चाणक्य के अनुसार हमेशा अपमानित होते हैं ये 6 काम करने वाले लोग, कहीं आप तो नहीं करते ये गलती अनजाने में हम कुछ ऐसे काम कर रहे हैं जो हमें नहीं करना चाहिए, अगर आप भी इनमें से कुछ भी कर रहे हैं तो उसे तुरंत बदल लें

बदलते वक्त के साथ केवल समय आगे नहीं बढ़ता बल्कि साथ ही लोगों में भी काफी बदलाव देखने को मिलता है। लोग पहले की अपेक्षा अधिक आधुनिक और तेज-तरार्र हो गए हैं वे हर चीज को एक बौद्धिक स्तर से ही देखना चाहते हैं, लेकिन वक्त चाहे जितना भी बदल जाए कुछ चीजें हमेशा हमपर असर डालती हैं और उसका प्रभाव हम पर समय-समय पर देखने को भी मिल जाता है।

हर व्यक्ति अपने जीवन में हर वो उंचाई हासिल करना चाहता है जिससे कि लोग उसे औरों से खास समझें और उसका सम्मान करें, लेकिन कई बार अनजाने में ही सही लेकिन हम में से कई लोगों से ऐसी गलतियां हो जाती हैं जो आगे चलकर हमारे अपमान का कारण बनती हैं और हमें काफी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। अगर आप अपने जीवन में अपमानित होने से बचना चाहते हैं तो कभी भूल से भी इन गलतियों को ना करें….

अपनी बात पर नियंत्रण न रखना

ऐसा कहा जाता है कि बाण से निकला धनुष और मुख से निकली बात कभी भी वापस नहीं होते। जीवन में वाणी के बेहद अहम माना जाता है। इसलिए कहीं भी कुछ बालने से पहले कई बार सोच लें और अपने शब्दों के चयन में एहतियात बरतें। कबीरदास ने भी अपनी चौपाई में यह कहा है कि वाणी ऐसी होनी चाहिए जिससे स्वंय के साथ-साथ सभी को शीतलता मिलें। वाणी हमेशा मधुर और मीठी होनी चाहिए जिसे सुनकर आपका शत्रु भी आपकी प्रशंसा करने से खुद को न रोक पाए।

दुसरों से स्वंय की तुलना

यह इंसान की एक ऐसी भावना है जिसे हम ना तो पूरी तरह से गलत ठहरा सकते हैं और ना ही पूरी तरह से सही क्योंकि अगर आप किसी सफल इंसान से अपनी तुलना करते हैं तो आप उसकी तरह बनना चाहते हैं ऐसे में आपको केवल उसकी अच्छे गुण लेने चाहिए। लेकिन आज के समय में ज्यादातर लोग दुसरों से तुलना करने के क्रम में उस व्यक्ति के प्रति जलन की आपके मन में जलन की भावना आ जाती है। आप यह नहीं देख पाते कि वह कितनी कड़ी मेहनत के बाद इस मुकाम पर पहुंचा है। ऐसी सोच आपके बौद्धिक विकास को प्रभावित करती है और आप कई बार भरी महफिल में हंसी का पात्र भी बन सकते हैं।

बच्चों की अनदेखी करना

जब तक आपका बच्चा अपने पैरों पर खड़े होने के योग्य न हो जाए तबतक हर माता-पिता की यह जिम्मेदारी होती है कि वे बच्चों की हर भौतिक औऱ भवनात्मक जरूरतों को पूरा करें। इस चीज की अनदेखी करने से आपके बच्चे को कोई बहला-फुसलाकर उसे गलत रास्ते पर ला सकता है। ऐसे में आपको समाज में अपमान का सामना करना पड़ सकता है।

हैसियत से ज्यादा दान

दान देना सबसे अधिक पुण्य का काम होता है। हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए लेकिन दान देते वक्त अपनी आर्थिक स्थिति को ध्यान में जरूर रखें। क्योंकी कई बार हम अपनी हैसियत से ज्यादा दान कर देते हैं या दिखावा करते हैं और बाद में हमें किल्लत से जूझना पड़ता है औऱ दूसरों के सामने हाथ फैलाने तक की नौबत आ जाती है

अपने जीवनसाथी का अपमान करना

यदि आप अपने जीवन में अपने हमसफर या पार्टनर को उचित सम्मान नहीं देते या अपमान करते हैं तो यह आपके भी अपमान का कारण बन सकता है। इस स्थिति का लाभ कोई और उठा सकते है और बाद में आप केवल हाथ मलते रह जाएंगे।

गलत संगति

बचपन में आप सबने वह कहावत तो जरूर पढ़ी होगी कि बुरी संगत का असर बुरा ही होता है। आप स्वंय चाहे कितने भी अच्छे क्यों न हों लेकिन आप जिन लोगों के साथ ज्यादातर समय बिता रहे हैं उनका सही रहना ज्यादा जरूरी है। कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आप सही होते हुए भी गलत लोगों के साथ रह रहे हैं तो समाज आपको गलत नजर से ही देखेगा।

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