घर के मंदिर में इन तीन चीजों का होना है जरुरी, कभी नहीं होगी धन और बरकत की कमी

ईश्वर ने हमें जन्म दिया है और इस सृष्टि की रचना की है। उनकी वजह से ही हम संसार में सांस ले रहे हैं और अपना जीवन बसर कर रहे हैं। इस बात का धन्यवाद हम उन्हें उनकी पूजा करके या वंदना करके देते हैं। हिंदू धर्म में खासतौर पर इस पूजा पाठ का बहुत महत्व है। पूजा पाठ करने से लोग भगवान को याद करते हैं, अपने किसी मनोकामना की मांग करते हैं और कुछ मिल जाता है तो उसका धन्यवाद देते हैं। हालांकि पूजा पाठ करने की अलग अलग विधि होती है और कुल लोग इस बात से अनजान रहते हैं। अगर पूजा सही तरीके से ना की गई हो तो उसका फल नहीं मिलता है। इसके बाद लोग हैरान होते हैं कि गलती कहां हुईं। इन सबसे पहले आपका यह जानना जरुरी है कि मंदिर में किन सामानों का होना जरुरी है और क्या नहीं रखना चाहिए।

शास्त्रों में इस बात का उल्लेख हैं कि अगर आप हिंदू धर्म में जन्में हैं तो घर में पूजा का मंदिर या पूजा स्थान जरुर होना चाहिए। साथ ही यह मंदिर यह स्थान ईशान कोण में होना चाहिए। घर में पूजा घर बनाने वालें लोगों को पता होना चाहिए की ढेर सारी मूर्ति रखने से कुछ नहीं होगा सिर्फ 2 या 3 मूर्ति रखकर पूजा करना ही सही माना जाता है। जैसे आप घर में रहते हैं तो साफ सफाई से रहते हैं वैसे ही इस बात का ध्यान रखें कि जहां भी आपका पूजा घर हो वह साफ सूथरा हो और उसमें किसी भी तरह की गंदगी ना हो। हमेशा पूजा घर को साफ रखें।अब आपको बताते हैं कि आपके मंदिर में किन तीन चीजों का होना बेहद जरुरी है।

आचमन

आचमन पूजा के दौरान इस्तेमाल करने वाली सबसे जरुरी चीज है। इसके बिना आपकी पूजा सफाई से हुई नहीं मानी जाती है। सबसे पहले आपको आचमन का मतलब समझा देते हैं। एक छोटे से तांबे के बर्तन में जल और तुलसी का पत्ता रखते हैं और एक तांबे का चम्मच होता है जो उस बर्तन से पानी के इस्तेमाल में लाया जाता है। किसी भी पूजा की शुरुआत में आचमन से ही संकल्प लेते हैं और प्रसाद के रुप में भी इसे कई बार ग्रहण किया जाता है। आचमन करने से पूजा सार्थक मानी जाती है साथ ही दिया जलाने के बाद अपना हाथ आचमन के पानी से ही साफ करते हैं क्योंकि पूजा के दौरान आसन से उठकर जाना गलत माना जाता है।

पंचामृत

हवन या कथा के दौरान सबसे ज्यादा उपयोगी प्रसाद कोई होता है तो वह है पंचामृत। आप चाहें तो अपने रोज की पूजा में पंचामृत का इस्तेमाल कर सकते हैं।  पंचामृत बनाने के लिए दही शहद घी गुड़ और मेवे का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें एक साथ मिलाकर पंचामृत बनाया जाता है। पंचामृत में तुलसी का पत्ता डालने से वह ईश्वर का प्रसाद बन जाता है। इसे भगवान को अर्पित कर फिर प्रसाद के रुप में लेना चाहिए। इससे शरीर को रोगों से लड़ने में मदद मिलती है और हमारे आत्मा की शुद्धि के लिए यह उपयोगी माना जाता है।

चंदन

मस्तिष्क को शांत और ईश्वर के करीब ले जाने के लिए चंदन का इस्तेमाल बहुत जरुरी होता है। चंदन हमारे मन को शीतलता प्रदान करता है। पूजा के दौरान चंदन का इस्तेमाल करना सही माना जाता है। अगर पूजा करते समय आपका दिमाग क्रोध में हैं या फिर अशांत है तो पूजा का कोई फ नहीं मिलेगा। इस वजह से चंदन लगाकर पूजा करने से सभी क्रोध शांत होते हैं औऱ मन की भी शीतलता प्रदान होती है। इस वजह से इन तीनों चीजों के आपके घर के मंदिर में होना बेहद जरुरी है।

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