बच्चों को इसी उम्र में सिखाएंगे अगर 4 बातें तो बन जाएगा उनका भविष्य, संस्कार में ये बातें भी जरुरी बच्चों को जरुर सिखाएं ये बातें ताकी वो बन सकें एक अच्छे नागरिक, कहीं इन्हें बताना भूल तो नहीं रहें

हमारे देश में आज भी बच्चे जब कोई गलती करते हैं या फिर कुछ अच्छा करते हैं तो दोनों का श्रेय उनके माता पिता को जाता है। माता पिता की परवरिश पर ही कहा जाता है कि कैसी सीख दी है जो बच्चा बिगड़ गया, या फिर वाह क्या सीख दी है, बच्चा कितना आगे निकल गया। जीवन जीने के लिए संस्कार की जरुरत होती है। समय बढ़ने के साथ बच्चे कुछ बातें खुद से सीखते हैं, लेकिन उनके अंदर बचपन से ही जो संस्कार डाले जाते हैं वो समय बढ़ने के साथ तक उनके पास रहते हैं। एक संस्कार ही हैं जिसकी मजबूत नींव पर एक अच्छा भविष्य औऱ एक अच्छा नागरिक तैयार होता है।

देश के प्रति भक्ति जगाएं

आज के समय में देशभक्ति को लेकर लोगों के अंदर अलग ही तरह की भावना हो गई है। कुछ लोग राष्ट्रीय गान पर उठना ही नहीं चाहते हैं तो किसी को देश के ध्वज को सम्मान देने में संकोच लगता है। इस बात को अपने बच्चों को बचपन से ही सिखाएं। उन्हें बताएं कि जिस धरती पर हमने जन्म लिया। जिस देश में हम रहते हैं उसके झंडे को और उस देश को सम्मान देना जरुरी है। जब बच्चा बचपन से ही देश को सम्मान देना सीखता है तो बड़े होने पर उसे ऐसा करना कहीं से खराब नहीं लगता औऱ वो अपने देश से प्यार करना सीखता है।

सिखाएं घर का काम

बच्चे छोटे हैं वो आपकी तरह काम नहीं कर सकते, लेकिन थोड़े से भी बड़े बच्चों को घर के काम करना जरुर सिखाएं। खासकर किचन में काम करने की  शिक्षा जरुर दें। सिर्फ लड़कियों को ही नहीं बल्कि लड़को को भी किचन का काम सिखाएं। बच्चों के अंदर कुछ भी सीखने की क्षमता तेज होती है। जब उन्हें आप कुछ सिखाएंगी तो धीरे धीरे वो सब सीखने लगेंगे और आगे चलकर खाना बनाना उन्हें पहाड़ नहीं लगेगा।

सेक्स एजुकेशन

हमारे देश में आज भी ज्यादातर जगहों पर सेक्स को टैबू मानते हैं औऱ उसके बारे में बात करना खराब माना जाता है। हालांकि बच्चों की उम्र जब बढ़ने लगती है तो वो सेक्स और पॉर्न जैसी चीजों को लेकर उत्सुक होने लगते हैं।  कई बार इस जानकारी को पाने के चक्कर में व गलत हरकतें कर जाते हैं। ऐसे में इन बातों को शांति से उन्हें समझाएं। इसमे शर्माने जैसा कुछ भी नही हैं। उन्हें उतनी जानकारी दे जितना उनके लिए जानना जरुरी है औऱ साथ ही उन्हें तय सीमा के बारे में भी बताएं। कहां समाज उन्हें गलत समझ सकता है औऱ किस वक्त पर क्या होना चाहिए इन सभी बातों को उन्हें समझाएं।

बचत सिखाएं

बच्चे हैं तो जिद करेंगे हीं। उन्हें बचत करना सिखाएं और साथ ही हर चीज की जिद अगर वो करें तो उसे भी समझाए। जब आप बच्चों की हर जिद पूरी करते है तो फिर उन्हें चीजों की वैल्यू नहीं पता चलती है। बच्चों के अंदर बचपन से ही सेविंग करना सिखाएं। उन्हें पैसा जोड़ना सिखाएं और फिर उन्ही पैसे से उनके लिए सामान खरीदें इससे वो पैसों की कद्र करना सिखे।

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