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हम सपने क्यों देखते हैं और क्या हैं इसके फायदे-नुकसान? जानिए ‘स्वप्न’ का पौराणिक मतलब

सपने आना स्वाभाविक है. यह हर किसी को आते हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचने की कोशिश की है कि यह सपने क्यों आते हैं? इन सपनों के क्या फायदे और नुकसान हैं? शायद इस बारे में आपने कभी सोचा नहीं होगा. लेकिन कुछ वैज्ञानिकों ने सपने आने के पीछे अपने-अपने संभावित कारण दिए हैं. एक वैज्ञानिक के अनुसार, कोई आकांक्षा या इच्छा न पूर्ण होने पर हमें सपने आते हैं. एक ने कहा कि दिन भर की महत्वपूर्ण घटनाएं जिसके बारे में हम जागते वक़्त ज्यादा विचार नहीं करते, रात में वहीं सपने के रूप में आते हैं. क्योंकि दिन भर चलने वाली ये घटनाएं हमारे दिमाग में होती हैं.

ये तो रहा सपनों का वैज्ञानिक अर्थ. लेकिन आज हम आपको इस सवाल का पौराणिक दृष्टि से भी जवाब देने की कोशिश करेंगे. महाभारत काल में एक बार युधिष्ठिर ने यह सवाल भीष्म से पूछा था. भीष्म ने क्या जवाब दिया था चलिए आपको बताते हैं.

महाभारत युद्ध के दौरान दसवें दिन भीष्म वीरगति को प्राप्त हो गए थे. लेकिन उनके पास इच्छा मृत्यु का वरदान था. इस वरदान की वजह से उन्होंने अपने प्राण उत्तरायण के शुरू होने तक रोक लिए. फिर उन्होंने अपने प्राण भगवान श्री कृष्ण को देखते हुए माघ मास की शुक्ल पक्ष अष्टमी के दिन त्याग दिए. इस दौरान सभी पांडव उनसे ज्ञान अर्जित करने के लिए आते थे. बोलने में असमर्थ होने के कारण भगवान कृष्ण ने उन्हें बाणों पर रहने वाली पीड़ा से मुक्त कर दिया था और साथ ही अपना ज्ञान भी उन्हें दे दिया था. इसी दौरान युधिष्ठिर ने भीष्म से स्वप्न के बारे में जानने की कोशिश करी.

युधिष्ठिर ने पूछा कि स्वप्न क्या होता है? भीष्म ने जवाब दिया कि यह एक तरह से मनुष्य का शत्रु है. इस दौरान हम कुछ ऐसे कर्म करते हैं जो हैं भी और नहीं भी. जो अपना कल्याण चाहते हैं उन्हें कभी सोना नहीं चाहिए. जब हमारी इन्द्रियां दिन भर के कार्यों या भोगों से थक जाती हैं तब हम निद्रा अवस्था में चले जाते हैं. हमारा शरीर सोता है लेकिन मन नहीं. जब मनुष्य जगा होता है तो वह उचित और अनुचित के बारे में अपने दिमाग से सोचता है और फिर उस विचार का त्याग कर देता है. लेकिन स्वप्न अवस्था में मनुष्य वह सब सोची हुई बातें पूरी करने के लिए स्वतंत्र हो जाता है. तब हमारा मन स्वपन में मनुष्य का रूप धारण करके वह सब कार्य कर लेता है जिसे हम असलियत में करने से संकोचते हैं.

स्वप्न हर व्यक्ति देखता है. लेकिन उठने पर उसे अक्सर स्वप्न याद नहीं रहते. बहुत कम ही ऐसे लोग होते हैं जिन्हें उठने के बाद स्वप्न याद रहे. मन को जीतने वाला व्यक्ति स्वप्न को भी जीत लेता है.

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