विशेष

लंदन की ये मेम अब पूरी तरह से बन गई है दिल्लीवाली, लेकिन दिल्ली वालों की इस हरकत से हैं परेशान

नई दिल्ली: आपने आज तक भारत में कईं विदेशियों को आते जाते देखा होगा. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी विदेशी महिला के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इन दिनों दिल्ली के वेस्ट निजामुद्दीन की शान बन चुकी हैं. इस महिला का नाम जिलियन राईट है जोकि अरसे से दिल्ली में रह रही हैं. हालाँकि विदेशी लोग हमारी हिंदी भाषा को ठीक से नहीं बोल पाते लेकिन जिलियन इस मामले में काफी हटके हैं और पूरी तरह से हिंदी बोलती हैं. जब भी कोई व्यक्ति उन्हें पहली बार हिंदी बोलते हुए देखता है तो हैरान रह जाता है. यहाँ तक कि वह सब्जीवालो से भी हिंदी में ही भाव का तोल-मोल करती हैं.  वैसे हा जाए तो लोगों का उनका हमारे रंग ढंग में ढलते हुए देखना हैरत की ही बात है क्यूंकि बहुत  ब्रिटिश लोग इ हैं, जो अपनी संस्कृति त्याग कर भारत को अपनाते हैं.

विदेशी समझ कर ठगना चाहते हैं लोग 

हम्मे से बहुत से लोग ऐसे हैं जो विदेशी व्यक्ति देख कर उन्हें ठगने का प्रयास करते हैं. ऐसे में जिलियन के साथ भी ऐसा कईं बार होता रहा है. दरअसल, जब भी वह क़ुतुब मीनार या हुमायु के मकबरे जैसे पर्यटक स्थलों पर घूमने जाती हैं तो लोग उन्हें विदेशी समझ कर अधिक फीस की डिमांड करते हैं. लोगों का ऐसा बर्ताव देख कर जिलियन का कईं बार मन उदास हो जाता है. उर्दू एयर हिंदी की प्रख्यात अनुवादक जिलियन के अनुसार वह एक भारतीय हैं और भारतीय सरकार को टैक्स भी भरती हैं ऐसे में उनसे लोग अधिक फीस की मांग क्यूँ रखते हैं? जिलियन की निराशा उस समय और भी बढ़ जाती है जब वह अपने आस पास के प्रदूषित माहोल को देखती हैं.

वातावरण को रखना चाहती हैं शुद्ध

जिलियन एक कुदरत प्रेमी हैं. वह पेड़ पौधों को बेहद पसंद करती हैं. बीते वर्ष जब सुंदर नगर और मथुरा रोड पर लगे दर्जनों पेड़ों को काटा गया तो वह अन्य स्थानीय नागरिकों के साथ सड़कों पर विरोध के लिए उतरी थी.दरअसल, मथुरा नगर में पिछले साल कईं ऐसे पेड़ों को काट दिया जिनकी उम्र लगभग 70 वर्ष थी. ऐसे में सवाल यह था कि कोई स्थानियों निवासियों से पूछे बिना वह पेड़ कैसे काट सकता था? जिलियन के अनुसार वह सभी पेड़ दिल्ली वालों को अपनी छाया दे कर आने वजूद का अनुभव करवाते थे लेकिन सरकार ने किसी प्रोजेक्ट के चलते उन्हे कटवा दिया. इसके लिए वह निजामुद्दीन एरिया के सामाजिक कार्यकर्ता फरहद सूरी के आग्रह पर उस मार्च से जुड़ी थीं.

गिलियन राईट दिल्ली में 1977 में आई थी. उनके अनुसार जब वह पहली बार दिल्ली आई थी तो दिल्ली एक हर भरा स्थल था लेकिन अब लगातार पेड़ों के कटने से उन्हें वो परिंदे भी नहीं दिखते जो पहले दिखा करते थे. जिलियन को आज भी अफ़सोस है कि सड़कों पर स्पेस न होने के कारण वह साइकिल नही चला पाती हैं. हालाँकि आज सब कुछ बदल चुका है लेकिन इसके बाद भी गिलियन को दिल्ली से बेहतर कोई दूसरा शहर नहीं लगता. उनके अनुसार यहाँ के लोग आपस में मिलते-जुलते रहते हैं जिससे उन्हें कभी अकेलेपन का एहसास नहीं होता.

Related Articles

Back to top button
Close