बजट 2019 : विकास की पटरी पर दौड़ रहा है भारत, 2022 तक सबके पास होगा अपना घर

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बतौर वित्तमंत्री मोदी सरकार के पहले कार्यकाल का आखिरी बजट संसद में पेश कर रहे हैं। यह बजट राजनीति नज़रिए और देश के विकास के लिए काफी खास रहने वाला है। जी हां, देश का बजट वित्तमंत्री पेश करते हैं, लेकिन अरूण जेटली की तबीयत खराब है, इसलिए वित्तमंत्री का कार्यभार पीयूष गोयल को सौंपा गया है, जोकि संसद में अंतरिम बजट पेश कर रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि बजट 2019 में आपके लिए क्या खास है?

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल इस समय संसद में देश का बजट पेश कर रहे हैं। यह बजट बीजेपी के लिए बहुत ही ज्यादा खास है, क्योंकि इसी बजट से आगामी चुनाव की रणनीति तय होने वाली है। ऐसे में यह बजट चुनावी बजट भी हो सकता है। इस बजट के ज़रिए बीजेपी कई लोकलुभावने वायदे भी कर सकती है, जिसकी झलक साफ साफ दिखाई दे रही है। पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि भारत विकास की पटरी पर दौड़ रहा है और हमने हर क्षेत्र में काम किया है और आगे भी करेंगे।

2022 तक सभी भारतीयों के पास होगा घर

पीयूष गोयल ने अपने भाषण में कहा कि 2022 तक सभी भारतीयों के पास अपना खुद का घर होगा और इस पर सरकार लगातार काम कर रही है। बता दें कि मोदी सरकार का यह लक्ष्य शुरू से रहा है कि सबसे पहले हर भारतीय के पास खुद का घर हो। ध्यान दिला दें कि साल 2014 में रोटी, कपड़ा और मकान के वायदे के साथ बीजेपी ने केंद्र में सरकार बनाया था, जिस पर बीजेपी आगे भी समपर्ति रहेगी।

विकास की राह पर दौड़ रहा है भारत

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अपने भाषण में कहा कि भारत विकास की राह पर दौड़ रहा है। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि पिछले 5 सालों में हमने महंगाई पर लगाम लगाई और इसी रफ्तार से हम आगे भी काम करते रहेंगे। याद दिला दें कि 2014 में जब लोकसभा के चुनाव हुए थे तब बीजेपी महंगाई को मुद्दा बनाकर सत्ता में आई थी, ऐसे में बीजेपी लगातार यह दावा कर रही है कि बीते पांच सालों में महंगाई पर लगाम लगाई गई है।

गरीबो को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने का काम किया

पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि हमने गरीबों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने में काफी काम किया है और इसके लिए वर्ष 2018-19 में 1,70,000 करोड़ रु. का व्यय किया गया है। बता दें कि मोदी सरकार हमेशा से ही गरीबों के लिए समपर्ति रही है, ऐसे में इस बजट में गरीबों के लिए कुछ नया ऐलान हो सकता है, जिसका इंतजार गरीब पिछले पांच सालों से कर रहे हैं।