इन 3 लोगों की मदद करना खुद के पैर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है, जानिए चाणक्य नीति

बचपन से सीखाया जाता है कि हमें दूसरों की इज्जत और मदद करनी चाहिए. इस दुनिया के हर इंसान को कभी ना कभी किसी ना किसी की मदद की जरूरत पड़ती ही है और ऐसे में एक सच्चा दोस्त या मजबूत रिश्ते ही काम में आते हैं. आचार्य कौटिल्य ने अपने चाणक्य नीति में बहुत सारी ऐसी बातों का जिक्र किया है जो आम व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करती है. उन नीतियों में पति-पत्नी का रिश्ता, माता-पिता का सम्मान और भी कई अलग-अलग बातों पर लंबा ज्ञान लिखा हुआ है ऐसे में एक सबसे महत्वपूर्ण बात लिखी है. चाणक्य ने बताया है कि इन 3 लोगों की मदद करना खुद के पैर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है, अब ये तीन कौन हैं कहां पाए जाते हैं और हमसे क्या चाहते हैं, ये सभी हमें जानने की जरूरत हैं.

इन 3 लोगों की मदद करना खुद के पैर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है

चाणक्य नीति में एक ऐसी नीति के बारे में बताया गया है कि हमें किन लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए वरना खुद पड़ सकते हैं मुसीबत में. आचार्य चाणक्य के मुताबिक कुछ लोग ऐसे होते हैं दिनकी मदद करने आप उसकी भलाई चाहते हैं लेकिन आपको उल्टा लेना-देना पड़ गया. समय, काल, परिस्थिति, धर्म और नीतियों को ध्यान में रखते हुए आचार्य चाणक्य ने कुछ लोगों को खास भागों में बांटा है. जिसके अनुसार उन्होंने बुद्धि और चतुराई का उपयोग करते हुए हमें ज्ञान की बात बताई है.

बेवजह दुखी रहने वाला व्यक्ति

चाणक्य का कहना है कि जो लोग अपनी जिंदगी से संतुष्ट नहीं रहते और हमेशा दुखी रहते हैं तो उनसे दूर ही रहना चाहिए. इन लोगों की भलाई करने वाला खुद ही परेशानियों से घिर सकता है. ऐसे लोगों का जीवन में चाहे अच्छा हो रहा हो या फिर बुरा लेकिन किसी भी सूरत में रोते ही रहते हैं. ये लोग दूसरों के सुख से ईर्ष्या करते हैं और खुद को ही कोसते रहते हैं. इस तरह ईर्ष्या भाव रखने वाले और बेवजह दुखी रहने वालों को से दूर रहने में ही आपकी भलाई है.

बुरे चरित्र वाले व्यक्ति

अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसका चरित्र ठीक नहीं है तो आपको उससे दूर ही रहना चाहिए. ऐसे लोगों की भलाई करने या इनकी मदद करने के चक्कर आप खुद का ही नुकसान करते हैं. ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से आप समाज और अपने ही घर-परिवार से अपमानित हो सकते हैं. जो लोग धर्म से भटक जाते हैं, वे खुद तो पाप करते ही हैं और दूसरों को भी पाप के रास्ते पर ले जाते हैं इसलिए ऐसे लोगों से दूर ही रहना चाहिए.

मूर्खता पूर्ण बातें करने वाला व्यक्ति

चाणक्य नीति में इस बात का भी जिक्र है जिसमें बताया गया है कि हमें हमेशा मूर्ख व्यक्ति से दूर रहना चाहिए. अगर हम किसी मूर्ख व्यक्ति को जानते हैं जो गलत काम कर रहा है और हम उसकी भलाई करने में उसे कुछ ज्ञान देने चले जाते हैं तो आप गलत कर रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि जो मूर्ख आदमी होता है वो किसी की भी बातों में बहुत जल्दी ही आ जाता है और कभी किसी की बातों को ठीक ढंग से नहीं समझ पाता है. ऐसे में आप अपना समय नष्ट करेंगे लेकिन वो आपकी बातों को समझ नहीं पाएगा.
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