तो इसलिए पापा के दिल के ज्यादा करीब होती हैं बेटियां

अगर आप सोशल मीडिया बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो अक्सर आपने मीम देखा होगा जिसमें पापा की परी का जिक्र होता है। वैसे तो इस मीम पर लोग हंसते हैं, लेकिन इस बात से कोई भी गुरेज नही कर सकता कि बेटियां वाकई पापा की राजकुमारी होती हैं। अक्सर परिवारों में यह देखने को मिलता है कि लड़के ममाज ब्व़ॉय और लड़कियां डैडी प्रिसेंस होती है। बेटियां अपनी मां की भी अच्छी दोस्त हो जाती हैं। ऐसे में ल़ड़कों के साथ थोड़ी गड़बड़ हो जाती है क्योंकि वह जल्दी अपने पापा से अटैच नहीं होते।

पापा को बना लेती हैं दोस्त

अक्सर परिवारों में मां बेटियों को बड़े होने पर सही से चलने बैठने औऱ सभी चीज की हिदायत देती हैं। ऐसे में लड़कियों को मां की यह सारी बातें पाबंदी लगने लगती हैं। पापा इस बारे में कुछ जल्दी बोलते नही ऐसे में वह अपने पापा से ज्यादा अटैड फील करती हैं। बेटियां कितनी भी बड़ी क्यों ना हो जाए वह अपने पापा के गले लग जाती हैं और अपनी सारी जिद पूरी करवा लेती हैं।

पापा से नहीं मिलती डांट

घर परिवार में जहां बेटों को मम्मी पापा दोनों से अच्छा खासी डांट मिल जाती है वहीं लड़कियां इस मामले में बच जाती हैं। मम्मी से डांट मिली तो मिली पापा जल्दी अपनी बेटिंयों पर सख्त नहीं हो पाते। कितने भी गुस्से में क्यों ना हो बेटी को देखते ही सारा गुस्सा काफुर हो जाता है। ऐसे में बेटियां अपने पापा को बहुत करीबी मानती हैं।

परमिशन के लिए हां

किसी भी तरह का डिसीजन हो मम्मी के हां करने से भी फर्क नहीं पड़ता, लेकिन पापा ने हां कर दी तो फिर किसी से पूछना ही नही है। परमिशन लेने के लिए सबसे बड़ी अपील तो पापा से ही लगानी पड़ती है। लड़कियों को लेकर उनके पापा बहुत ज्यादा चिंतित रहते हैं। ऐसे में अगर मां का मन हो तो भी वह अपनी बेटी को नहीं जाने दे पाती हैं। वही पापा अगर हां बोल दें तो फिर उन्हें कोई रोक नहीं सकता। ऐसे में परमिशन मिलने से बेटियां खुश हो जाती हैं और पापा को अपना दोस्त मानती हैं।

पापा हैं सुपरहीरो

कॉलेज में फीस का प्राब्लम हो या फिर जिंदगी का कोई बड़ा डिसीजन। जब पापा कहते देते हैं कि  चिंता करने की कोई जरुरत नहीं तो एक लड़की के लिए .यह खास हो जाता है। इतना ही नहीं अगर भाई से लड़ाई हो रही हो तो फिर एक ही इंसान है जो उनके लिए सुपरहीरो होता और वह होते हैं उनके पिता। वह अपने पापा से तुरंत शिकायत कर देती हैं औऱ पापा भी आवताव देखे बिना बेटे को ही डांटते हैं। ऐसे में लड़कियों को लगता है कि कुछ भी कर लो उनके पापा उनका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

बिदाई का समय

लड़की किसी अमीर खानदान की हो या गरीब उसकी विदाई का सबसे कठिन समय उसके पिता के लिए होता है। एक पिता अपने जिगर का टुकड़ा किसी और के हाथों सौंपता हैं और ऐसे में लड़कियां भी सबसे ज्यादा अपने पापा को ही मिस करती हैं। अक्सर विदाइयों में देखा जाता है कि मां से ज्यादा लड़कियां अपने पिता से लिपटकर रोती हैं। यह रिश्ता होता ही है बेहद खास।

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