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नए साल में किसानों के लिए अहम फैसला लेने जा रही है मोदी सरकार, जय जवान के साथ होगा जय किसान भी

लोकसभा के चुनाव नजदीक हैं और केंद्र सरकार पूरी तरह से किसानों को मनाने में लगी हुई है। किसानों की नाराजगी का असर मोदी सरकार को हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में देखने को मिला है। एक तरफ जहां कांग्रेस कर्ज माफी का दांव चली रही हैं, वहीं बीजेपी भी उन रियायतों पर कदम बढ़ाने की कोशिश में लगी है जिसका असर तुरंत दिखें और लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इसका फायदा मिले। पिछले 10 दिन में सरकार ने किसानों को लेकर लगभग पांच बैठक की है और माना जा रहा है कि नया साल किसानों को राहत देने वाला हो सकता है।

पूर्ण कर्जमाफी

सरकार की तरफ से पूर्ण कर्जा माफ करने का विकल्प भी है या फिर एक रुपए के प्रीमियम पर फसल बीमा योजना और उपज के उचित मूल्य की गारंटी पर भी विचार बन रहा है। पीएम मोदी के कार्यालय में देर शाम तक उच्चस्तरीय बैठक चली है। इस बैठक में वित्त मंत्री अरुण जेटली और कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह भी शामिल थे। इसमें किसानों के कर्जमाफी से .जुड़े कई विकल्पों पर विचार किया गया है।

सरकार को विकल्प के साथ यह भी ध्यान देना है कि किसी भी फैसले का असर सरकारी खजाने पर कितना पड़ रहा है। अगर खबरों की मानें तो किसानों के पूरे कर्जे माफ कर दिए जाते हैं तो सरकारी खजाने पर 3.25 लाख करोड़ रुपए पड़ेगा। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अगर पूर्ण कर्ज माफी का विकल्प हटाकर दूसरे विकल्प के बारे में सरकार सोचती है तो यह है उपज के उचित मूल्य दिलाने की गारंटी का विकल्प है।

फसल की वाजिब कीमत

इस विकल्प का मतलब होगा कि किसानों को उनकी फसल की वाजिब कीमत का भुगतान मिलेगा। हालांकि सरकार ने यह फैसला बीते खरीफ सीजन शुरु होने  पहले ही कर लिया था और अब यह खत्म होने पर है। बाजार मूल्य की भरपाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य और बाजार मूल्य के अंतर की भरपाई के लिए सरकार सभी किसानों के प्रति एकड़ के हिसाब से दो हजार रुपए का भुगतान करने का फैसला ले सकती है।अगर यह फैसला ले लिया जाता है तो लोकसभा चुनाव के पहले किसानों के इस विकल्प से लाभ देने से सरकारी खजाने पर 50 हजार करोड़ रुपए का बोझ आएगा।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

तीसरे विकल्प की बात करें जो केंद्र सरकार ले सकती है वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है। इसमें मात्र एक रुपए के प्रीमियम पर फसल बीमा पॉलिसी दी जा सकती है। इस प्रस्ताव से किसानों की खेती किसी भी खतरे से बाहर हो जाएगी। इसके असल प्रीमियम का डेढ़ से पांच फीसद तक देना पड़ेगा। अगर सरकार यह फैसला लेता है तो इस पर अधिकत 10 हजार करोड़ रुपए केंद्र और पांच हजार करोड़ रुपए राज्यों के खजाने पर पड़ सकता है।

किसान क्रेडिट कार्ड

केंद्र के चौथे विकल्प में किसान क्रेडिट कार्ड शामिल है। अभी तक किसानों को एक लाख रुपए का कर्ज लेने के लिए जमीन गिरवी रखनी पड़ती थी। अगर यह विकल्प लागू होता है तो दो लाख रुपए तक के कर्ज के लिए भी किसानों को जमीन गिरवी नहीं रखनी होगी। इससे किसानों को बैंक से कर्ज लेने में आसानी होगी।

धनराशि जमा कराना

पांचवा विकल्प देश के तीन राज्यों में चलाया जा रहा है जिसमें तेलंगाना, उड़ीसा और धारखंड शामिल है। इसके तहत किसानों की बढ़ती लागत में कटौती के लिहाज से सब्सिडी देने  की योजना के तहत हर सीजन में प्रति एकड़ के हिसाब से एकमुश्त धनराशि बैंक खाते में जमा कराई जाए। इसमें तेलंगाना सरकार प्रत्येक किसान को हर साल उसके बैंक खाते में 8000 रुपए जमा कराती है। इसमें उड़ीसा सरकार 5 हजार रुपए देती है और झारखंड करीब 10 हजार रुपए जमा कराएगी। इस योजना  लागू होने से खजान पर ढाई लाख करोड़ रुपए का भार आएगा।

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