वशीकरण या किसी व्यक्ति को अपने नियंत्रण में करना बहुत मुश्किल कार्य है। सभी चाहते हैं कि लोग उनकी बात सुने, उनके वश में रहे लेकिन ऐसा संभव नहीं होता है। पर आज हम आपको कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं जिससे ये अंसम्भव कार्य भी सम्भव हो सकता है। दरअसल किसी भी व्यक्ति को कैसे वश में किया जाए, इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने एक बहुत ही महत्व पूर्ण मंत्र दिया है और यही वशीकरण मंत्र हम आपको बता रहे हैं।

आचार्य चाणक्य एक महान ज्ञानी के साथ ही एक अच्छे नीतिकार भी थे l उन्होंने अपनी नीतियों में मनुष्य के जीवन को सुखमय बनाने के लिए बहुत सी महत्वपूर्ण बातें बताई हैं l आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

आचार्य चाणक्य का वशीकरण मंत्र

आचार्य चाणक्य कहते है-लुब्धमर्थेन गृह्णीयात् स्तब्धमंजलिकर्मणा, मूर्खं छन्दानुवृत्त्या च यथार्थत्वेन पण्डितम्।।

यानि जो व्यक्ति धन का लालची है उसे पैसा देकर, घमंडी या अभिमानी व्यक्ति को हाथ जोड़कर, मूर्ख को उसकी बात मान कर और विद्वान व्यक्ति को सच से वश में किया जा सकता है।

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हमारे आसपास कई प्रकार के लोग हैं। कुछ धन के लोभी हैं तो कुछ घमंडी भी हैं। कुछ मूर्ख हैं तो कुछ लोग बुद्धिमान भी हैं। इन लोगों को वश में करने का सबसे सरल मार्ग है कि किसी लालची व्यक्ति को धन देकर वश में किया जा सकता है।

वहीं जो लोग घमंड में चूर होते हैं उन्हें हाथ जोड़कर या उन्हें उचित मान-सम्मान देकर वश में किया जाना चाहिए। यदि किसी मूर्ख व्यक्ति को वश में करना हो तो वह व्यक्ति जैसा-जैसा बोलता हैं हमें ठीक वैसा ही करना चाहिए। झूठी प्रशंसा से मूर्ख व्यक्ति वश में हो जाता है। इसके अलावा यदि किसी विद्वान और समझदार व्यक्ति को वश में करना है तो उसके सामने केवल सच ही बोलें। वह आपके वश में हो जाएगा।

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इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत ‍और नीतियाँ प्रासंगिक हैं तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन और जीवानानुभवों से अर्जित अमूल्य ज्ञान को, पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया।

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