थी इसलिए उसने भी जिंदगी और अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट की तैयारी करने लगीं। हालांकि हालात ऐसे हो गए कि उस टेस्ट में शामिल नहीं हो पाई। आहिल्या विश्व विद्यालय इंदौर में टेस्ट में बैठे तो पहली रैंक आ गई।

जज बनी किसान की बेटी

2010 से लेकर 2015 पांच साल तक बीए एलएलबी की पढ़ाई की। रिजल्ट आया तो 86 प्रतिशत। नंबर इतने अच्छे तो आगे बढ़ने को हौसला मिला। 2016 में नेशनल इंस्टीट्यूट भोपाल से एलएलएम की परीक्षा पास की। इसके बाद 2017 से 1018 तक न्यायिक सेवा की परीक्षा पास की। स्मृति के मन में पिता के आर्थिक संकट की स्थिति बसी हुई थी। वह उस दीवार को तोड़ना चाहती थी और पूरी कड़ी मेहनत के बाद उसे सफलता मिली। इसके बाद 24 दिसबंर को बतौर सिविल जज सागर में कार्यरत हुईं।

स्मृति का यह सफर आसान नहीं था। पिता लोकनाथ किसान थे तो जरुरत की सभी चीजें उन्हें आसानी से नहीं मिल पाती थी। लोकनाथ ने बताया कि कठिनाई के दौर में भी उन्होंने बच्चों को कमजोर नहीं होने दिया। संकट के बादल मंडराए, लेकिमन हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि स्मृति को छुट्टी के दौरान कलेक्टर, एसपी और जज के बंगले दिखाते थे और कहते थे कि बस वह बंगले देखभर सकते हैं उनकी औकात नही है कि वह ऐसे बंगले बना पाएं।

स्मृति ने पूरा किया पिता का सपना

हालांकि स्मृति ने उनका सपना पूरा किया, लेकिन असल मेहनत तो लोकनाथ ने की। आर्थिक तंगी में भी उन्होंने बच्चों को पढ़ाया और गांववालों के ताने के बाद भी अपना हौंसला कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनकी बेटी सिविल जज बन गई और बेटा इंजीनियर बन गया। बहन को देखकर दूसरे भाई ने भी इंडियन लॉ इंस्टिट्ट की प्रवेश परीक्षा पास कर ली। वहीं दूसरी बेटी भी पढ़ाई कर रही है।

जज के तौर पर नियुक्त हुईं स्मृति पटेल का मानना है कि जीवन में सफल होने के लिए लक्ष्य का होना जरुरी है।यह हमारी इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है कि हम कितने संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि गांव में पैदा होने का मतलब ये नही है केवल किसानी और मजदूरी में भविष्य है। हर रास्ते खुले है आगे बढ़ों तो कामयाबी मिलेगी। उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा एक बड़ी जिम्मेदारी का काम है। इसके साथ ही वह गांव के युवाओं को शिक्षा की ओर अग्रसर करेंगी जिससे अन्य युवा भी न्यायिक सेवा से जुड़ें।

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