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चाणक्य नीति: इन 3 लोगों से दूर रहने पर ही मिलती है सफलता, कहीं आपके आसपास भी तो नहीं ऐसे लोग

आचार्य चाणक्य पाटलिपुत्र (जिसे अब पटना के नाम से जाना जाता है) के महान विद्वान थे. चाणक्य को उनके न्यायप्रिय आचरण के लिए जाना जाता था. इतने बड़े साम्राज्य के मंत्री होने के बावजूद वह एक साधारण सी कुटिया में रहते थे. उनका जीवन बहुत सादा था. चाणक्य ने अपने जीवन से मिले अनुभवों को चाणक्य नीति में जगह दिया है. चाणक्य नीति में कुछ ऐसी बातें बताई गई हैं जिस पर यदि व्यक्ति अमल करे तो उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. सफलता निश्चय उसके कदम चूमने लगेगी. यदि व्यक्ति इन बातों का प्रयोग अपने निजी जीवन में करे तो उसे कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ेगा. चाणक्य नीति के पहले अध्याय के चौथे श्लोक में सफलता का सूत्र बताया गया है. इस नीति में चाणक्य ने उन लोगों के बारे में बात की है जो आपकी सफलता और तरक्की में रुकावट बनते हैं. इसलिए चाणक्य ने कहा है कि यदि आप सफलता और तरक्की चाहते हैं तो ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. ऐसे लोगों से आपका सामना बिजनेस और नौकरी के क्षेत्र छोड़कर हर जगह होगा. आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गए ये बातें आज के समय और परिस्थितियों में भी सच होती हैं.

श्लोक

मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टस्त्रीभरणेन च ।
दुःखितैः संप्रयोगेण पण्डितोऽप्यवसीदति II

मूर्ख व्यक्ति को समझाना

इस श्लोक में चाणक्य ने कहा है कि कभी भी मूर्ख शिष्य को उपदेश देने में अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहिए. इन्हें उपदेश देना मतलब भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है. अर्थात यदि आपका पाला किसी मूर्ख व्यक्ति से पड़ जाए तो उसे समझाने या सिखाने में अपना समय व्यर्थ न करें. इसका सीधा असर आपकी सफलता और तरक्की पर पड़ सकता है.

दुष्ट स्त्री से दूर रहना

चाणक्य नीति के अनुसार बुरे स्वभाव वाली महिलाओं से बचकर रहना चाहिए. जो महिलाएं मर्यादाओं का उल्लंघन करती हैं, जोर से बोलती हैं, बिना सोचे समझे काम करती हैं, ऐसी महिलाओं से दूर रहना चाहिए. यदि आप भी किसी ऐसी महिला के संपर्क में हैं तो उनसे तुरंत दूरी बना लें. ऐसे महिलाये पुरूषों से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती हैं.

नकरात्मक सोच वाले लोग

चाणक्य ने कहा है कि बिना कारण दुखी रहने वाले लोगों से दूर रहना चाहिए. हर वक़्त दुखी रहने वाले लोग अक्सर नकारात्मक सोच रखते हैं. आचार्य चाणक्य ने ऐसे लोगों से हमेशा दूरी बनाये रखने कि हिदायत दी है. ऐसे लोग न खुद कुछ करते हैं न आपको कुछ करने देते हैं. इनके नकारात्मक विचार आपकी तरक्की में रुकावट पैदा कर सकते हैं.

तो आचार्य चाणक्य के अनुसार इन तीन तरह के लोगों से जितना दूर रहा जाए उतना ही बेहतर है. यदि आप भी किसी ऐसे इंसान को जानते हैं तो उनसे थोड़ी दूरी बना लें.

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