माँ ने छोड़ी कुर्सी तो बेटा बैठ गया, बेटे ने छोड़ी कुर्सी तो माँ बैठ गयी, ये है कांग्रेस कांग्रेसियों ने यह मान लिया है कि गांधी परिवार के अलावा उनका बेड़ा कोई पार नहीं लगा सकता है

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस का हाल इन दिनों बद से बदतर हो गया है। जी हां, कांग्रेस पार्टी के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती है, जिसके लिए प्रयास भी नहीं हो रहा है। इसी बीच राहुल गांधी का एक बयान तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने खुद कांग्रेस पार्टी को लेकर तीखा बयान दिया था। इतना ही नहीं, इस बयान के वायरल होने के बाद यही कहा जा रहा है कि वाकई उस रैली में राहुल गांधी ने जो जो कहा था, उनका हर एक शब्द आज सच हो रहा है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?

20 जनवरी 2013 को जयपुर के कांग्रेस चिंतन शिविर में दिए गए करीब 38 मिनट के भाषण में राहुल गांधी ने सत्ता को जहर बताया था। उस समय सत्ता का जहर वाला भाषण काफी तेज़ी से वायरल हुआ था। इतना ही नहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि राहुल गांधी का यह भाषण सुनने के बाद सोनिया गांधी समेत तमाम दिग्गज नेताओं की आंखे गीली हो गई थी, लेकिन उसके बाद भी कांग्रेस में कुछ नहीं बदला। बता दें कि राहुल गांधी ने यह भाषण उपाध्यक्ष बनने के बाद दिया था, जिसमें उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया था।

राहुल गांधी ने कांग्रेस पर दिया था ये बयान

उपाध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी ने जयपुर के कांग्रेस चिंतन शिविर में बयान देते हुए कहा कि ‘कांग्रेस एक मजेदार संगठन है। एक भी नियम और कानून इस पार्टी में नहीं चलते। हम हर मिनट एक नया नियम बनाते हैं और पुराने वाले को दबा देते हैं। कोई हमसे पूछे कि पार्टी क्या करती है, तो हमारा जवाब होना चाहिए कांग्रेस पार्टी देश के लिए नेता तैयार करती है।’ बता दें कि यहां लिखे एक एक शब्द राहुल गांधी के सत्ता जहर है वाले बयान का ही हिस्सा है। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस अपनी नीतियों के अनुसार ही अध्यक्ष चुन ले और फिर पार्टी ने उनकी ही मां को चुन लिया।

बेटे का छोड़ा जहर मां पीने को हुई मजबूर

राहुल गांधी द्वारा सत्ता का जहर पीने के बाद बचा कुचा जहर उनकी मां को मजबूरन पिलाया गया, क्योंकि यहां भी पार्टी की एक अपनी रणनीति देखने को मिली। दरअसल, इस बार सोनिया गांधी को अध्यक्ष ज़रूर बनाया गया, लेकिन उनके आगे अंतरिम अध्यक्ष लिखा जाएगा, क्योंकि अभी कहानी में ट्विस्ट बाकी है। बता दें कि कांग्रेसियों ने यह मान लिया है कि गांधी परिवार के अलावा उनका बेड़ा कोई पार नहीं लगा सकता है और फिर से इसके बाद उन्होंने सोनिया गांधी को अपनी नई अध्यक्ष चुन लिया।

शाह-मोदी जी की वजह से बच गई प्रियंका गांधी

सूत्रों की माने तो 10 अगस्त को कांग्रेस की नई अध्यक्ष के रुप में प्रियंका गांधी की ताजपोशी होने वाली थी, जिसके लिए मंच तैयार था, बस औपचारिक ऐलान बाकी थी, लेकिन इसी बीच शाह और मोदी जी ने धारा 370 का टंटा ला दिया, जिसकी वजह से प्रियंका गांधी की ताजपोशी भी रोक दी गई और अब उचित समय का इंतजार किया जा रहा है, जिसकी वजह से सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है।