मोटी हो बोलकर टीचर ने स्टेज से उतार दिया, सालों बाद खेल में बनाया करियर, जीत चुकी है गोल्ड मेडल

स्कूल में बच्चे सिर्फ किताबी पढ़ाई नहीं करते बल्कि अपने दोस्तों, टीचर्स और स्कूल के माहौल से बहुत प्रभावित भी होते हैं। पढ़ाई औऱ खेल के साथ कल्चरल प्रोग्राम में हिस्सा लेने से उनके अंदर का छिपा टैलेंट बाहर आता है। ऐसे ही एक इवेंट में एक सातवीं क्लास की बच्ची के साथ कुछ ऐसा हुआ कि उसने अंपने अंदर का टैलेंट खोज लिया। सातवीं क्लास में पढ़ने वाली उपासना को स्टेज पर जाकर राधा बनना था। जब स्टेज पर चढ़ने लगी तो टीचर ने रोक दिया और कहा कि उतर जाओ, उससे कहा गया कि वह मोटी है और कृष्ण के साथ नहीं नाच सकती। वह राधा नहीं बन सकती। इस घटना के बाद एक दशक तक वह लड़की स्टेज पर नहीं आई।

जब स्टेज से सबके सामने उतारा

उपासना जिसकी टीचर ने उसे मोटा बोलता हुए स्टेज से उतार दिया था जब वह दोबारा लोगों के सामने आई तो सभी के होश उड़ गए। उपासना कोई मॉडल नहीं बनी बल्कि आज वह पॉवर लिफ्टर है और वो भी नेशनल लेवल की। पॉवर लिफ्टर एक ऐसा स्पोर्ट है जिसमे तीन तरह से झटके में भारी वजन उठाना पड़ता है और ऐसा कर पाना हर किसी की बस की बात नही है। इसके लिए काफी मेहनत और दम लगता है। आज इस खेल में उपासना काफी महारत हासिल कर चुकी हैं।उनका यहां तक पहुंचने का सफर काफी कठिन है, लेकिन काफी प्रभावित करने वाला भी है।अपने इस सफर के बारे में उपासना ने बताया कि कैसे उनकी आलोचना करने वालों ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उपासना का वजन बहुत ज्यादा था, लोग उन्हें ताने मारते थे, उनका मजाक उड़ाते थे। वह हमेशा रोया करती थीं। एक दिन दोस्त ने उन्हें समझाया कि अपने इस डिप्रेशन और गुस्से का इस्तेमाल कहीं और करना चाहिए और अपनी कमजोरी को अपनी ताकत बना लो।

डिप्रेशन को बदला ताकत में

उपासना ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले जिम जाने का फैसला किया। इलके बाद धीरे धीरे वजन घटने लगा। वजन घटाना शुरु किया तो साथ ही वर्कआउट और डाइट की वजह से ताकत बढ़ने लगी। इसके बाद पॉवरलिफ्टिंग की तरफ उपासना का झुकाव बढ़ गया। उन्होंने पहला मैच 1 जुलाई 2018 को खेला। आज तक वह दो स्टेट, दो नेशनल और एक डिस्ट्रिक्ट खेल चुकी हैं। इस खेल से उन्हें गोल्ड, एक सिल्वर, दो ब्रोंज मेडल जीत चुकी हैं।उन्होंने कहा कि अगर समय से ही उन्हें गाइडेंस मिल गया होता तो कबका वो स्पोर्टस में आ चुकी होती।उपासना ने बताया कि कैसे वह अपना वजन कंट्रोल रखती हैं और उनका पूरा दिन कैसे बीतता है। उपासना सुबह उठकर सबसे पहले हनुमान जी की पूजा करती हैं और उनका धन्यवाद करती हैं कि वह उनके साथ हैं। इसके बाद वह ब्रेकफास्ट करती हैं और कॉलेज जाती हैं। वहां से खाली होती हैं तो ट्यूशन पढ़ाती हैं। ट्यूशन के बाद जिम जाती हैं और रोज का वर्कआउट करती हैं। वर्कआउट के बाद वह अपनी दूसरी मील लेती हैं। इसके बाद से खाना बनाती है, गाना सुनती हैं , सोशल मीडिया का इस्तेमाल करती हैं और सो जाती हैं।

मोटे होने की वजह से खोए दोस्त

उपासना ने बताया कि कैसे मोटा होना उनके लिए खतरनाक साबित हुआ। उन्होंने कहा कि स्कूल में इस वजह से मेरे कभी दोस्त नहीं बने। खुद  को खो दिया, अपने ही लोग मजाक बनाते थे। जिस चीज ने सबसे ज्यादा चोंट पहुंचाई थी वह थे टीचर्स, अकंल्स और कजिन्स जिनसे मुझे .यौन शोषण का शिकार होना पड़ता था। वह मुझसे कहते थे कि तुम्हारा शरीर भरा हुआ है और इस वजह से लोग तुम्हारी तरफ अट्रैक्ट होते हैं।उपासना ने कहा कि उन्हें 18 साल ये समझने में लग गए कि गलत वो लोग थे। उन्होंने कहा कि मैंने आगे की पढ़ाई के लिए घर छोड़ा और नए लोगों से मिली। नए दोस्त बनाए ऐसे भी टीचर्स मिले जिन्होंने आगे बढ़ने का हौसला दिया औऱ गाइड किया। इन लोगों ने मुझे डिप्रेशन और डर से लड़ने में मदद की। उपासना ने कहा कि उनके पैरेंट्स बहुत सपोर्टिव हैं। हालांकि कुछ मामलों में हमारी बहस हो जाती है। बाकी मेरे करियर औऱ जिंदगी में मेरा सपोर्ट करते हैं।

क्या है खेल की सावधानी

पॉवर लिफ्टिंग के बारे में उपासने ने बताया कि क्या चीजें हैं जो बहुत जरुरी हैं। पॉवरलिफ्टिंग में डाइट, वर्कआउट और आराम करना बहुत जरुरी है। आपको एक्सरसाइज के बारे में पूरी तरीके से पता होना चाहिए। आप किस तरह से आप एक्सरसाइज करते हैं इसका भी ध्यान रखना बहुत जरुरी है, नहीं तो चोट लग जाएगी। काफी भारी वजन होता है और सब में बैलेंस बहुत जरुरी है।उपासना ने कहा कि लड़की होने से भी आपको समस्या झेलनी पड़ती है। बॉयलोजिकल तरीके से देखा जाए तो ताकत हासिल करना भी काफी कठिन होता है। समय से आने जाने की पाबंदी भी आप पर लग जाती है। घर पर कई तरह के फंक्शन होते हैं तो डाइट मैनेज करना बहुत मुश्किल होता है।

जीत के बाद क्या है भविष्य के प्लान

अभी तक उपासना डिस्ट्रिक्ट में 2 गोल्ड, स्टेट में 2 गोल्ड, 1 सिल्वर और नेशनल में 2 ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं। उन्होंने बताया कि सबसे मुश्किल पुणे में हुआ नेशनल ब्रेंचपेस कंपटीशन था। उस वक्त उन्हें 103 डिग्री बुखार था। टीम के और लोग भी बीमार हो गए थे तो सारा फिजीकल और इमोशनल स्ट्रेस उन्हीं के ऊपर था। स्टेज पर पहुंची तो कांप रही थी। उपासना ने कहा कि रेफरी की नजर भी मुझ पर पड़ गई थी उन्होंने नोटिस किया की मैं रो रही हूं। आंखों से आंसू छलक रहे थे, लेकिन फिर भी लिफ्ट किया। उस नेशनल बेंच प्रेस चैंपियनशिप मे मैंने ब्रॉन्ज मेडल जीता।उपासना ने कहा कि जम्मू के एक मॉडलिंग इवेंट हुआ था। द लायनेस हंट के नाम से। बहुत सी फिट और पतली मॉडल्स के बीच कम हाइट वाली मोटी लड़की मैं थी। ये मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट था। उन्होंने बताया कि मोटे होने के कारण उनकी टीचर ने उन्हें स्टेज से उतार दिया था और कहा था कि मोटी लड़की राधा नहीं बन सकती। इसके बाद सालों बाद स्टेज पर आई तो जमकर डांस किया। खुद का प्यार फिर से मिल गया था। आज उपासना का सबसे बड़ा काम है डिप्रेशन से लड़वना। फिलहाल वह टीचिंग लाइन में हैं। इसके साथ ही वह उन लोगों को भी ट्रेन करना चाहती हैं जिनको वर्कआउट और डाइटिंग में मदद चाहिए।

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