37 साल बाद रक्षाबंधन पर ऐसा योग, जानिए इस त्योहार से जुड़ी 5 सबसे खास बातें

भारत में जितने धर्म हैं उतने ही त्योहार भी मनाए जाते हैं. यहां हर त्योहार के पीछे एक त्योहार इंतजार करता है मगर कुछ त्योहार हर किसी के लिए होते हैं और वो है ‘रक्षाबंधन’, जिसका इंतजार हर साल हर भाई-बहन करते हैं. इस साल रक्षाबंधन 26 अगस्त यानि रविवार के दिन है और सावन पूर्णिमा 25 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 16 मिनट पर शुरु होगी और 26 अगस्त की शाम 5 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगी तो इसलिए इस बार रक्षाबंधन सावन के महीने में ही मनाया जाएगा और 37 साल बाद रक्षाबंधन पर ऐसा योग. इसलिए अगर आपने शुभ मुहूर्त में राखी बांधी तो उन भाई-बहनों के रिश्ते बहुत अच्छे से निभते हैं.

37 साल बाद रक्षाबंधन पर ऐसा योग

इस बार के रक्षाबंधन में भद्रा काल नहीं है और राखी बांधने का सही समय भी इस बार समय पर ही निर्धारित किया गया है. इस बार अगर सही मुहूर्त में आपने अपने भाई को राखी बांधी तो आपका रिश्ता हमेशा गहरा ही बनेगा क्योंकि इस बार का योग और मुहूर्त बहुत खास है. तो चलिए जानते हैं इस रक्षाबंधन की 5 खास बातें.

1. इस बार रक्षाबंधन पर धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा, इसके अलावा सावन के महीने में राखी बांधने का शुभ मुहुर्त 37 सालों के बाद आया है जो अपने आप में खास मौका है.

2. वैसे तो भाई की कलाई पर बहन के राखी बांधने का कोई मुहुर्त नहीं होता, वे जब उन्हें राखी बांध दें तभी मुहुर्त अच्छा मान लिया जाता है. मगर शास्त्रों के अनुसार हर शुभ काम करने से पहले शुभ मुहुर्त को निर्धारित किया जाता है और व्यक्ति को उसी के अनुसार शुभ काम करने चाहिए. ऐसा करने से भाई-बहन के बीच प्यार और अपनापन बना रहता है.

3. वैसे तो हर साल रक्षाबंधन पर राखी बांधने के शुभ मुहूर्त को तलाशा जाता था लेकिन इस बार सावन के महीने में रक्षाबंधन होने की वजह से इसका शुभ मुहुर्त 26 अगस्त की सुबह 5.59 से लेकर दोपहर 3.37 बजे तक रहेगा. इसी शुभ मुहुर्त पर अगर आप अपने भाई की कलाई पर राखी बांधेंगी तो ये आप दोनों के लिए बहुत शुभ होगा.

4. ऐसा माना जाता है कि अगर आप अशुभ समय पर राखी को बांधते हैं तो इसका कुछ दूसरा ही परिणाम आपके जीवन में आ सकता है. इसलिए इस अशुभ समय में राखी बांधने का प्रयास बिल्कुल भी ना करें. इस अशुभ काल का समय होगा राहुकाल- शाम 4:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक या यम घंटा दोपहर 3.38 से 5.13 बजे तक.

5. इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा काल का साया नहीं होगा, भद्राकाल में राखी बांधना अशुभ माना जाता है. इस साल राखी की सबसे खास बात यही है कि भद्राकाल सूर्य उदय होने से पहले ही समाप्त हो जाएगा और ऐसा 37 सालों के बाद होने जा रहा है.