क्योंकि सास ही ससुराल में मां होती है, ऐसे बनाएं रिश्ता मजबूत

न्यूजट्रैंड वेब डेस्कः  हमारे देश में बचपन से ही लड़कियों को उनके ससुराल के नाम पर डराया धमकाया जाता है। इसी वजह से वह कभी ससुराल को जल्दी अपना नहीं समझ पाती। आम तौर पर लड़कियों को सास का डर दिखाते हैं। इसक चलते बिना कुछ जाने ही लड़कियां अपने मन में सांस के लिए बैर भाव रखने लगती हैं। हर रिश्ते की अपनी अलग जगह होती है और ऐसे में सास और बहु का रिश्ता भी बहुत खास होता है। सास आपका ही एक रुप है जो वर्षों पहले उस घर में बहु बनकर आई थी इसलिए आप अपनी सास से बहुत कुछ सीख सकती हैं। आपके बताते हैं कैसे बनाएं सास के साथ अपना रिश्ता मजबूत।

बनाएं सास के साथ अपना रिश्ता मजबूत

दोस्ती करें

किसी भी अनजान रिश्ते की सबसे पहले शुरुआत दोसती से ही होती है। अगर आप मन में नफरत लेकर अपनी सास के साथ रिश्ते शुरु करेंगी तो यह रिश्ता कभी नहीं बन पाएगा। सास आपके पति की मां हैं औऱ इसलिए वह समान ही होती हैं। उनसे प्यार से बात करें और दोस्त बनाकर आपसी तालमेल बैठाएं।

सास भी मां है

कोई आपके मां की जगह नहीं ले सकता, लेकिन मां के बाद सास होती है जिसके साथ आप अपनी बची हुई जिंदगी गुजारती हैं। सास को मां जैसा समझने की कोशिश करें। उनकी डांट को भी मां की डांट समझे और जैसे खुले मन से आप अपनी सारी बात मां से कह देती हैं वैसे ही सास से अपनी सारी बात कहें। अगर आप रिश्ते का मान रखेंगी तो वह भी इसमें पीछे नहीं हटेंगी।

ना होने दे गलतफहमी

मां बेटी का रिश्ता हो, पति पत्नी का या फिर सास बहु का। हर रिश्ता गतफहमी के चलते बिगड़ जाता है। अपने रिश्ते में गलतफमी ना पनपने दें।अगर आपसे कोई गलती हो जाए तो बेझिझक उनके माफी मांग लें। लोगों को अपने बीच खटास ना पैदा करने दें। रिश्ते के तार को उलझने ना दें।

रिश्ते को दें सम्मान

अपनी सास का नजरिया समझने  की कोशिश करें। वह किस बात पर आपसे नाराज होती है। वह असल में क्या चाहती हैं।उनकी आपसे क्या उम्मीदे हैं। ऐसी बातों को जानने की कोशिश करें। उन्हें यह समझाएं की आप उनके लिए हमेशा मौजूद हैं। अपने रिश्ते को हमेशा सम्मान दें।

बदलें नजरिया

अगर आपको लगता है कि किसी बात पर आपकी सास का फैसला गलत हैं तो उन्हें आराम से यह बातें समझाए। उन पर झूँझला कर या बद्तीमीजी के साथ जवाब ना दें। उनका नजरिया बदलने की कोशिश करें। उन्हें अपने विचार बताएं। हालांकि इस बात को कभी नजरअंदाज ना करें कि उनका अनुभव आपसे कहीं ज्यादा है इसलिए बहुत कम ही ऐसे मौके होंगे जहां वह गलत हों। फिर भी अगर आपको कुछ ऐसा लगे तो खुद को शांत रखते हुए काम की बात करें।

दीवार ना बनें

अगर आपकी बिल्कुल नहीं बनती और आप प्रयास नहीं करना चाहती तो वह एक अलग बात है, लेकिन कभी भी उनके बेटे को या अपने बच्चों को उनसे दूर ना करें। घर के बुजुर्ग जो संस्कार बच्चों को देते हैं वह उन्हें किसी और से नहीं मिल सकता।

 

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